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साझेदारी के बांध की पूरी बिजली ले रहा एमपी
Lalitpur
Updated Sun, 22 Jun 2014 05:33 AM IST
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ललितपुर। यूपी व एमपी की संयुक्त परियोजना के रूप में तैयार किया गया राजघाट बांध यूं तो दोनों प्रदेशों का संयुक्त प्रोजेक्ट है, पर जहां तक बिजली बंटवारे के बात है तो इस बांध के पन बिजली संयंत्र से उत्पादित होने वाली विद्युत को मध्यप्रदेश अकेले ही उपयोग कर लेता है। उत्तरप्रदेश सरकार इस मसले को लेकर गैर गंभीर दिखाई देते हैं।
बिजली संकट से जूझ रहे प्रदेश को राहत देने के लिए जहां एक ओर राज्य सरकार बुंदेलखंड में सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना करवा रही है तो वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित राजघाट बांध के पन विद्युत गृह से उत्पादित होने वाली बिजली का सही बंटवारा न होने से यूपी की 22.50 मेगावाट बिजली का उपयोग मध्यप्रदेश कर रहा है। 1974 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बेतवा नदी पर राजघाट बांध परियोजना का शिलान्यास किया था। उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश की इस संयुक्त परियोजना में पन विद्युत गृह का भी निर्माण प्रस्तावित किया गया। पन विद्युत गृह को बनाने के लिए बेतवा रिवर बोर्ड को उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश सरकारों ने बराबर धन दिया था। इसके पश्चात बांध स्थित मध्य प्रदेश के हिस्से में प्रस्तावित पन विद्युत गृह का निर्माण कार्य बेतवा रिवर बोर्ड ने मध्य प्रदेश बिजली बोर्ड को दे दिया। इसमें 15- 15 मेगावाट की तीन टरवाइन लगाई गईं। मध्य प्रदेश बिजली बोर्ड ने पन विद्युत गृह के साथ- साथ फीडर भी तैयार कर लिया और बांध का निर्माण कार्य पूर्ण होते ही मध्य प्रदेश वाले हिस्से के बांध के आधे पानी के साथ 45 मेगावाट बिजली लेनी शुरू कर दी जबकि नियमों के मुताबिक उत्तर प्रदेश को 22.50 मेगावाट बिजली मिलनी चाहिए थी। उत्तर प्रदेश सरकार ने विद्युत लेने के लिए टावर निर्माण पर आठ करोड़ रुपये तो खर्च किए लेकिन बांध के पानी से बनाई जा रही बिजली फिर भी नहीं मिल सकी।
जानकारों का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार व बिजली विभाग के अधिकारियों ने इस मुद्दे को कभी भी गंभीरता से नहीं लिया, जिसकी वजह से यह हालात बने हुए हैं। मौजूदा समय में विद्युत संकट के बावजूद राज्य सरकार व अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। यदि उत्तर प्रदेश के हिस्से की 22.50 मेगावाट बिजली मिलने लगे तो बुंदेलखंड के कई जनपदों में 24 घंटे बिजली रोशन हो जाएगी।
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रिवर बोर्ड की बैठक में सीएम ने नहीं लिया भाग
ललितपुर। बुंदेलखंड में सिंचाई का पानी व बिजली भले ही बड़ी समस्या के रूप में देखे जाते रहे हों पर राजघाट बांध निर्माण के बाद से अभी तक उत्तर प्रदेश की सभी सरकारें इसको लेकर संजीदा दिखाई नहीं दीं। बेतवा रीवर बोर्ड की बैठक में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कभी भाग नहीं लिया।
राजघाट बांध निर्माण के दौरान गठित किए गए बेतवा रिवर बोर्ड में जल संसाधान मंत्री अध्यक्ष होते हैं। उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री, दोनों प्रदेशों के सिंचाई मंत्री व बिजली (ऊर्जा) मंत्री इसमें सदस्य हैं। यह भी तय किया गया था कि समय- समय पर आयोजित होने वाली बैठकों में बांध की समस्याओं को दूर करने के साथ ही उसके विकास को लेकर चर्चा होगी। जानकारों का कहना है कि बांध निर्माण के बाद से अभी तक उत्तर प्रदेश सरकार के किसी भी मुख्यमंत्री ने बेतवा रिवर बोर्ड की बैठक में हिस्सा नहीं लिया, जबकि मध्य प्रदेश के सभी सदस्य बैठक में अपनी हिस्सेदारी निभाते चले आ रहे हैं। इस स्थिति में मध्य प्रदेश के अफसर राजघाट बांध के क्रियान्वयन पर हावी हो गए। यदि बेतवा रिवर बोर्ड की बैठक में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री इस मुद्दे को संजीदगी से उठाएं तो 22.50 मेगवाट बिजली आसानी से हासिल की जा सकती है। इस बिजली के मिलने से दो फायदे होंगे, एक तो पन विद्युत गृह की बिजली से जनपद व आसपास के जिले रोशन होंगे तो वहीं अभी मिल रही बिजली का अन्य स्थानों पर उपयोग किया जा सकेगा।
होगा बड़ा आंदोलन
