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कोरोना संकट काल में कारगर साबित नहीं हुई आयुष्मान भारत योजना
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- फोटो : hospital 1.jpg
ललितपुर। निर्धनों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने वाली आयुष्मान भारत योजना कोरोना काल में कारगर साबित नहीं हुई। जहां सामान्य दिनों में एक वर्ष में 1224 लाभार्थी इलाज कराकर लाभ ले रहे थे, जिनकी संख्या कोरोना संकट काल में घटकर 1073 रह गई है।
निर्धन तबके के लोगों को इलाज की सुविधा मुहैया कराने के लिए केंद्र सरकार व राज्य सरकार द्वारा आयुष्मान भारत योजना चलाई जा रही है। जिसमें लाभार्थी को पांच लाख रुपये तक का निशुल्क इलाज दिए जाने की सुविधा की गई है। लाभार्थी को इलाज के लिए योजना से संबद्ध अस्पताल में इलाज कराना पड़ता है लेकिन देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने वाली आयुष्मान भारत योजना भी कोविड संकट काल में काम नहीं आ सकी। ऐसी स्थिति जिले में तब देखने को मिली, जब कोरोना संक्रमण रोकने के लिए लॉकडाउन लगाया गया था। लॉकडान में रेल सेवा, वायुमार्ग, सड़क मार्ग आदि से यातायात सेवाएं पूरी तरह से ठप हो गईं थीं। ऐसे में बाहर इलाज करा रहे बुजुर्ग व बीमार मरीजों को समस्या हो गई। वहीं जनपद में भी कई निजी चिकित्सकों ने स्वास्थ्य इकाइयां तक बंद कर दीं। साथ ही सरकारी अस्पतालों में भी ओपीडी सेवा ठप कर दी गई।
धनाड्य व मध्यम वर्ग के लोगों ने किसी तरह से इलाज करा लिया लेकिन निर्धन तबके के लोगों का आयुष्मान भारत योजना सहारा नहीं बन सकी और लाभार्थियों की संख्या भी गिरावट दर्ज की गई। जिले में योजना के चार लाख 47 हजार 175 लाभार्थी हैं। इनमें सामान्य दिनों में जहां एक वर्ष में 1200 से अधिक लाभार्थी लाभ ले रहे थे। वहीं कोविड काल में संख्या घटकर एक वर्ष में मात्र 1073 लाभार्थियों ने उपचार कराया। विभागीय आंकड़ों पर नजर डाले तो एक माह में 102 आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थी उपचार करा रहे थे, जिनकी कोविड काल में संख्या घटकर 89 पर पहुंच गई। ऐसे में सामान्य दिनों की अपेक्षा वर्ष में तीन सौ से अधिक लाभार्थियों की संख्या कम हो गई। योजना में अब तक ढाई वर्ष के समय में 3184 लाभार्थियों का उपचार किया गया है। इनके इलाज में 2.74 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।
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योजना के लाभार्थियों को अधिक से अधिक लाभांवित करने के लिए लगातार कार्ड जारी किए जा रहे हैं। शिविर लगाकर कार्ड बनाए जा रहे हैं।
डॉ. डीके गर्ग, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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निर्धन तबके के लोगों को इलाज की सुविधा मुहैया कराने के लिए केंद्र सरकार व राज्य सरकार द्वारा आयुष्मान भारत योजना चलाई जा रही है। जिसमें लाभार्थी को पांच लाख रुपये तक का निशुल्क इलाज दिए जाने की सुविधा की गई है। लाभार्थी को इलाज के लिए योजना से संबद्ध अस्पताल में इलाज कराना पड़ता है लेकिन देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने वाली आयुष्मान भारत योजना भी कोविड संकट काल में काम नहीं आ सकी। ऐसी स्थिति जिले में तब देखने को मिली, जब कोरोना संक्रमण रोकने के लिए लॉकडाउन लगाया गया था। लॉकडान में रेल सेवा, वायुमार्ग, सड़क मार्ग आदि से यातायात सेवाएं पूरी तरह से ठप हो गईं थीं। ऐसे में बाहर इलाज करा रहे बुजुर्ग व बीमार मरीजों को समस्या हो गई। वहीं जनपद में भी कई निजी चिकित्सकों ने स्वास्थ्य इकाइयां तक बंद कर दीं। साथ ही सरकारी अस्पतालों में भी ओपीडी सेवा ठप कर दी गई।
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धनाड्य व मध्यम वर्ग के लोगों ने किसी तरह से इलाज करा लिया लेकिन निर्धन तबके के लोगों का आयुष्मान भारत योजना सहारा नहीं बन सकी और लाभार्थियों की संख्या भी गिरावट दर्ज की गई। जिले में योजना के चार लाख 47 हजार 175 लाभार्थी हैं। इनमें सामान्य दिनों में जहां एक वर्ष में 1200 से अधिक लाभार्थी लाभ ले रहे थे। वहीं कोविड काल में संख्या घटकर एक वर्ष में मात्र 1073 लाभार्थियों ने उपचार कराया। विभागीय आंकड़ों पर नजर डाले तो एक माह में 102 आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थी उपचार करा रहे थे, जिनकी कोविड काल में संख्या घटकर 89 पर पहुंच गई। ऐसे में सामान्य दिनों की अपेक्षा वर्ष में तीन सौ से अधिक लाभार्थियों की संख्या कम हो गई। योजना में अब तक ढाई वर्ष के समय में 3184 लाभार्थियों का उपचार किया गया है। इनके इलाज में 2.74 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।
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डॉ. डीके गर्ग, मुख्य चिकित्सा अधिकारी