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नारांतक और दधीबध के बीच हुआ युद्ध
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 13 Oct 2016 12:12 AM IST
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ravn, lalitpur news
- फोटो : amar ujala
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ललितपुर। श्रीनृसिंह रामलीला समिति के तत्वावधान में रामलीला मंचन के 13वें दिन नारांतक और रावण वध लीला का मंचन हुआ। प्रथम दृश्य में रावण बीहलपुर के राजा नारांतक को बुलाता है और उसे युद्ध के लिए भेजता है। भगवान श्रीराम की सेना की ओर से सुग्रीव का पुत्र दधीबल जाता है। जहां नारांतक एवं दधीबल के बीच लंबी वार्तालाप के बाद दोनों के मध्य निर्णायक युद्ध हुआ।
लीला के दूसरे दृश्य में लंकापति रावण और राम के बीच युद्ध होता है। जहां श्रीराम द्वारा चलाए तीरों से रावण को किसी प्रकार का कोई नुकसान नही पहुंचता है। इसके बाद विभीषण भगवान राम को रावण की नाभी में अमृत होना बताते हैं।
श्रीराम भाई लक्ष्मण को रावण के पास भेजते हैं और कहते हैं कि वह रावण को अपना गुरु बनाकर अंतिम उपदेश ग्रहण करें। भाई की आज्ञा मानकर लक्ष्मणजी रावण के पास जाते हैं, और उसके सिर के पीछे खडे़ हो जाते हैं। इसके बाद रावण लक्ष्मणजी से कहते हैं कि तुम मेरे सामने आओ और अपने धनुष बाण मुझे दे दो, रावण की बात मानते हुए लक्ष्मणजी ने धनुष बाण उसके समक्ष रख दिये। फिर रावण कहता है कि अब मैं तुम सभी के ऊपर वार कर दूं, किन्तु वह ऐसा नही करूंगा और वह कहते हैं कि अपने हथियारों को शत्रु को नहीं देना चाहिए। बस यही मेरा उपदेश है। इसके बाद भगवान राम ने धनुष और तीर उठाया और रावण की नाभी में प्रहार किया, जिसके बाद रावण ने अपने प्राण त्याग दिये।
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इस मौके पर भगवत नारायन अग्रवाल, कैलाश सिंह यादव, अध्यक्ष भवानी सिंह यादव पार्षद, महामंत्री भरत पुरोहित, कोषाध्यक्ष राजेश सेन, गोविंद नारायन सक्सेना, पंकज निरंजन, दिनेश श्रीवास्तव, स्वामी प्रसाद यादव, द्वारिका प्रसाद निरंजन, पन्नालाल साहू, अखिलेश पाठक मौजूद रहे।
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लीला के दूसरे दृश्य में लंकापति रावण और राम के बीच युद्ध होता है। जहां श्रीराम द्वारा चलाए तीरों से रावण को किसी प्रकार का कोई नुकसान नही पहुंचता है। इसके बाद विभीषण भगवान राम को रावण की नाभी में अमृत होना बताते हैं।
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श्रीराम भाई लक्ष्मण को रावण के पास भेजते हैं और कहते हैं कि वह रावण को अपना गुरु बनाकर अंतिम उपदेश ग्रहण करें। भाई की आज्ञा मानकर लक्ष्मणजी रावण के पास जाते हैं, और उसके सिर के पीछे खडे़ हो जाते हैं। इसके बाद रावण लक्ष्मणजी से कहते हैं कि तुम मेरे सामने आओ और अपने धनुष बाण मुझे दे दो, रावण की बात मानते हुए लक्ष्मणजी ने धनुष बाण उसके समक्ष रख दिये। फिर रावण कहता है कि अब मैं तुम सभी के ऊपर वार कर दूं, किन्तु वह ऐसा नही करूंगा और वह कहते हैं कि अपने हथियारों को शत्रु को नहीं देना चाहिए। बस यही मेरा उपदेश है। इसके बाद भगवान राम ने धनुष और तीर उठाया और रावण की नाभी में प्रहार किया, जिसके बाद रावण ने अपने प्राण त्याग दिये।
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इस मौके पर भगवत नारायन अग्रवाल, कैलाश सिंह यादव, अध्यक्ष भवानी सिंह यादव पार्षद, महामंत्री भरत पुरोहित, कोषाध्यक्ष राजेश सेन, गोविंद नारायन सक्सेना, पंकज निरंजन, दिनेश श्रीवास्तव, स्वामी प्रसाद यादव, द्वारिका प्रसाद निरंजन, पन्नालाल साहू, अखिलेश पाठक मौजूद रहे।