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बजट आवंटित न होने से टायरों के अभाव में खड़ी हो गईं रोडवेज बसें
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- फोटो : roadways.jpeg
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ललितपुर। परिवहन निगम में बजट आवंटित न होने से रोडवेज बसों का संचालन ठप होता जा रहा है। झांसी रोडवेज डिपो में 20 बसें टायरों के अभाव में बंद खड़ी हैं। इससे लगातार रोडवेज बसों का संचालन कम होता जा रहा है। इसके साथ ही संचालित बसों में कंडक्टरों की कमी है। इससे सीमित बसों रूटों पर दौड़ रहीं है। ऐसे में रोडवेज से सफर की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
जिले में यातायात के साधन सुगम बनाने के लिए निजी बसों के अलावा परिवहन निगम द्वारा रोडवेज बसों का संचालन किया जा रहा है। शुरूआती दौर में लगभग आठ बसों के संचालन के परमिट विभाग के पास थे। जिसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में यातायात की सुविधा के लिए लोहिया ग्रामीण बस सेवा का संचालन किया। जनपद में 20 बसों के परमिट जारी किए गए और बसों का संचालन शुरू किया गया। बसों का संचालन शुरू होते ही अधिकांश रूटों पर बसों की सुविधा हो गई। लोगों को जिला मुख्यालय व झांसी तक के लिए सफर की सुविधा सुलभ हुई।
लेकिन, अब परिवहन विभाग में खड़ी बिना टायरों की बसें बजट की राह देख रहीं हैं। स्थिति यह है कि रोडवेज विभाग की बसों का संचालन ठप होता जा रहा है। यहां पर दो माह में लगभग एक दर्जन से अधिक बसों का संचालन बंद हो गया है। जिले में चलाई जाने वाली बसों में 20 बसों के टायर खराब हो गए हैं, जिन्हें बदला जाना है। पर विभाग के पास बजट न होने से टायर नहीं खरीदे जा पा रहे हैं। टायरों की हालत काफी खराब होने से चलने तक की स्थिति में नहीं हैं, जो बसें चल रहीं हैं, इनके टायर भी कंडम हालत में पहुंचने की कगार पर हैं। इससे लगातार रोडवेज बसों का संचालन कम होता जा रहा है। इससे सीमित बसों रूटों पर दौड़ रहीं है। ऐसे में रोडवेज से सफर की सुविधा नहीं मिल पा रही है। शीघ्र ही विभाग को बजट नहीं मिला तो चल रहीं चार बसों का संचालन भी बंद हो जाएगा।
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कंडक्टरों की भी बनी है कमी
परिवहन निगम की रोडवेज डिपो में संचालित बसों के सापेक्ष कंडक्टरों की भी कमी हो गई है। स्थिति यह है कि 240 बसें संचालित होती हैं। इनमें एक सैकड़ा कंडक्टरों कम हैं। इससे भी संचालन प्रभावित हो रहा है। ऐसे में जिन बसों के टायर सहीं हैं, तो कंडक्टर नहीं है। इससे कुछ ही बसों का संचालन हो पा रहा है।
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बजट की मांग की गई
विभाग द्वारा टायर व अन्य मरम्मत कार्यों के लिए बजट की मांग की गई है। बजट के अभाव में बसों का संचालन प्रभावित हो रहा है। साथ ही कंडक्टरों की भी कमी बनी हुई है। बजट व स्टाफ की तैनाती होते ही बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
प्रियम श्रीवास्तव, सहायक प्रबंधक, रोडवेज डिपो, झांसी
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जिले में यातायात के साधन सुगम बनाने के लिए निजी बसों के अलावा परिवहन निगम द्वारा रोडवेज बसों का संचालन किया जा रहा है। शुरूआती दौर में लगभग आठ बसों के संचालन के परमिट विभाग के पास थे। जिसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में यातायात की सुविधा के लिए लोहिया ग्रामीण बस सेवा का संचालन किया। जनपद में 20 बसों के परमिट जारी किए गए और बसों का संचालन शुरू किया गया। बसों का संचालन शुरू होते ही अधिकांश रूटों पर बसों की सुविधा हो गई। लोगों को जिला मुख्यालय व झांसी तक के लिए सफर की सुविधा सुलभ हुई।
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लेकिन, अब परिवहन विभाग में खड़ी बिना टायरों की बसें बजट की राह देख रहीं हैं। स्थिति यह है कि रोडवेज विभाग की बसों का संचालन ठप होता जा रहा है। यहां पर दो माह में लगभग एक दर्जन से अधिक बसों का संचालन बंद हो गया है। जिले में चलाई जाने वाली बसों में 20 बसों के टायर खराब हो गए हैं, जिन्हें बदला जाना है। पर विभाग के पास बजट न होने से टायर नहीं खरीदे जा पा रहे हैं। टायरों की हालत काफी खराब होने से चलने तक की स्थिति में नहीं हैं, जो बसें चल रहीं हैं, इनके टायर भी कंडम हालत में पहुंचने की कगार पर हैं। इससे लगातार रोडवेज बसों का संचालन कम होता जा रहा है। इससे सीमित बसों रूटों पर दौड़ रहीं है। ऐसे में रोडवेज से सफर की सुविधा नहीं मिल पा रही है। शीघ्र ही विभाग को बजट नहीं मिला तो चल रहीं चार बसों का संचालन भी बंद हो जाएगा।
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कंडक्टरों की भी बनी है कमी
परिवहन निगम की रोडवेज डिपो में संचालित बसों के सापेक्ष कंडक्टरों की भी कमी हो गई है। स्थिति यह है कि 240 बसें संचालित होती हैं। इनमें एक सैकड़ा कंडक्टरों कम हैं। इससे भी संचालन प्रभावित हो रहा है। ऐसे में जिन बसों के टायर सहीं हैं, तो कंडक्टर नहीं है। इससे कुछ ही बसों का संचालन हो पा रहा है।
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बजट की मांग की गई
विभाग द्वारा टायर व अन्य मरम्मत कार्यों के लिए बजट की मांग की गई है। बजट के अभाव में बसों का संचालन प्रभावित हो रहा है। साथ ही कंडक्टरों की भी कमी बनी हुई है। बजट व स्टाफ की तैनाती होते ही बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
प्रियम श्रीवास्तव, सहायक प्रबंधक, रोडवेज डिपो, झांसी