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निर्धन परिवारों को आसरा नहीं दे पाई कॉलोनी
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ललितपुर। नगरीय क्षेत्र के जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाई गई कॉलोनियों में सभी पात्रों को आवास आवंटित नहीं हो पाए हैं। इसका अनुचित फायदा उठाते हुए कुछ प्रभावशाली लोगों ने अवैध तरीके से अपना डेरा जमा लिया है। कुछ आवंटी तो ऐसे हैं, जिन्होंने अपने आवास किराए पर दे रखे हैं।
बसपा सरकार में नगरीय क्षेत्र में रहने वाले जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान आवंटित करने की शुुरुआत हुई थी। इस दौरान कांशीराम आवासीय कॉलोनी का निर्माण किया गया। इसके तहत जिले में गोविंद नगर, नारायणपुरा, खिरकापुरा, सुरईघाट, रघुवीर सिंह राजकीय महाविद्यालय के पास, आईटीआई के पीछे कॉलोनी बनाई गई। इस सरकार के हटने के बाद भी कॉलोनी बनने का सिलसिला थमा नहीं। भाजपा सरकार में आसरा कॉलोनी का निर्माण हुआ। इन कॉलोनियों में जरूरतमंद परिवारों को आवास मुहैया कराए गए। कांशीराम आवासीय कॉलोनियों में टैंक चोक होने व पेयजल जैसी समस्याओं के कारण कई आवंटियों ने अपने आवास अन्य किसी को किराये दे दिए तो कुछ ताला लगाकर दूसरी जगह रहने लगे। इसका अनुचित फायदा उठाते हुए दबंग किस्म के लोगों ने ऐसे आवासों में कब्जा जमा लिया। इससे यह हुआ कि कई पात्र व्यक्ति चाहते हुए भी कॉलोनी में आवास नहीं पा सके। तमाम लोगों ने आवास पाने के लिए विभिन्न अधिकारियों को प्रार्थना पत्र भी दिए लेकिन अधिकतर प्रार्थना पत्रों पर विचार नहीं हो पाया। इससे आवंटन की प्रक्रिया ठंडे बस्ते बनी रही। वर्तमान में आसरा कॉलोनी में करीब 44 आवास रिक्त बने हुए हैं। वहीं, कांशीराम आवासीय कॉलोनियों में कई आवास रिक्त हैं।
कोरोना की दूसरी लहर से पहले चला था अभियान
नगर पालिका परिषद ने कोरोना की दूसरी लहर के पहले अवैध कब्जेदारों को हटाने के लिए चिह्नींकरण की कार्रवाई की गई थी लेकिन दो कॉलोनी के बाद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। इससे अवैध कब्जेदारों को हटाने का अभियान टॉय-टॉय फिस्स हो गया।
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अवैध कब्जेदारों को हटाने की कार्रवाई आगे बढ़ाया जाएगा। कॉलोनियों में जो भी अवैध कब्जेदार डटे हैं, वह तुरंत आवास खाली कर दें। वरना, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
निहालचंद्र, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद
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बसपा सरकार में नगरीय क्षेत्र में रहने वाले जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान आवंटित करने की शुुरुआत हुई थी। इस दौरान कांशीराम आवासीय कॉलोनी का निर्माण किया गया। इसके तहत जिले में गोविंद नगर, नारायणपुरा, खिरकापुरा, सुरईघाट, रघुवीर सिंह राजकीय महाविद्यालय के पास, आईटीआई के पीछे कॉलोनी बनाई गई। इस सरकार के हटने के बाद भी कॉलोनी बनने का सिलसिला थमा नहीं। भाजपा सरकार में आसरा कॉलोनी का निर्माण हुआ। इन कॉलोनियों में जरूरतमंद परिवारों को आवास मुहैया कराए गए। कांशीराम आवासीय कॉलोनियों में टैंक चोक होने व पेयजल जैसी समस्याओं के कारण कई आवंटियों ने अपने आवास अन्य किसी को किराये दे दिए तो कुछ ताला लगाकर दूसरी जगह रहने लगे। इसका अनुचित फायदा उठाते हुए दबंग किस्म के लोगों ने ऐसे आवासों में कब्जा जमा लिया। इससे यह हुआ कि कई पात्र व्यक्ति चाहते हुए भी कॉलोनी में आवास नहीं पा सके। तमाम लोगों ने आवास पाने के लिए विभिन्न अधिकारियों को प्रार्थना पत्र भी दिए लेकिन अधिकतर प्रार्थना पत्रों पर विचार नहीं हो पाया। इससे आवंटन की प्रक्रिया ठंडे बस्ते बनी रही। वर्तमान में आसरा कॉलोनी में करीब 44 आवास रिक्त बने हुए हैं। वहीं, कांशीराम आवासीय कॉलोनियों में कई आवास रिक्त हैं।
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कोरोना की दूसरी लहर से पहले चला था अभियान
नगर पालिका परिषद ने कोरोना की दूसरी लहर के पहले अवैध कब्जेदारों को हटाने के लिए चिह्नींकरण की कार्रवाई की गई थी लेकिन दो कॉलोनी के बाद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। इससे अवैध कब्जेदारों को हटाने का अभियान टॉय-टॉय फिस्स हो गया।
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अवैध कब्जेदारों को हटाने की कार्रवाई आगे बढ़ाया जाएगा। कॉलोनियों में जो भी अवैध कब्जेदार डटे हैं, वह तुरंत आवास खाली कर दें। वरना, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
निहालचंद्र, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद