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पानी खरीद कर की जा रही है खेती
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 26 Nov 2016 12:39 AM IST
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bundelkhand ka dard
- फोटो : demo
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तीन साल तक दैवी आपदाओं से नुकसान झेल चुके महरौनी तहसील के सौजना, जगारा, सड़कोरा,पथराई, जुदैया, लार, रुकवाहा आदि गांवों के किसानों को पानी खरीद कर खेती करनी पड़ रही है। उन्हें इस बार अच्छे मानसून से थोड़ी उम्मीद बंधी थी, लेकिन कुएं उम्मीद के अनुसार नहीं भर सके। इन गांवों में सिंचाई के और साधन भी नहीं हैं। न नहरें हैं और न सरकारी नलकूप। ऐसे में किसानों को निजी नलकूप संचालकों से सिंचाई के लिए पानी मोल लेना पड़ रहा है। रही सही कसर नोटबंदी ने पूरी कर दी है।
गेहूं बोने का समय चल रहा है, लेकिन किसान खेतों को सींचने के लिए रुपयों का इंतजाम करने को मारे-मारे घूम रहे हैं। इस क्षेत्र में सिंचाई का मुख्य साधन कुएं व नलकूप हैं। नलकूप बड़े किसानों के पास हैं। छोटे किसान कुएं पर ही आश्रित रहते हैं, लेकिन अच्छे मानसून के बाद भी कुआं खाली पड़े हैं। ऐसे हालातों में किसानों को पानी खरीदना पड़ रहा है। एक घंटा पानी देने के लिए सौ से डेढ़ सौ रुपये अदा करने पड़ रहे हैं। जिनके पास पैसे नहीं हैं, वह आधी अधूरी सिंचाई कर खेतों में बीज डाल रहे हैं। ग्राम सडकोरा में किसानों को इसी स्थिति से जूझना पड़ रहा है।
ग्राम सड़कोरा निवासी भगवान दास का कहना है कि उनके क्षेत्र में सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं हैं। बारिश के सहारे इस क्षेत्र के किसान रहते हैं। सरकार ने इस क्षेत्र में पानी की किल्लत दूर करने को कोई भी परियोजना शुरू नहीं की है। ग्राम सौजना निवासी ऊदल सिंह बताते हैँ कि इस बार मानसून अच्छा रहा, लेकिन गांव के कई कुएं खाली पड़े हैं।
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नोटबंदी ने किया और परेशान
सरकार द्वारा नोटबंदी करने से किसानों को खेतीबाड़ी छोड़कर बैंकों की कतार में लगना पड़ रहा है।
किसानों को डीजल, बीज व खाद के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। सौजना निवासी श्याम लाल का कहना है कि हमारे पास सिंचाई का साधन नहीं है। सरकार द्वारा किसी योजना का लाभ नहीं दिया गया है। खेत सूखे पड़े हुए हैं। ग्राम मैनवार और नवागण मध्य प्रदेश की सीमा से लगे हुए हैं। इन गांव में आने जाने में भी परेशानी होती है। जब किसान बैंक पहुंचता है तब तक कैश खत्म हो जाता है। किसानों का खाद- बीज लाने में परेशानी उठानी पड़ रही है।
नहीं मिल रही बिजली
ग्राम जगारा और पथराई के किसानों का कहना है कि बिजली भी पर्याप्त मात्रा में नहीं दी जा रही है। मात्र चार या पांच घंटे के लिए ही लाइट आ रही है, जिससे खेतों की सिंचाई पूरी तरह से नहीं हो पा रही है।
किसानों को नहीं मिली राहत राशि
क्षेत्र के किसानों का आरोप है कि अतिवृष्टि व सूखा राहत राशि बांटने में जमकर धांधली बरती गई है। राजस्व कर्मियों ने अपने चहेतों को राहत राशि उपलब्ध करा दी है, जबकि दूसरे किसान भटक रहे हैं। कई ऐसे किसानों को भी राहत राशि उपलब्ध करा दी गई, जो कि हकदार नहीं थे। खुमान सिंह बताते हैँ कि राहत राशि वितरण में जमकर धांधली बरती गई है। अगर पूरी राहत राशि वितरण की उच्च स्तरीय जांच हो जाए तो बहुत बड़ा घोटाला सामने आ सकता है।
नहर की मांग कर रहे किसान
ग्राम सौजना से आठ किमी दूरी पर ग्राम क्योलारी के पास जमडार बांध बनाया गया है। इस बांध से पचास गांव के किसान अपने खेतों की सिंचाई कर सकते हैं। किसानों का कहना है कि जमड़ार बांध से गुढा गांव होते हुए रूकवाहा गांव तक नहर निकाल दी जाए तो हजारों हेक्टेयर खेतों में सिंचाई हो सकेगी। जुदैया, रूकवाहा, लार, सड़कोरा सौजना आदि गांव वाले लगातार नहर की मांग कर रहे हैं।
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गेहूं बोने का समय चल रहा है, लेकिन किसान खेतों को सींचने के लिए रुपयों का इंतजाम करने को मारे-मारे घूम रहे हैं। इस क्षेत्र में सिंचाई का मुख्य साधन कुएं व नलकूप हैं। नलकूप बड़े किसानों के पास हैं। छोटे किसान कुएं पर ही आश्रित रहते हैं, लेकिन अच्छे मानसून के बाद भी कुआं खाली पड़े हैं। ऐसे हालातों में किसानों को पानी खरीदना पड़ रहा है। एक घंटा पानी देने के लिए सौ से डेढ़ सौ रुपये अदा करने पड़ रहे हैं। जिनके पास पैसे नहीं हैं, वह आधी अधूरी सिंचाई कर खेतों में बीज डाल रहे हैं। ग्राम सडकोरा में किसानों को इसी स्थिति से जूझना पड़ रहा है।
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ग्राम सड़कोरा निवासी भगवान दास का कहना है कि उनके क्षेत्र में सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं हैं। बारिश के सहारे इस क्षेत्र के किसान रहते हैं। सरकार ने इस क्षेत्र में पानी की किल्लत दूर करने को कोई भी परियोजना शुरू नहीं की है। ग्राम सौजना निवासी ऊदल सिंह बताते हैँ कि इस बार मानसून अच्छा रहा, लेकिन गांव के कई कुएं खाली पड़े हैं।
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नोटबंदी ने किया और परेशान
सरकार द्वारा नोटबंदी करने से किसानों को खेतीबाड़ी छोड़कर बैंकों की कतार में लगना पड़ रहा है।
किसानों को डीजल, बीज व खाद के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। सौजना निवासी श्याम लाल का कहना है कि हमारे पास सिंचाई का साधन नहीं है। सरकार द्वारा किसी योजना का लाभ नहीं दिया गया है। खेत सूखे पड़े हुए हैं। ग्राम मैनवार और नवागण मध्य प्रदेश की सीमा से लगे हुए हैं। इन गांव में आने जाने में भी परेशानी होती है। जब किसान बैंक पहुंचता है तब तक कैश खत्म हो जाता है। किसानों का खाद- बीज लाने में परेशानी उठानी पड़ रही है।
नहीं मिल रही बिजली
ग्राम जगारा और पथराई के किसानों का कहना है कि बिजली भी पर्याप्त मात्रा में नहीं दी जा रही है। मात्र चार या पांच घंटे के लिए ही लाइट आ रही है, जिससे खेतों की सिंचाई पूरी तरह से नहीं हो पा रही है।
किसानों को नहीं मिली राहत राशि
क्षेत्र के किसानों का आरोप है कि अतिवृष्टि व सूखा राहत राशि बांटने में जमकर धांधली बरती गई है। राजस्व कर्मियों ने अपने चहेतों को राहत राशि उपलब्ध करा दी है, जबकि दूसरे किसान भटक रहे हैं। कई ऐसे किसानों को भी राहत राशि उपलब्ध करा दी गई, जो कि हकदार नहीं थे। खुमान सिंह बताते हैँ कि राहत राशि वितरण में जमकर धांधली बरती गई है। अगर पूरी राहत राशि वितरण की उच्च स्तरीय जांच हो जाए तो बहुत बड़ा घोटाला सामने आ सकता है।
नहर की मांग कर रहे किसान
ग्राम सौजना से आठ किमी दूरी पर ग्राम क्योलारी के पास जमडार बांध बनाया गया है। इस बांध से पचास गांव के किसान अपने खेतों की सिंचाई कर सकते हैं। किसानों का कहना है कि जमड़ार बांध से गुढा गांव होते हुए रूकवाहा गांव तक नहर निकाल दी जाए तो हजारों हेक्टेयर खेतों में सिंचाई हो सकेगी। जुदैया, रूकवाहा, लार, सड़कोरा सौजना आदि गांव वाले लगातार नहर की मांग कर रहे हैं।