{"_id":"591226424f1c1b3854853267","slug":"administration-7","type":"story","status":"publish","title_hn":"जांच में पाई अनियमितताएं, कार्रवाई तय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जांच में पाई अनियमितताएं, कार्रवाई तय
lalitpur
Updated Wed, 10 May 2017 01:57 AM IST
विज्ञापन
प्रशासन
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जलनिगम के अधिकारियों ने नगरीय पेयजल योजना के करीब सवा करोड़ रुपये को गैर उपयोगी व शासनादेश के विपरीत कार्यों में व्यय कर दिया है। साथ ही बिना कार्य हुए लगभग 60 लाख रुपये का एडवांस भुगतान भी कर दिया है। विभागीय अधिकारियों की इस कार्यगुजारी पर से अमर उजाला ने पर्दा उठाया था। इसको संज्ञान में लेते हुए मंगलवार को एडीएम ने मामले की जांच-पड़ताल की और खबर को पुख्ता पाया है और आरोपी अधिकारियों व कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।
विगत वर्ष 2016 के मई माह में नगरीय पेयजल योजना के तहत नगरीय क्षेत्रों में नवीन हैंडपंप, रीबोर व नलकूपों को रीबोर कराने के लिए शासन ने जल निगम को 2.80 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए थे। लेकिन कुल धनराशि के सापेक्ष करीब 1.37 करोड़ रुपये धनराशि का उपयोग जल निगम ने शासनादेश के विपरीत व गैर उपयोगी कार्यों में कर दिया है और इस्टीमेट की दरों में भी काफी गड़बड़ियां की है। इस संबंध में अमर उजाला ने 28 अप्रैल के अंक में ‘गलत जगह लगाए जा रहे डेढ़ करोड़’ नामक शीर्षक से और 06 मई के अंक में ‘काम हुआ नहीं, दे दिए 60 लाख रुपये’ शीर्षक से समाचार को प्रकाशित किया था। इसके बाद अपर जिलाधिकारी योगेंद्र बहादुर सिंह ने मामले की जांच शुरू कर दी है। मंगलवार को सुबह वह जिला निगम विद्युत यांत्रित इकाई के कार्यालय पहुंचे, वहां उन्होंने उक्त कार्य योजना से और भुगतान से संबंधित समस्त जानकारियां व दस्तावेज एकत्रित किए। शुरुआती जांच में अनियमितताएं सहीं पाई गईं। एडीएम ने संबंधित दस्तावेज एकत्रित करके मामले की पूरी पड़ताल शुरू कर दी है।
उन्होंने कार्यालय का निरीक्षण भी किया गया, जिसमें कार्यालय परिसर व कक्षों में काफी गंदगी मिली। फाइलों का कर रखरखाव भी सहीं मिला। उन्होंने अधिकारियों व कर्मियों की फटकार लगाई और नियमित रूप से कार्यालय की सफाई कराने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन के तहत सफाई व्यवस्था में श्रमदान करने की भी बात कही। इसके अलावा दो कर्मी कार्यालय में अनुपस्थित भी पाए गए, जिनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन
जांच के बिंदु व उनकी हकीकत
-एयर ब्लोअर का नहीं उपयोग
इस योजना के तहत जल निगम ने शासनादेश के विपरीत शहर के तीनों व तालबेहट के एक ट्रीटमेंट प्लांट में एक-एक एयर बलोअर सिस्टम लगाने की योजना बनाई है। जांच के दौरान जल निगम के अधिशासी अभियंता अमर सिंह कटियार व जल संस्थान के अधिशासी अभियंता वीके श्रीवास्तव ने एडीएम को बताया कि ट्रीटमेंट प्लांट में इसकी कोई आवश्यकता नहीं है, यह प्लांट बनने के दौरान लगाया जाता है। इससे बेहतर बैक वॉस सिस्टम प्लांट में लगा हुआ है, जो कभी खराब नहीं होगा। यहां यह स्थिति साफ हो गई कि 94.54 लाख रुपये की लागत से लगाए जा रहे एयर ब्लोअर गैर उपयोगी हैं।
- दिया एडवांस भुगतान
जांच के दौरान यह पाया गया है कि जल निगम के तत्कालीन अधिकारी ने एयर ब्लोअर का करीब 60 लाख रुपये एडवांस भुगतान कर दिया है। इनकी खरीदी विगत जनवरी माह में हुई थी और 10 फरवरी को भुगतान कर दिया गया, चारों एयर ब्लोअर चार महीने से विभाग के स्टोर में रखे हुए है।
- टेंडर के बाद ली प्रशासनिक अनुमति
जल निगम ने उक्त कार्यों की टेंडर प्रक्रिया पहले ही पूर्ण कर ली थी। इसके बाद कार्ययोजना पर प्रशासनिक अनुमति ली गई थी। टेंडर की सूचना 17 दिसंबर 2016 को जारी की गई थी। इसके बाद 19 व 20 अप्रैल तक टेंडर डाले गए थे और 22 अप्रैल को टेंडर ओपन किए गए। टेंडर प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद जल निगम ने मात्र औपचारिकता करने के लिए 22 अप्रैल को एडीएम से कार्ययोजना की अनुमति ली।
- शासनादेश के विपरीत कार्ययोजना
इस योजना के तहत नवीन हैंडपंप व खराब पड़े हैंडपंप व नलकूपों का रीबोर कराने का कार्य किया जाना था। जल निगम द्वारा करीब 1.37 करोड़ रुपये के कार्य शासनादेश के विपरीत पाए गए हैं। एयर ब्लोअर, पाइप लाइन का कार्य, गौसियस टाइप क्लोरिनेटिंग प्लांट, कंट्रोल पैनल आदि ऐसे कार्य है जो शासनादेश के विपरीत हैं।
अनुमति देने वाले ही करेंगे कार्रवाई
जांच पूरी होने के बाद यह भी देखना दिलचस्प होगा कि जिला प्रशासन जिन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करता है। क्योंकि इस कार्यगुजारी में जिला प्रशासन की भी गलती है। इस योजना के तहत जल निगम ने शासनादेश के विपरीत करीब 1.37 करोड़ रुपये की जो कार्ययोजना बनाई है, उसको प्रशासनिक अनुमति जांच कर रहे एडीएम योगेंद्र बहादुर सिंह व जिलाधिकारी डॉ. रुपेश कुमार ने ही दी है। जांच के दौरान की जाने वाली कार्रवाई का विभागीय अधिकारियों से लेकर आम जनता तक सभी को इंतजार है।
गलती हुई है, सुधारा जाएगा
जल निगम में जांच के दौरान अपर जिलाधिकारी योगेंद्र बहादुर सिंह से जब पूछा गया कि शासनादेश के विपरीत किए जा रहे उक्त कार्यों की कार्ययोजना को आप के ही द्वारा मंजूरी दी गई है तो उन्होंने दबी आवाज में अपनी गलती को स्वीकारते हुए कहा कि गलती हुई है, जिसका सुधार किया जाएगा।
विज्ञापन
विगत वर्ष 2016 के मई माह में नगरीय पेयजल योजना के तहत नगरीय क्षेत्रों में नवीन हैंडपंप, रीबोर व नलकूपों को रीबोर कराने के लिए शासन ने जल निगम को 2.80 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए थे। लेकिन कुल धनराशि के सापेक्ष करीब 1.37 करोड़ रुपये धनराशि का उपयोग जल निगम ने शासनादेश के विपरीत व गैर उपयोगी कार्यों में कर दिया है और इस्टीमेट की दरों में भी काफी गड़बड़ियां की है। इस संबंध में अमर उजाला ने 28 अप्रैल के अंक में ‘गलत जगह लगाए जा रहे डेढ़ करोड़’ नामक शीर्षक से और 06 मई के अंक में ‘काम हुआ नहीं, दे दिए 60 लाख रुपये’ शीर्षक से समाचार को प्रकाशित किया था। इसके बाद अपर जिलाधिकारी योगेंद्र बहादुर सिंह ने मामले की जांच शुरू कर दी है। मंगलवार को सुबह वह जिला निगम विद्युत यांत्रित इकाई के कार्यालय पहुंचे, वहां उन्होंने उक्त कार्य योजना से और भुगतान से संबंधित समस्त जानकारियां व दस्तावेज एकत्रित किए। शुरुआती जांच में अनियमितताएं सहीं पाई गईं। एडीएम ने संबंधित दस्तावेज एकत्रित करके मामले की पूरी पड़ताल शुरू कर दी है।
विज्ञापन