ललितपुर। बिजली संकट के दौर में जनपद के बुद्धिजीवी राजघाट पन विद्युत गृह में उत्पादित हो रही बिजली के बंटवारे को लेकर संजीदा हो गए हैं। समाजवादी चिंतक मुरारी लाल जैन ने बताया कि बिजली के बंटवारे को लेकर हमेशा से ही राज्य सरकार लापरवाह रही है। कई बार इस संबंध में पत्राचार भी किया गया, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब इस संबंध में निर्णायक आंदोलन किया जाएगा।
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बिजली संकट से जूझ रहे प्रदेश को राहत देने के लिए जहां एक ओर राज्य सरकार बुंदेलखंड में सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना करवा रही है तो वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित राजघाट बांध के पन विद्युत गृह से उत्पादित होने वाली बिजली का सही बंटवारा न होने से यूपी की 22.50 मेगावाट बिजली का उपयोग मध्यप्रदेश कर रहा है। 1974 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बेतवा नदी पर राजघाट बांध परियोजना का शिलान्यास किया था। उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश की इस संयुक्त परियोजना में पन विद्युत गृह का भी निर्माण प्रस्तावित किया गया। पन विद्युत गृह को बनाने के लिए बेतवा रिवर बोर्ड को उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश सरकारों ने बराबर धन दिया था। इसके पश्चात बांध स्थित मध्य प्रदेश के हिस्से में प्रस्तावित पन विद्युत गृह का निर्माण कार्य बेतवा रिवर बोर्ड ने मध्य प्रदेश बिजली बोर्ड को दे दिया। इसमें 15- 15 मेगावाट की तीन टरवाइन लगाई गईं। मध्य प्रदेश बिजली बोर्ड ने पन विद्युत गृह के साथ- साथ फीडर भी तैयार कर लिया और बांध का निर्माण कार्य पूर्ण होते ही मध्य प्रदेश वाले हिस्से के बांध के आधे पानी के साथ 45 मेगावाट बिजली लेनी शुरू कर दी जबकि नियमों के मुताबिक उत्तर प्रदेश को 22.50 मेगावाट बिजली मिलनी चाहिए थी। उत्तर प्रदेश सरकार ने विद्युत लेने के लिए टावर निर्माण पर आठ करोड़ रुपये तो खर्च किए लेकिन बांध के पानी से बनाई जा रही बिजली फिर भी नहीं मिल सकी।
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जानकारों का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार व बिजली विभाग के अधिकारियों ने इस मुद्दे को कभी भी गंभीरता से नहीं लिया, जिसकी वजह से यह हालात बने हुए हैं। मौजूदा समय में विद्युत संकट के बावजूद राज्य सरकार व अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। यदि उत्तर प्रदेश के हिस्से की 22.50 मेगावाट बिजली मिलने लगे तो बुंदेलखंड के कई जनपदों में 24 घंटे बिजली रोशन हो जाएगी।
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रिवर बोर्ड की बैठक में सीएम ने नहीं लिया भाग
ललितपुर। बुंदेलखंड में सिंचाई का पानी व बिजली भले ही बड़ी समस्या के रूप में देखे जाते रहे हों पर राजघाट बांध निर्माण के बाद से अभी तक उत्तर प्रदेश की सभी सरकारें इसको लेकर संजीदा दिखाई नहीं दीं। बेतवा रीवर बोर्ड की बैठक में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कभी भाग नहीं लिया।
राजघाट बांध निर्माण के दौरान गठित किए गए बेतवा रिवर बोर्ड में जल संसाधान मंत्री अध्यक्ष होते हैं। उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री, दोनों प्रदेशों के सिंचाई मंत्री व बिजली (ऊर्जा) मंत्री इसमें सदस्य हैं। यह भी तय किया गया था कि समय- समय पर आयोजित होने वाली बैठकों में बांध की समस्याओं को दूर करने के साथ ही उसके विकास को लेकर चर्चा होगी। जानकारों का कहना है कि बांध निर्माण के बाद से अभी तक उत्तर प्रदेश सरकार के किसी भी मुख्यमंत्री ने बेतवा रिवर बोर्ड की बैठक में हिस्सा नहीं लिया, जबकि मध्य प्रदेश के सभी सदस्य बैठक में अपनी हिस्सेदारी निभाते चले आ रहे हैं। इस स्थिति में मध्य प्रदेश के अफसर राजघाट बांध के क्रियान्वयन पर हावी हो गए। यदि बेतवा रिवर बोर्ड की बैठक में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री इस मुद्दे को संजीदगी से उठाएं तो 22.50 मेगवाट बिजली आसानी से हासिल की जा सकती है। इस बिजली के मिलने से दो फायदे होंगे, एक तो पन विद्युत गृह की बिजली से जनपद व आसपास के जिले रोशन होंगे तो वहीं अभी मिल रही बिजली का अन्य स्थानों पर उपयोग किया जा सकेगा।
होगा बड़ा आंदोलन
ललितपुर। बिजली संकट के दौर में जनपद के बुद्धिजीवी राजघाट पन विद्युत गृह में उत्पादित हो रही बिजली के बंटवारे को लेकर संजीदा हो गए हैं। समाजवादी चिंतक मुरारी लाल जैन ने बताया कि बिजली के बंटवारे को लेकर हमेशा से ही राज्य सरकार लापरवाह रही है। कई बार इस संबंध में पत्राचार भी किया गया, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब इस संबंध में निर्णायक आंदोलन किया जाएगा।