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वैज्ञानिक अपनी ही फसल नहीं बचा पाए

Sat, 01 Oct 2016 01:12 AM IST
lalitpur
lalitpur Updated Sat, 01 Oct 2016 01:12 AM IST
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agriculture science
ख्‍ाेती - फोटो : amar ujala
ललितपुर।
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किसानों को उन्नत तरीके से फसल उपजाने और बीमारियों से बचाने का तरीका सिखाने वाले कृषि वैज्ञानिक इस बार खुद अपनी फसल खराब होने से नहीं बचा सके हैं। तिल और उर्द की पचास फीसदी फसल बर्बाद हो गई है।
ग्राम खिरिया में स्थित कृषि विज्ञान केंद में रबी व खरीफ के सीजन में करीब पंद्रह एकड़ जमीन में उन्नत बीजों की फसल बोई जाती है। इसका मकसद उन्नत तकनीक का इस्तेमाल कर अच्छी पैदावार करके किसानों के लिए उदाहरण पेश करना है, लेकिन इस बार केंद्र की ही फसल बर्बाद हो गई है। खरीफ में कृषि विज्ञान केंद्र ने साढ़े बारह एकड़ में तिल का बीज बोया था, जबकि एक एकड़ में उर्द बोई गई थी। यहां पर उर्द का शेखर-3 बीज बोया गया था। एक एकड़ में करीब पांच क्विंटल उर्द की पैदावार होने का अनुमान लगाया गया था, लेकिन अब दो क्विंटल उर्द पैदा हो जाए तो बड़ी बात है। वहीं, तिल का उन्नत शेखर बीज साढ़े बारह एकड़ में बोया गया था। करीब तीस क्विंटल तिल की पैदावार होने का अनुमान था, लेकिन अब केवल दस क्विंटल तिल ही पैदा होने की संभावना है। तिल का पौधा सामान्य लंबाई से छोटा रह गया है।
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कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक एके चौहान का कहना है कि मौसम की मार से फसल को नुकसान हुआ है। पचास फीसदी फसल पैदा होने की संभावना है। ज्यादा बारिश के कारण तिल को नुकसान हुआ है।
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