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एक महीने से ध्वस्त है बीएसएनएल का नेटवर्क, तीन सौ फोन डेड
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- फोटो : mobile locator
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ललितपुर। भारत संचार निगम लिमिटेड की सेवाएं लगातार खराब होती जा रही हैं। इसी वजह से इसके अब नाम मात्र के ही उपभोक्ता रह गए हैं। लैंड लाइन की हालत यह है कि एक माह से 275 से अधिक फोन डेड पड़े हुए हैं। शिकायतों का अधिकारियों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। कर्मचारी बिना सुविधा शुल्क लिए कुछ भी करने को तैयार नहीं है। वहीं, विभागों के फोन डेड होने से आम लोगों को परेशान होना पड़ रहा है।
बीएसएनएल की सेवाएं उपभोक्ताओं के लिए सिरदर्द बन गई हैं। शहरवासियों का कहना है कि अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा आम आदमी को भुगतना पड़ रहा है। बिल समय से जमा करने के बावजूद उपभोक्ता फोन पर बात नहीं कर पा रहे हैं ओर न ही नेट टल रहा है। ब्राडबैंड की स्थिति यह है यदाकदा चल जाए तो लोग अपने आपको को भाग्यशाली समझते हैं। अपने आपको सबसे अधिक दिक्कत आफिसों में आ रही है। जब काम करने का समय होता है तो नेटवर्क दगा दे जाता है। शाम छह बजे से देर रात तक सिग्नल न आना आम बात हो गई है।
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क्या कहते हैं शहरवासी-
बीएसएनएल का मोबाइल हो या लैंडलाइन फोन कभी ठीक से नहीं चलता। लैंड लाइन से तो बात करना संभव ही नहीं हो पाता था, इसलिए हम लोगों ने कनेक्शन कटवा दिया है। मोबाइल पर बात तो हो जाती है पर इंटरनेट सेवा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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- शैलेंद्र यादव
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पहले ब्राडबैंड की सेवाएं ठीक थीं। जब से ठेकेदारी प्रथा शुरू हुई सेवाएं लगातार खराब होती जा रही हैं। ठेकेदार कभी कनेक्शन सुधारने के नाम पर आते ही नहीं। जब भी शिकायत की जाती है, यह आश्वासन देकर टाल दिया जाता है पर कर्मचारी आाता कभी नहीं है।
- अजय जैन, व्यापारी
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सोच रहे हैं कि कनेक्शन बंद करवा दें। निजी कंपनियां बेहतर सेवाएं दे रहीं हैं। इस कारण हमलोग अब निजी कंपनियों के ब्राडबैंड चला रहे हैं। मोबाइल में भी उनके नेटवर्क की सेवाएं बीएसएनएल से बेहतर हैं। केवल बात करने के लिए बीएसएनएल की सिम प्रयोग कर रहे हैं।
- राजू जैन,
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- ठेकेदार को बेहतर सेवाएं देने को कहा गया है। अभी त्योहार का सीजन चलने से कई कर्मचारी छुट्टी पर चले गए हैं। शीघ्र ही खराब पड़े फोन और ब्राडबैंड सेवा दुरुस्त कर दी जाएगी।
- प्रदीप वर्मा, एसडीओ, बीएसएनएल, ललितपुर।
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बीएसएनएल की सेवाएं उपभोक्ताओं के लिए सिरदर्द बन गई हैं। शहरवासियों का कहना है कि अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा आम आदमी को भुगतना पड़ रहा है। बिल समय से जमा करने के बावजूद उपभोक्ता फोन पर बात नहीं कर पा रहे हैं ओर न ही नेट टल रहा है। ब्राडबैंड की स्थिति यह है यदाकदा चल जाए तो लोग अपने आपको को भाग्यशाली समझते हैं। अपने आपको सबसे अधिक दिक्कत आफिसों में आ रही है। जब काम करने का समय होता है तो नेटवर्क दगा दे जाता है। शाम छह बजे से देर रात तक सिग्नल न आना आम बात हो गई है।
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क्या कहते हैं शहरवासी-
बीएसएनएल का मोबाइल हो या लैंडलाइन फोन कभी ठीक से नहीं चलता। लैंड लाइन से तो बात करना संभव ही नहीं हो पाता था, इसलिए हम लोगों ने कनेक्शन कटवा दिया है। मोबाइल पर बात तो हो जाती है पर इंटरनेट सेवा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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- शैलेंद्र यादव
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पहले ब्राडबैंड की सेवाएं ठीक थीं। जब से ठेकेदारी प्रथा शुरू हुई सेवाएं लगातार खराब होती जा रही हैं। ठेकेदार कभी कनेक्शन सुधारने के नाम पर आते ही नहीं। जब भी शिकायत की जाती है, यह आश्वासन देकर टाल दिया जाता है पर कर्मचारी आाता कभी नहीं है।
- अजय जैन, व्यापारी
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सोच रहे हैं कि कनेक्शन बंद करवा दें। निजी कंपनियां बेहतर सेवाएं दे रहीं हैं। इस कारण हमलोग अब निजी कंपनियों के ब्राडबैंड चला रहे हैं। मोबाइल में भी उनके नेटवर्क की सेवाएं बीएसएनएल से बेहतर हैं। केवल बात करने के लिए बीएसएनएल की सिम प्रयोग कर रहे हैं।
- राजू जैन,
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- ठेकेदार को बेहतर सेवाएं देने को कहा गया है। अभी त्योहार का सीजन चलने से कई कर्मचारी छुट्टी पर चले गए हैं। शीघ्र ही खराब पड़े फोन और ब्राडबैंड सेवा दुरुस्त कर दी जाएगी।
- प्रदीप वर्मा, एसडीओ, बीएसएनएल, ललितपुर।