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Lalitpur News: कहीं पुराना थाना, कहीं मंदिर परिसर में चल रहा दवाखाना
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ललितपुर। अस्पताल में मरीजों को इलाज मिलने की आस टूट रही है। आयुर्वेद को बढ़ावा देने की सरकार की मंशा ललितपुर में फेल साबित होती नजर आ रही है। कहने को जिले में 32 आयुर्वेदिक अस्पताल हैं, लेकिन 26 अस्पताल किराये और जर्जर भवन में चल रहे हैं। गांव बालाबेहट में तो अस्पताल पुराने थाने के अंदर चलता है, तो गांव खजुरिया में मंदिर के एक कमरे में मरीजों को इलाज मिलता है। इसके साथ ही जिले के कई अस्पतालों में न तो डॉक्टर हैं और न ही दवाएं हैं। ऐसे में तमाम मरीज मायूस होकर लौट रहे हैं।
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थाने के कमरे में रहता है अंधेरा
गांव बालाबेहट में आयुर्वेदिक अस्पताल थाने में चलता है। बताया जाता है कि कुछ साल पहले यहां चलने वाले थाने को नई जगह शिफ्ट कर दिया गया। इसके बाद यहां पर अस्पताल शुरू कर दिया गया। अस्पताल में रोज 45 से 50 मरीज इलाज के लिए आते हैं। लेकिन यहां बने दो कमरों में अंधेरा रहता है। मरीजों को अंधेरे में इलाज कराना पड़ता है। अस्पताल में केवल एक चिकित्सक तैनात है। वहीं मरीजों को देखने के साथ दवाइयां देते हैं। विभाग ने कई बार नए भवन के निर्माण के लिए जमीन की तलाश की, लेकिन जमीन न मिल पाने से अस्पताल पुराने भवन में चल रहा है।
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मंदिर के कमरे में अस्पताल चल रहा
महरौनी के गांव खजुरिया में भी आयुवेर्दिक अस्पताल के लिए जगह नहीं मिल सकी है। यहां पर मंदिर के पुराने एक कमरे में अस्पताल चलता है। यहां रोज करीब 30 मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं, लेकिन मरीजों को एक कमरे में इलाज कराने में दिक्कत होती है। कभी-कभी भीड़ ज्यादा होने से मरीज कमरे के बाहर की बैठकर अपनी बारी आने का इंतजार करते हैं।
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चिकित्सक और फार्मासिस्ट की कमी
32 आयुर्वेद व दो यूनानी अस्पतालों में 37 चिकित्सक व फार्मासिस्टों के पद स्वीकृत हैं, जिसके सापेक्ष 20 चिकित्सक कार्यरत हैं। 17 चिकित्सकों की कमी है। वहीं 11 फार्मासिस्ट कार्यरत हैं, जिनकी 70 प्रतिशत कमी बनी हुई है।
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कहते हैं आंकड़े
32 आयुर्वेदिक अस्पताल हैं जिले में
26 अस्पताल निजी भवनों में चल रहे
15 अस्पताल किराये के भवन में संचालित
11 अस्पतालों को नि:शुल्क इमारतों में चलाया जा रहा
02 हजार मरीज रोज इलाज कराने आते हैं
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आठ अस्पतालों के निर्माण के लिए जमीन मिल गई थी, जिसमें सात भवनों का निर्माण कार्य चल रहा है। एक अस्पताल की जमीन में समस्या होने से निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। अन्य के लिए जमीन की खोज की जा रही है।
- डॉ. डीके बिजौरिया, जिला आयुर्वेद व यूनानी अधिकारी
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थाने के कमरे में रहता है अंधेरा
गांव बालाबेहट में आयुर्वेदिक अस्पताल थाने में चलता है। बताया जाता है कि कुछ साल पहले यहां चलने वाले थाने को नई जगह शिफ्ट कर दिया गया। इसके बाद यहां पर अस्पताल शुरू कर दिया गया। अस्पताल में रोज 45 से 50 मरीज इलाज के लिए आते हैं। लेकिन यहां बने दो कमरों में अंधेरा रहता है। मरीजों को अंधेरे में इलाज कराना पड़ता है। अस्पताल में केवल एक चिकित्सक तैनात है। वहीं मरीजों को देखने के साथ दवाइयां देते हैं। विभाग ने कई बार नए भवन के निर्माण के लिए जमीन की तलाश की, लेकिन जमीन न मिल पाने से अस्पताल पुराने भवन में चल रहा है।
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मंदिर के कमरे में अस्पताल चल रहा
महरौनी के गांव खजुरिया में भी आयुवेर्दिक अस्पताल के लिए जगह नहीं मिल सकी है। यहां पर मंदिर के पुराने एक कमरे में अस्पताल चलता है। यहां रोज करीब 30 मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं, लेकिन मरीजों को एक कमरे में इलाज कराने में दिक्कत होती है। कभी-कभी भीड़ ज्यादा होने से मरीज कमरे के बाहर की बैठकर अपनी बारी आने का इंतजार करते हैं।
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चिकित्सक और फार्मासिस्ट की कमी
32 आयुर्वेद व दो यूनानी अस्पतालों में 37 चिकित्सक व फार्मासिस्टों के पद स्वीकृत हैं, जिसके सापेक्ष 20 चिकित्सक कार्यरत हैं। 17 चिकित्सकों की कमी है। वहीं 11 फार्मासिस्ट कार्यरत हैं, जिनकी 70 प्रतिशत कमी बनी हुई है।
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कहते हैं आंकड़े
32 आयुर्वेदिक अस्पताल हैं जिले में
26 अस्पताल निजी भवनों में चल रहे
15 अस्पताल किराये के भवन में संचालित
11 अस्पतालों को नि:शुल्क इमारतों में चलाया जा रहा
02 हजार मरीज रोज इलाज कराने आते हैं
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आठ अस्पतालों के निर्माण के लिए जमीन मिल गई थी, जिसमें सात भवनों का निर्माण कार्य चल रहा है। एक अस्पताल की जमीन में समस्या होने से निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। अन्य के लिए जमीन की खोज की जा रही है।
- डॉ. डीके बिजौरिया, जिला आयुर्वेद व यूनानी अधिकारी