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ललितपुर में पिछड़ों पर भरोसा, अगड़ों में बेचैनी

Wed, 25 Jan 2017 01:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 25 Jan 2017 01:17 AM IST
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Backwards in Lalitpur trust, discomfort in the forward
election news lalitpur - फोटो : demo
ललितपुर विधानसभा सीट पर किसी भी राजनीतिक दल ने टिकट वितरण में सामान्य वर्ग पर दांव नहीं खेला है। सभी प्रमुख दलों के उम्मीदवार पिछड़ी वर्ग से हैं। भाजपा व बसपा ने कुशवाहा तो सपा ने लोधी कार्ड खेला है। वहीं, महरौनी सीट सुरक्षित है,जहां से अनुसूचित जाति के प्रत्याशी बनाए गए हैं।  इस लिहाज से जिले में सामान्य वर्ग की भागीदारी नगण्य हो गई है, जिससे सवर्ण वोटरों में बेचैनी देखी जा रही है।                        
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जिले की राजनीति में सवर्ण समाज का कभी बड़ा दखल रहा है। चाहे वह राजनीतिक दलों के संगठन की बात हो या फिर उम्मीदवार बनाने की। भाजपा में वर्षों तक सालिगराम पुरोहित, रामकुमार तिवारी, प्रदीप चौबे जिलाध्यक्ष रहे हैं तो कांग्रेस में सनत दीक्षित ने लंबे समय तक जिलाध्यक्षी संभाली है। वहीं, जिले को कृष्णचंद्र शर्मा, सुदामा प्रसाद गोस्वामी, डॉ. अरविंद जैन, रामकुमार तिवारी सरीखे विधायक दिए हैं। जिस समय भाजपा के गिने-चुने सांसद बनते थे, उनमें झांसी-ललितपुर से राजेंद्र अग्निहोत्री का नाम शुमार था। इसी तरह ठाकुर जाति से सुजान सिंह बुंदेला सांसद व विधायक, वीरेंद्र सिंह बुंदेला, पूरन सिंह बुंदेला विधायक के साथ प्रदेश में मंत्री के रूप में काबिज रहे हैं। यही नहीं, प्रदेश की राजनीति के उतार-चढ़ाव में बुंदेला परिवार केंद्र बिंदू में रहा है। सदर सीट पर डा. अरविंद जैन लोकप्रिय विधायक व मंत्री रहे हैं। बदले दौर में जिले की राजनीति में सवर्ण समाज के हाथों से प्रतिनिधित्व खिसक गया है। पिछड़ों के जोर में सवर्णों का कहीं अता-पता नहीं है। इसकी झलक वर्तमान राजनीति में दिखाई देती है। इस समय सदर विधायक रमेश कुशवाहा तो क्षेत्रीय सांसद उमा भारती भी पिछड़े वर्ग से हैं। इनसे पहले 2004 में क्षेत्रीय सांसद डा. चंद्रपाल सिंह यादव रह चुके हैं। यूपी विधानसभा 2017 के टिकट वितरण की बात करें, तो किसी भी राजनीतिक दल ने सवर्ण समाज की उम्मीदवारी को तवज्जो नहीं दी है। समाजवादी पार्टी ने ज्योति लोधी, बसपा ने संतोष कुशवाहा, भाजपा ने रामरतन कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया है। सपा व कांग्रेस का गठजोड़ होने से कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है। वहीं, महरौनी सीट सुरक्षित होने से सभी का ध्यान ललितपुर सीट पर ही लगा था। सवर्ण समाज के लोग संगठन के प्रमुख पदों से पहले ही बाहर हो चुके हैं। जिलाध्यक्षों पर नजर डालें तो भाजपा के जिलाध्यक्ष रमेश सिंह लोधी, कांग्रेस के जिलाध्यक्ष दुर्गा प्रसाद कुशवाहा, सपा के जिलाध्यक्ष आल्हा प्रसाद निरंजन, बसपा जिलाध्यक्ष जानकी प्रसाद अहिरवार हैं। इस असंतुलन की स्थिति में सवर्णों में असंतोष दिखाई देने लगा है। ग्राम घटवार के प्रधान शशिकांत दीक्षित का कहना है कि राजनीतिक दलों ने न तो जिलाध्यक्ष और न ही टिकटों के वितरण में सामान्य वर्ग को प्रतिनिधित्व दिया है। जिसमें सवर्ण समाज में बेचैनी देखी जा रही है। 
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इस समय पिछड़ी जाति की राजनीति चल रही है। सवर्ण समाज के वोटरों में एका नहीं होने से राजनीतिक दलों ने उनकी उपेक्षा आरंभ कर दी है। तालाबपुरा निवासी अनूप जैन का कहना है कि सवर्णों की उपेक्षा से जातीय असंतुलन का वातावरण बन रहा है जो न तो राजनीति के लिए ठीक है और न ही समाज के लिए। वहीं, राजनीतिक जानकार मानते हैं कि विधानसभा चुनाव में दोनों सीटों में सवर्ण वोटर का मत निर्णायक साबित होगा।
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-सुधीर निगम, अधिवक्ता। 

किसे मिलेगा आशीर्वाद                        
मौजूदा परिस्थिति में सवर्ण समाज किस दल को आशीर्वाद प्रदान करता है? इस पर अब राजनीतिक दलों की नजर रहेगी।            

यह है सवर्णों की ताकत            
ललितपुर सीट पर ब्राह्मण 35 हजार, ठाकुर 16 हजार, जैन 15 हजार, वैश्य 12 हजार, कायस्थ 10 हजार करीब मतदाता हैं। 
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