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बेसिक शिक्षा व लेखा विभाग के अधिकारी व बाबू दोषी
amarujala
Updated Sat, 28 Jul 2018 12:58 AM IST
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police, jhansi news
- फोटो : demo
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विगत 31 मार्च को तालबेहट के सेमरखेड़ा गांव में संचालित प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य ओमप्रकाश पटैरिया के आत्महत्या मामले में प्रशासन द्वारा कराई जा रही जांच पूरी हो चुकी है। जांच समिति ने वित्त एवं लेखाधिकारी दयाशंकर और सहायक पटल प्रभारी भगवत दयाल को दोषी ठहराया है। जिनकी लापरवाही व भ्रष्टाचार से प्रताड़ित होकर शिक्षक ने आत्मघाती उठाया था। जिलाधिकारी ने जांच रिपोर्ट को शासन को भेज दी है। वहीं मामले की जांच पुलिस प्रशासन द्वारा भी कराई जा रही है, जो अभी जारी है।
गौरतलब है कि बीते 31 मार्च 2018 की दोपहर तालबेहट क्षेत्र के सेमरखेड़ा गांव में संचालित प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक ओमप्रकाश पटैरिया ने विद्यालय में ही खुद को आग लगाकर आत्महत्या कर ली थी। घटना स्थल पर सुसाइड नोट भी मिला था, जिसमें बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों व बाबुओं पर शोषण करने का आरोप लगाया था। विभाग में भ्रष्टाचार फैले होनी की बात कही कई थी। इस पर पुलिस ने नोट दर्ज नामों के खिलाफ मृतक के पुत्र की तहरीर पर संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर दिया था। वहीं मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने भी प्रशासन जांच के लिए समिति गठित कर जांच शुरू कर दी थी। जांच समिति ने हाल ही में मामले की जांच पूरी कर ली है। जांच में पाया गया है कि उक्त शिक्षक ने विभाग में फैले भ्रष्टाचार व अधिकारियों द्वारा किए जा रहे शोषण के चलते आत्महत्या की है। इस जांच समिति का अध्यक्ष अपर जिलाधिकारी योगेेंद्र बहादुर सिंह को नामित किया गया था।
इसके साथ ही जिला सूचना अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक और उप जिलाधिकारी ताबलेहट को सदस्य नामित किया गया था। जांच समिति द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। इसमें बताया कि दिसंबर 2016 में मिड-डे मील जिला समन्वयक कपिल दुबे द्वारा शिक्षक के विद्यालय का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के दौरान मिली अनियमितताओं के चलते शिक्षक का वेतन रोक दिया गया था। जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि तत्कालीन तालबेहट खंड शिक्षा अधिकारी बृजेश सिंह व तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संतोष कुमार राय ने शिक्षक का वेतन बिना किसी दंडात्मक कार्यवाही की प्रक्रिया अपनाए रोक दिया था, जो नियमों के विपरीत है।
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जांच में पाया कि उक्त दोनों ही अधिकारियों द्वारा अनियमित रुप से आदेश पारित कर शिक्षक को वेतन रोके रखा गया। इसके साथ ही जांच में जांच अधिकारियों ने शिक्षा विभाग के लेखा विभाग के अधिकारी व सहायक पटल प्रभारी को भी दोषी पाया है। जांच में बताया कि तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अंबरीष कुमार यादव ने बीते 25 अक्टूबर 2017 को वेतन जारी करने के आदेश पारित कर दिए थे। इसके बाद भी लेखा विभाग द्वारा शिक्षक के शेष देयकों का भुगतान जारी नहीं किया गया और भुगतान को लटकाए रखा। जांच समिति ने वित्त एवं लेखाधिकारी दयाशंकर और सहायक पटल प्रभारी भगवत दयाल को दोषी ठहराया है। जिलाधिकारी ने इस जांच रिपोर्ट को कार्रवाई के लिए शासन को भेज दी है।
शासन स्तर से होगी कार्रवाई
जांच अधिकारियों द्वारा दी गई जांच आख्या को शासन के लिए भेज दिया गया है। आरोपी व दोषी अधिकारियों के खिलाफ शासन स्तर से कार्रवाई की जाएगी।
- मानवेंद्र सिंह
जिलाधिकारी, ललितपुर।
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गौरतलब है कि बीते 31 मार्च 2018 की दोपहर तालबेहट क्षेत्र के सेमरखेड़ा गांव में संचालित प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक ओमप्रकाश पटैरिया ने विद्यालय में ही खुद को आग लगाकर आत्महत्या कर ली थी। घटना स्थल पर सुसाइड नोट भी मिला था, जिसमें बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों व बाबुओं पर शोषण करने का आरोप लगाया था। विभाग में भ्रष्टाचार फैले होनी की बात कही कई थी। इस पर पुलिस ने नोट दर्ज नामों के खिलाफ मृतक के पुत्र की तहरीर पर संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर दिया था। वहीं मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने भी प्रशासन जांच के लिए समिति गठित कर जांच शुरू कर दी थी। जांच समिति ने हाल ही में मामले की जांच पूरी कर ली है। जांच में पाया गया है कि उक्त शिक्षक ने विभाग में फैले भ्रष्टाचार व अधिकारियों द्वारा किए जा रहे शोषण के चलते आत्महत्या की है। इस जांच समिति का अध्यक्ष अपर जिलाधिकारी योगेेंद्र बहादुर सिंह को नामित किया गया था।
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इसके साथ ही जिला सूचना अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक और उप जिलाधिकारी ताबलेहट को सदस्य नामित किया गया था। जांच समिति द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। इसमें बताया कि दिसंबर 2016 में मिड-डे मील जिला समन्वयक कपिल दुबे द्वारा शिक्षक के विद्यालय का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के दौरान मिली अनियमितताओं के चलते शिक्षक का वेतन रोक दिया गया था। जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि तत्कालीन तालबेहट खंड शिक्षा अधिकारी बृजेश सिंह व तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संतोष कुमार राय ने शिक्षक का वेतन बिना किसी दंडात्मक कार्यवाही की प्रक्रिया अपनाए रोक दिया था, जो नियमों के विपरीत है।
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जांच में पाया कि उक्त दोनों ही अधिकारियों द्वारा अनियमित रुप से आदेश पारित कर शिक्षक को वेतन रोके रखा गया। इसके साथ ही जांच में जांच अधिकारियों ने शिक्षा विभाग के लेखा विभाग के अधिकारी व सहायक पटल प्रभारी को भी दोषी पाया है। जांच में बताया कि तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अंबरीष कुमार यादव ने बीते 25 अक्टूबर 2017 को वेतन जारी करने के आदेश पारित कर दिए थे। इसके बाद भी लेखा विभाग द्वारा शिक्षक के शेष देयकों का भुगतान जारी नहीं किया गया और भुगतान को लटकाए रखा। जांच समिति ने वित्त एवं लेखाधिकारी दयाशंकर और सहायक पटल प्रभारी भगवत दयाल को दोषी ठहराया है। जिलाधिकारी ने इस जांच रिपोर्ट को कार्रवाई के लिए शासन को भेज दी है।
शासन स्तर से होगी कार्रवाई
जांच अधिकारियों द्वारा दी गई जांच आख्या को शासन के लिए भेज दिया गया है। आरोपी व दोषी अधिकारियों के खिलाफ शासन स्तर से कार्रवाई की जाएगी।
- मानवेंद्र सिंह
जिलाधिकारी, ललितपुर।