उन्होंने कार्यालय का निरीक्षण भी किया गया, जिसमें कार्यालय परिसर व कक्षों में काफी गंदगी मिली। फाइलों का कर रखरखाव भी सहीं मिला। उन्होंने अधिकारियों व कर्मियों की फटकार लगाई और नियमित रूप से कार्यालय की सफाई कराने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन के तहत सफाई व्यवस्था में श्रमदान करने की भी बात कही। इसके अलावा दो कर्मी कार्यालय में अनुपस्थित भी पाए गए, जिनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन
जांच के बिंदु व उनकी हकीकत
-एयर ब्लोअर का नहीं उपयोग
इस योजना के तहत जल निगम ने शासनादेश के विपरीत शहर के तीनों व तालबेहट के एक ट्रीटमेंट प्लांट में एक-एक एयर बलोअर सिस्टम लगाने की योजना बनाई है। जांच के दौरान जल निगम के अधिशासी अभियंता अमर सिंह कटियार व जल संस्थान के अधिशासी अभियंता वीके श्रीवास्तव ने एडीएम को बताया कि ट्रीटमेंट प्लांट में इसकी कोई आवश्यकता नहीं है, यह प्लांट बनने के दौरान लगाया जाता है। इससे बेहतर बैक वॉस सिस्टम प्लांट में लगा हुआ है, जो कभी खराब नहीं होगा। यहां यह स्थिति साफ हो गई कि 94.54 लाख रुपये की लागत से लगाए जा रहे एयर ब्लोअर गैर उपयोगी हैं।
- दिया एडवांस भुगतान
जांच के दौरान यह पाया गया है कि जल निगम के तत्कालीन अधिकारी ने एयर ब्लोअर का करीब 60 लाख रुपये एडवांस भुगतान कर दिया है। इनकी खरीदी विगत जनवरी माह में हुई थी और 10 फरवरी को भुगतान कर दिया गया, चारों एयर ब्लोअर चार महीने से विभाग के स्टोर में रखे हुए है।
- टेंडर के बाद ली प्रशासनिक अनुमति
जल निगम ने उक्त कार्यों की टेंडर प्रक्रिया पहले ही पूर्ण कर ली थी। इसके बाद कार्ययोजना पर प्रशासनिक अनुमति ली गई थी। टेंडर की सूचना 17 दिसंबर 2016 को जारी की गई थी। इसके बाद 19 व 20 अप्रैल तक टेंडर डाले गए थे और 22 अप्रैल को टेंडर ओपन किए गए। टेंडर प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद जल निगम ने मात्र औपचारिकता करने के लिए 22 अप्रैल को एडीएम से कार्ययोजना की अनुमति ली।
- शासनादेश के विपरीत कार्ययोजना
इस योजना के तहत नवीन हैंडपंप व खराब पड़े हैंडपंप व नलकूपों का रीबोर कराने का कार्य किया जाना था। जल निगम द्वारा करीब 1.37 करोड़ रुपये के कार्य शासनादेश के विपरीत पाए गए हैं। एयर ब्लोअर, पाइप लाइन का कार्य, गौसियस टाइप क्लोरिनेटिंग प्लांट, कंट्रोल पैनल आदि ऐसे कार्य है जो शासनादेश के विपरीत हैं।
अनुमति देने वाले ही करेंगे कार्रवाई
जांच पूरी होने के बाद यह भी देखना दिलचस्प होगा कि जिला प्रशासन जिन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करता है। क्योंकि इस कार्यगुजारी में जिला प्रशासन की भी गलती है। इस योजना के तहत जल निगम ने शासनादेश के विपरीत करीब 1.37 करोड़ रुपये की जो कार्ययोजना बनाई है, उसको प्रशासनिक अनुमति जांच कर रहे एडीएम योगेंद्र बहादुर सिंह व जिलाधिकारी डॉ. रुपेश कुमार ने ही दी है। जांच के दौरान की जाने वाली कार्रवाई का विभागीय अधिकारियों से लेकर आम जनता तक सभी को इंतजार है।
गलती हुई है, सुधारा जाएगा
जल निगम में जांच के दौरान अपर जिलाधिकारी योगेंद्र बहादुर सिंह से जब पूछा गया कि शासनादेश के विपरीत किए जा रहे उक्त कार्यों की कार्ययोजना को आप के ही द्वारा मंजूरी दी गई है तो उन्होंने दबी आवाज में अपनी गलती को स्वीकारते हुए कहा कि गलती हुई है, जिसका सुधार किया जाएगा।