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जिला अस्पताल में सात माह से नहीं हुई एड्स की जांच
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hospital
- फोटो : hospital
ललितपुर। कोरोनाकाल में स्वास्थ्य विभाग ने एड्स रोगियों को अपने हाल पर छोड़ दिया था। इस दौरान न तो जिला अस्पताल में संचालित आइसीटीसी सेंटर में एड्स की जांच की गई और न ही नए मरीजों को चिह्नित किया गया। इससे यह हुआ कि दवा लेने वाले रोगियों की संख्या भी घट गई है।
जिले में एड्स रोगियों को चिह्नित करने के लिए जिला अस्पताल में आईसीटीसी सेंटर चलाया जा रहा है। जहां पर एचआईवी और सिफलिस की जांच की जाती है। इस दौरान काउंसलिंग भी की जाती है। जिसमें लोगों को एड्स से बचाव के प्रति जागरुक किया जाता है। काउंसलिंग में बताया कि जाता है कि चार प्रकार से एड्स होता है। इससे बचाव करें। इस दौरान जांच में पॉजिटिव आने पर वायरस की हकीकत जाने के लिए सीडी फॉर जांच के लिए भेज दिया जाता है।
लेकिन बीते मार्च माह में कोरोना संक्रमण के खतरे को लेकर शासन ने ओपीडी व जांच सेवाएं बंद कर दी थी।
शासन के निर्देशों के बाद भी जिला अस्पताल में गंभीर बीमारी व एड्स जैसी इमरजेंसी बीमारियों की जांच नहीं की गई है। इतना ही नहीं अस्पताल प्रबंधन ने लगातार मरीज मिलने बाद भी गंभीरता से नहीं लिया और छह माह बीतने के बाद भी जांच ठप पड़ी रहीं है। ऐसे में एक मरीज की समय पर जांच न होने से मौत भी हो चुकी थी, इसके अलावा कोरोना काल में जनपद में चिह्नित मरीजों को समय पर दवाइयां तक उपलब्ध नहीं हो सकी है। इससे दवा लेने वाले मरीजों की संख्या कम हो गई। जबकि वह अब भी बीमारी से ग्रसित है। निश्चित संख्या से कम मरीजों के दवा लेने पर विभाग मरीजों का ब्यौरा तक नहीं जुटा पा रहा है।
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एक माह में मिलते थे चार एड्स रोगी
बुंदेलखंड का अति पिछड़ा क्षेत्र जिला ललितपुर है। यहां पर अब तक उच्च शिक्षा या तकनीकी शिक्षा के संस्थान नहीं खुले हैं। अशिक्षा के अभाव के चलते अधिकांश लोगों में जागरुकता का अभाव है। इसी कारण लोग इस बीमारी से बचाव नहीं कर पाते हैं। यहां पर जिला अस्पताल में संचालित आईसीटीसी में जांच के दौरान प्रतिमाह लगभग चार से पांच व छह मरीज तक चिह्नित होते थे। लेकिन छह माह में एक भी मरीज चिह्नित नहीं हो सका है। वर्तमान में मार्च 2020 से पहले के चिह्नित 117 मरीजों को दवा उपलब्ध कराई जा रही है। आईसीटीसी सेंटर के लैब टेक्नीशियन अरविंद शर्मा ने बताया कि जांच के दौरान एक माह में लगभग चार सेे छह मरीज तक पॉजिटिव आते हैं।
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लॉकडाउन के बाद बड़े मरीज
जिला में विभाग में सिर्फ 117 मरीज ही पंजीकृत हैं, लेकिन कोरोना काल में लगाए गए लॉकडाउन में बाहर से कई व्यक्ति अपने घर आ गए हैं। इससे मार्च, अप्रैल, मई तक जहां 30 से 35 एड्स रोगी ही दवा लेने आ रहे थे, इनकी संख्या बढ़कर एक सैकड़ा पार कर गई है।
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लिंक एआरटी सेंटर पर दी जा रही दवा
जिला अस्पताल में एड्स रोगियों को दवा उपलब्ध कराने व उचित परामर्श देने के लिए लिंक एआरटी सेंटर व सुरक्षा क्लीनिक संचालित किया जा रहा है। जहां पर एड्स रोगियों से उनके स्वास्थ्य का ब्यौरा जुटाया जा रहा है। साथ ही संबंधित मर्ज का की दवा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही मरीजों को बचाव के तरीके भी बताए जा रहे हैं।
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यह है वर्षवार आंकड़ा
वर्ष मरीज
2016 17
2017 23
2018 47
2019 30
मार्च 2020 तक 06
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अब दवा लेने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। वर्तमान में एक सैकड़ा से अधिक मरीज दवा लेने आ रहे हैं।
- डा. अतुल कुशौलिया
एसटीआई/ परामर्शदाता
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कोरोना काल में आईसीटीसी सेंटर के टेक्नीशियन को कोविड जांच के लिए तैनात किया गया था। हालातों में सुधार के चलते एचआईवी की नियमित जांच की सुविधा शुरु कर दी गई है।
- डॉ. अमित चतुर्वेदी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल पुरुष
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जिले में एड्स रोगियों को चिह्नित करने के लिए जिला अस्पताल में आईसीटीसी सेंटर चलाया जा रहा है। जहां पर एचआईवी और सिफलिस की जांच की जाती है। इस दौरान काउंसलिंग भी की जाती है। जिसमें लोगों को एड्स से बचाव के प्रति जागरुक किया जाता है। काउंसलिंग में बताया कि जाता है कि चार प्रकार से एड्स होता है। इससे बचाव करें। इस दौरान जांच में पॉजिटिव आने पर वायरस की हकीकत जाने के लिए सीडी फॉर जांच के लिए भेज दिया जाता है।
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लेकिन बीते मार्च माह में कोरोना संक्रमण के खतरे को लेकर शासन ने ओपीडी व जांच सेवाएं बंद कर दी थी।
शासन के निर्देशों के बाद भी जिला अस्पताल में गंभीर बीमारी व एड्स जैसी इमरजेंसी बीमारियों की जांच नहीं की गई है। इतना ही नहीं अस्पताल प्रबंधन ने लगातार मरीज मिलने बाद भी गंभीरता से नहीं लिया और छह माह बीतने के बाद भी जांच ठप पड़ी रहीं है। ऐसे में एक मरीज की समय पर जांच न होने से मौत भी हो चुकी थी, इसके अलावा कोरोना काल में जनपद में चिह्नित मरीजों को समय पर दवाइयां तक उपलब्ध नहीं हो सकी है। इससे दवा लेने वाले मरीजों की संख्या कम हो गई। जबकि वह अब भी बीमारी से ग्रसित है। निश्चित संख्या से कम मरीजों के दवा लेने पर विभाग मरीजों का ब्यौरा तक नहीं जुटा पा रहा है।
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एक माह में मिलते थे चार एड्स रोगी
बुंदेलखंड का अति पिछड़ा क्षेत्र जिला ललितपुर है। यहां पर अब तक उच्च शिक्षा या तकनीकी शिक्षा के संस्थान नहीं खुले हैं। अशिक्षा के अभाव के चलते अधिकांश लोगों में जागरुकता का अभाव है। इसी कारण लोग इस बीमारी से बचाव नहीं कर पाते हैं। यहां पर जिला अस्पताल में संचालित आईसीटीसी में जांच के दौरान प्रतिमाह लगभग चार से पांच व छह मरीज तक चिह्नित होते थे। लेकिन छह माह में एक भी मरीज चिह्नित नहीं हो सका है। वर्तमान में मार्च 2020 से पहले के चिह्नित 117 मरीजों को दवा उपलब्ध कराई जा रही है। आईसीटीसी सेंटर के लैब टेक्नीशियन अरविंद शर्मा ने बताया कि जांच के दौरान एक माह में लगभग चार सेे छह मरीज तक पॉजिटिव आते हैं।
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लॉकडाउन के बाद बड़े मरीज
जिला में विभाग में सिर्फ 117 मरीज ही पंजीकृत हैं, लेकिन कोरोना काल में लगाए गए लॉकडाउन में बाहर से कई व्यक्ति अपने घर आ गए हैं। इससे मार्च, अप्रैल, मई तक जहां 30 से 35 एड्स रोगी ही दवा लेने आ रहे थे, इनकी संख्या बढ़कर एक सैकड़ा पार कर गई है।
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लिंक एआरटी सेंटर पर दी जा रही दवा
जिला अस्पताल में एड्स रोगियों को दवा उपलब्ध कराने व उचित परामर्श देने के लिए लिंक एआरटी सेंटर व सुरक्षा क्लीनिक संचालित किया जा रहा है। जहां पर एड्स रोगियों से उनके स्वास्थ्य का ब्यौरा जुटाया जा रहा है। साथ ही संबंधित मर्ज का की दवा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही मरीजों को बचाव के तरीके भी बताए जा रहे हैं।
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यह है वर्षवार आंकड़ा
वर्ष मरीज
2016 17
2017 23
2018 47
2019 30
मार्च 2020 तक 06
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अब दवा लेने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। वर्तमान में एक सैकड़ा से अधिक मरीज दवा लेने आ रहे हैं।
- डा. अतुल कुशौलिया
एसटीआई/ परामर्शदाता
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कोरोना काल में आईसीटीसी सेंटर के टेक्नीशियन को कोविड जांच के लिए तैनात किया गया था। हालातों में सुधार के चलते एचआईवी की नियमित जांच की सुविधा शुरु कर दी गई है।
- डॉ. अमित चतुर्वेदी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल पुरुष