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कोटा में बच्चों की मौत से जिला अस्पताल में चौकसी
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एसएनसीयू का निरीक्षण करते मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. प्रताप सिंह
- फोटो : LALITPUR
ललितपुर। राजस्थान के कोटा में हुई बच्चों की मौत को लेकर स्वास्थ्य महकमा बच्चों के इलाज को लेकर गंभीर हो गया है। शनिवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रताप सिंह ने जिला अस्पताल पहुंचकर एसएनसीयू व एनआरसी का निरीक्षण का सुविधाओं की जानकारी ली और इलाज में कोताही नहीं बरतने के निर्देश दिए।
राजस्थान के जेके लोन अस्पताल में एक माह में 104 बच्चों की मौत हो चुकी है। भारी संख्या में बच्चों की मौत होने से सभी लोगों के चेहरे पर भय व खौफ नजर आ रहा है। घटना ने सभी का दिल झकझोर दिया है। इस घटना को लेकर स्वास्थ्य महकमा गंभीर नजर आ रहा है। शनिवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. प्रताप सिंह ने जिला अस्पताल का निरीक्षण कर बच्चों के वार्डों की स्थिति की जानकारी ली।
निरीक्षण में मुख्य चिकित्सा अधिकारी एनआरसी वार्ड पहुंचे, जहां पर बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी ली। उन्होंने अतिकुपोषित व कुपोषित बच्चों का स्वास्थ्य परखा। बच्चों की माताओं से अस्पताल में मिलने वाली सुविधा की स्थिति जानी, जिस पर महिलाओं ने बताया कि सुबह के समय नाश्ता, दोपहर और शाम को खाना दिया जा रहा है। बच्चों में कुछ सुधार भी हो रहा है। प्रतिदिन बच्चों का वजन नापा जा रहा है। उन्होंने एसएनसीयू में पहुंच कर रेडियन वार्मर व अन्य यंत्रों की जानकारी ली। इसमें पाया कि सभी 12 वार्मर कार्य कर रहे हैं। यहां पर कम दिनों के नवजात रखे जाते हैं और सर्दी से होने वाली मौत को रोका जा सकता है। इंफेक्शन की स्थिति का भी जायजा लिया। बताया कि वार्ड में आने वालों को मुंह पर मॉक्स व सिर पर कैप लगवाया जाता है।
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उन्होंने नवजात शिशुओं को देखा, जिसमें बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी ली। मौके पर नियुक्त स्टाफ नर्स ने बताया कि एक नवजात कम दिनों का है, जो गंभीर है। लेकिन, इलाज के दौरान सुधार आ रहा है। श्वांस से परेशान होने वाले बच्चों को नेबुलाइजर की सुविधा उपलब्ध है। मौजूद तीमारदार माताओं ने बताया कि चिकित्सक द्वारा बच्चे का उपचार किया जा रहा है। इस दौरान सीएमओ ने स्टाफ व चिकित्सकों से ईमानदारी से कर्तव्यों का पालन करने के निर्देश दिए।
एसएनसीयू व एनआरसी वार्ड का निरीक्षण किया, जिसमें सब कुछ सही पाया है। जिला का एसएनसीयू प्रदेश में नंबर एक पर है। अस्पताल में बच्चों का उपचार व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा है।
- डा. प्रताप सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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राजस्थान के जेके लोन अस्पताल में एक माह में 104 बच्चों की मौत हो चुकी है। भारी संख्या में बच्चों की मौत होने से सभी लोगों के चेहरे पर भय व खौफ नजर आ रहा है। घटना ने सभी का दिल झकझोर दिया है। इस घटना को लेकर स्वास्थ्य महकमा गंभीर नजर आ रहा है। शनिवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. प्रताप सिंह ने जिला अस्पताल का निरीक्षण कर बच्चों के वार्डों की स्थिति की जानकारी ली।
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निरीक्षण में मुख्य चिकित्सा अधिकारी एनआरसी वार्ड पहुंचे, जहां पर बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी ली। उन्होंने अतिकुपोषित व कुपोषित बच्चों का स्वास्थ्य परखा। बच्चों की माताओं से अस्पताल में मिलने वाली सुविधा की स्थिति जानी, जिस पर महिलाओं ने बताया कि सुबह के समय नाश्ता, दोपहर और शाम को खाना दिया जा रहा है। बच्चों में कुछ सुधार भी हो रहा है। प्रतिदिन बच्चों का वजन नापा जा रहा है। उन्होंने एसएनसीयू में पहुंच कर रेडियन वार्मर व अन्य यंत्रों की जानकारी ली। इसमें पाया कि सभी 12 वार्मर कार्य कर रहे हैं। यहां पर कम दिनों के नवजात रखे जाते हैं और सर्दी से होने वाली मौत को रोका जा सकता है। इंफेक्शन की स्थिति का भी जायजा लिया। बताया कि वार्ड में आने वालों को मुंह पर मॉक्स व सिर पर कैप लगवाया जाता है।
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उन्होंने नवजात शिशुओं को देखा, जिसमें बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी ली। मौके पर नियुक्त स्टाफ नर्स ने बताया कि एक नवजात कम दिनों का है, जो गंभीर है। लेकिन, इलाज के दौरान सुधार आ रहा है। श्वांस से परेशान होने वाले बच्चों को नेबुलाइजर की सुविधा उपलब्ध है। मौजूद तीमारदार माताओं ने बताया कि चिकित्सक द्वारा बच्चे का उपचार किया जा रहा है। इस दौरान सीएमओ ने स्टाफ व चिकित्सकों से ईमानदारी से कर्तव्यों का पालन करने के निर्देश दिए।
एसएनसीयू व एनआरसी वार्ड का निरीक्षण किया, जिसमें सब कुछ सही पाया है। जिला का एसएनसीयू प्रदेश में नंबर एक पर है। अस्पताल में बच्चों का उपचार व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा है।
- डा. प्रताप सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी