ललितपुर। बुंदेलखंड के 13 जिलों के अंतर्गत आने वाले ऐसे सैकड़ों पुरातात्विक, ऐतिहासिक, नैसर्गिक स्थल हैं जिन्हें पुरातात्विक धरोहरों की श्रेणी में रखा गया है। ये ऐसे स्थल हैं जिन्हें संरक्षण की दरकार है। 18 अप्रैल को विश्व विरासत दिवस के बारे में पर्यटन मित्र फिरोज इकबाल डायमंड ने बताया कि इसके मनाने का उद्देश्य धरोहरों के प्रति जागरूकता लाना है।
उन्होंने बताया कि मध्य भारत की शान गौरवशाली बुंदेली क्षेत्र की सीमाओं में विभिन्न राजाओं के कार्यकाल में परिवर्तन आया पर सांस्कृतिक भौगोलिक इकाई के रूप में ललितपुर, झांसी, जालौन, हमीरपुर, बांदा, महोबा, चित्रकूट, दतिया, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सागर, दमोह को बुंदेलखंड परिक्षेत्र से जाना गया। यहां प्राचीन काल से लेकर अब तक प्राप्त विभिन्न स्रोतों, शिलालेखों, ग्रंथों, मुद्राओं के प्रमाणों, शौर्य, इतिहास से गौरव गाथाएं भरी पड़ी हैं। झांसी में झांसी दुर्ग, रानीमहल, बरुआसागर, जराय का मठ, गुजर्रा, गढ़मऊ झील, ललितपुर में बानपुर, देवगढ़, दूधई, चांदपुर जहाजपुर, पाली, बालाबेहट का किला, जालौन में चौरासी गुंबद, बांदा में नीलकंठ मंदिर, हमीरपुर में सिंह महेश्वरी मंदिर, चौरा देवी, कल्पवृक्ष, महोबा में खखरा मठ, रहिलिया सागर सूर्य मंदिर, चित्रकूट में कामदगिरि, रामघाट, जानकीकुंड, सती अनुसुइया आश्रम, गुप्त गोदावरी, दतिया में पीतांबरा पीठ के साथ ही अनेक विशिष्ट स्थल यहां मौजूद हैं जिनका संरक्षण कार्य प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए।

कुंडलपुर का जैन मंदिर।- फोटो : LALITPUR

फिरोज इकबाल डायमंड- फोटो : LALITPUR