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छठवीं बेटी के जन्म पर मां को सदमा, मौत
lalitpur
Updated Sun, 03 Jul 2016 01:32 AM IST
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स्त्री
- फोटो : demo pic
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ललितपुर। गिरार के सेमराखेड़ा गांव में एक महिला को लगातार छठवीं बार बेटी पैदा हुई तो उसे इस कदर सदमा लगा और उसकी उसकी मौत हो गई। अब बड़ा सवाल कि उसकी बेटियों की देखरेख कौन करेगा? पूरे गांव में शोक की लहर है।
गिरार थाना क्षेत्र के ग्राम सेमराखेड़ा निवासी अशोक बरार का विवाह सोलह वर्ष पहले गीता से हुआ था। उसकी पत्नी गीता (38) ने एक के बाद एक लगातार पांच बेटियों को जन्म दिया। इसमें सबसे बड़ी 14 और सबसे बेटी तीन वर्ष की है। गरीबी से जूझ रहे इस परिवार के लिए पांच बेटियों के पालना मुश्किल हो रहा था। अशोक मजदूरी में इतना नहीं कमा पाता है कि उसके खर्चे पूरे हो जाएं। गीता को उसके कुछ रिश्तेदार और गांव वाले ताने भी मारते थे। इससे वह दुखी रहती थी। पुत्र के लिए उसने मन्नतें मांगीं और मंदिरों पर माथा टेका। उसकी बेटियों को रक्षाबंधन और भाईदूज पर भाई न होने का मलाल रहता। गीता जब छठवीं बार गर्भवती हुई तो उसे पूरी उम्मीद थी कि इस बार बेटा होगा। शनिवार सुबह प्रसव पीड़ा पर परिजन उसे सीएचसी मड़ावरा ले गए, जहां सुबह आठ बजे उसने छठवीं बेटी को जन्म दिया। बेटी का जन्म होने की खबर मिलते ही परिजन सकते में आ गए। उन्होंने तय किया कि गीता को इसकी जानकारी नहीं देंगे। उन्हें डर था कि उसे सदमा न लग जाए। गीता के पूछने पर उसकी सास ने कहा कि उसके घर पुत्र पैदा हुआ है। यह सुन गीता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। जच्चा और बच्चा स्वस्थ होने पर चिकित्सकों ने उसे छुट्टी दे दी।
गीता अपने परिजनों के साथ ऑटो से अपने घर जा रही थी, तभी उसने नवजात को ध्यान से देखा तो पता चला कि वह बेटा नहीं बेटी है। फिर वही हुआ जिसका परिजनों को डर था। गीता छठवीं बार बेटी होने का सदमा बर्दाश्त नहीं कर सकी। फफक-फफक कर रोने लगी और बेहोश हो गई। परिजन वापस उसे सीएचसी मड़ावरा ले गए, जहां से चिकित्सकों ने उसे जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया। वहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। पत्नी की मौत से दुखी अशोक का रो-रो कर बुरा हाल है। वह कहता है कि अब इन बेटियों की परवरिश कैसे होगी। गांव वाले उसे ढाढस बंधा रहे हैं।
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गिरार थाना क्षेत्र के ग्राम सेमराखेड़ा निवासी अशोक बरार का विवाह सोलह वर्ष पहले गीता से हुआ था। उसकी पत्नी गीता (38) ने एक के बाद एक लगातार पांच बेटियों को जन्म दिया। इसमें सबसे बड़ी 14 और सबसे बेटी तीन वर्ष की है। गरीबी से जूझ रहे इस परिवार के लिए पांच बेटियों के पालना मुश्किल हो रहा था। अशोक मजदूरी में इतना नहीं कमा पाता है कि उसके खर्चे पूरे हो जाएं। गीता को उसके कुछ रिश्तेदार और गांव वाले ताने भी मारते थे। इससे वह दुखी रहती थी। पुत्र के लिए उसने मन्नतें मांगीं और मंदिरों पर माथा टेका। उसकी बेटियों को रक्षाबंधन और भाईदूज पर भाई न होने का मलाल रहता। गीता जब छठवीं बार गर्भवती हुई तो उसे पूरी उम्मीद थी कि इस बार बेटा होगा। शनिवार सुबह प्रसव पीड़ा पर परिजन उसे सीएचसी मड़ावरा ले गए, जहां सुबह आठ बजे उसने छठवीं बेटी को जन्म दिया। बेटी का जन्म होने की खबर मिलते ही परिजन सकते में आ गए। उन्होंने तय किया कि गीता को इसकी जानकारी नहीं देंगे। उन्हें डर था कि उसे सदमा न लग जाए। गीता के पूछने पर उसकी सास ने कहा कि उसके घर पुत्र पैदा हुआ है। यह सुन गीता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। जच्चा और बच्चा स्वस्थ होने पर चिकित्सकों ने उसे छुट्टी दे दी।
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गीता अपने परिजनों के साथ ऑटो से अपने घर जा रही थी, तभी उसने नवजात को ध्यान से देखा तो पता चला कि वह बेटा नहीं बेटी है। फिर वही हुआ जिसका परिजनों को डर था। गीता छठवीं बार बेटी होने का सदमा बर्दाश्त नहीं कर सकी। फफक-फफक कर रोने लगी और बेहोश हो गई। परिजन वापस उसे सीएचसी मड़ावरा ले गए, जहां से चिकित्सकों ने उसे जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया। वहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। पत्नी की मौत से दुखी अशोक का रो-रो कर बुरा हाल है। वह कहता है कि अब इन बेटियों की परवरिश कैसे होगी। गांव वाले उसे ढाढस बंधा रहे हैं।
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