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स्कूलों में हाजिरी बढ़ाने के प्रयास नाकाम
Lalitpur
Updated Sat, 30 Mar 2013 05:32 AM IST
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ललितपुर। परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की उपस्थिति बढ़ाने के प्रयास हवा हवाई साबित हो रहे हैं। विभागीय अफसरों के निर्देशों के बाद भी शिक्षक व स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्य अभिभावकों से संपर्क नहीं कर रहे हैं। शायद यही वजह है कि स्कूलों में बच्चों की हाजिरी का प्रतिशत नहीं बढ़ रहा है।
नौनिहालों को प्राथमिक शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से मुफ्त ड्रेस, छात्रवृत्ति एवं मिड डे मील जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं, इसके बाद भी लुभावनी योजनाएं बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने में नाकाम साबित हो रहीं हैं। वर्तमान में बच्चों की हाजिरी स्कूलों में करीब चालीस फीसदी के आसपास ही दर्ज की जा रही है। सैकड़ों की संख्या में बच्चे रबी सीजन की फसल कटाई एवं थ्रेसिंग कार्य में हाथ बंटा रहे हैं। अधिकांश बच्चे सुबह उठते ही स्कूल जाने के स्थान पर या तो अभिभावकों के साथ खेत पर चले जाते हैं या फिर घर पर ही रहकर अपने छोटे भाई बहनों की देखभाल करते हैं तो तमाम बच्चे खेतों में बिखरी पड़ी गेहूं की बालियों एवं चने की घेंटी बीनने का काम रहे हैं। इस वजह से परिषदीय स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति में अत्यंत चिंताजनक स्थिति में पहुंच गई है। बीते महीनों में यूनीसेफ ने बच्चों की हाजिरी की टोह लेने के उद्देश्य से स्कूलों का सैंपल सर्वे कराया था। उस दौरान करीब तीस फीसदी बच्चे ही स्कूलों में नियमित पाए गए थे। इस पर यूनीसेफ के गुणवत्ता समन्वयक रंजीत सिंह ने ऐसे बच्चों की सूची तैयार करने को प्रधानाध्यापकों से कहा था। इस खाका के आधार पर बच्चों की उपस्थिति में सुधार होता कि रबी सीजन की फसल कटाई का कार्य प्रारंभ हो गया। मौजूदा समय में करीब 60 फीसदी से अधिक बच्चे कृषि कार्य में व्यस्त हैं।
विकासखंड बिरधा क्षेत्र अंतर्गत स्कूलों में बच्चों की संख्या 35 से 40 प्रतिशत ही दर्ज हो रही है। वहीं, ब्लाक तालबेहट, महरौनी, मड़ावरा व बार में 40 प्रतिशत औसतन हाजिरी का आंकलन है। पिछले दिनों ऐडी बेसिक झांसी नीना उदैनिया ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के निर्देश बीएसए को दिए थे। इसके बाद भी विद्यालयों में बच्चों की हाजिरी जस की तस बनी हुई है।
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बैठकों में हो रही रस्म अदायगी
ललितपुर। स्कूल प्रबंध समिति के सदस्यों को प्रशिक्षित किए जाने के बाद भी अपने दायित्व एवं कर्तव्यों से पीछे हटते दिखाई दे रहे हैं। समितियों की मासिक बैठक में अभिभावकों की संख्या न के बराबर बनी हुई है। इसके बाद भी बैठक का कोरम पूरा करने के उद्देश्य से कागजी कार्रवाई में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जा रही है। इन स्थितियों में बैठकों की सार्थकता निकलकर नहीं आ पा रही है। बीते दिनों ऐडी बेसिक झांसी नीना उदैनिया ने समिति की बैठकों को रूचिपूर्ण बनाने के निर्देश दिए थे लेकिन, इसका भी अनुपालन नहीं हो सका। बैठकों में वाद विवाद प्रतियोगिता तो दूर अंत्याक्षरी भी नहीं हो रही है।
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नौनिहालों को प्राथमिक शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से मुफ्त ड्रेस, छात्रवृत्ति एवं मिड डे मील जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं, इसके बाद भी लुभावनी योजनाएं बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने में नाकाम साबित हो रहीं हैं। वर्तमान में बच्चों की हाजिरी स्कूलों में करीब चालीस फीसदी के आसपास ही दर्ज की जा रही है। सैकड़ों की संख्या में बच्चे रबी सीजन की फसल कटाई एवं थ्रेसिंग कार्य में हाथ बंटा रहे हैं। अधिकांश बच्चे सुबह उठते ही स्कूल जाने के स्थान पर या तो अभिभावकों के साथ खेत पर चले जाते हैं या फिर घर पर ही रहकर अपने छोटे भाई बहनों की देखभाल करते हैं तो तमाम बच्चे खेतों में बिखरी पड़ी गेहूं की बालियों एवं चने की घेंटी बीनने का काम रहे हैं। इस वजह से परिषदीय स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति में अत्यंत चिंताजनक स्थिति में पहुंच गई है। बीते महीनों में यूनीसेफ ने बच्चों की हाजिरी की टोह लेने के उद्देश्य से स्कूलों का सैंपल सर्वे कराया था। उस दौरान करीब तीस फीसदी बच्चे ही स्कूलों में नियमित पाए गए थे। इस पर यूनीसेफ के गुणवत्ता समन्वयक रंजीत सिंह ने ऐसे बच्चों की सूची तैयार करने को प्रधानाध्यापकों से कहा था। इस खाका के आधार पर बच्चों की उपस्थिति में सुधार होता कि रबी सीजन की फसल कटाई का कार्य प्रारंभ हो गया। मौजूदा समय में करीब 60 फीसदी से अधिक बच्चे कृषि कार्य में व्यस्त हैं।
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विकासखंड बिरधा क्षेत्र अंतर्गत स्कूलों में बच्चों की संख्या 35 से 40 प्रतिशत ही दर्ज हो रही है। वहीं, ब्लाक तालबेहट, महरौनी, मड़ावरा व बार में 40 प्रतिशत औसतन हाजिरी का आंकलन है। पिछले दिनों ऐडी बेसिक झांसी नीना उदैनिया ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के निर्देश बीएसए को दिए थे। इसके बाद भी विद्यालयों में बच्चों की हाजिरी जस की तस बनी हुई है।
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बैठकों में हो रही रस्म अदायगी
ललितपुर। स्कूल प्रबंध समिति के सदस्यों को प्रशिक्षित किए जाने के बाद भी अपने दायित्व एवं कर्तव्यों से पीछे हटते दिखाई दे रहे हैं। समितियों की मासिक बैठक में अभिभावकों की संख्या न के बराबर बनी हुई है। इसके बाद भी बैठक का कोरम पूरा करने के उद्देश्य से कागजी कार्रवाई में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जा रही है। इन स्थितियों में बैठकों की सार्थकता निकलकर नहीं आ पा रही है। बीते दिनों ऐडी बेसिक झांसी नीना उदैनिया ने समिति की बैठकों को रूचिपूर्ण बनाने के निर्देश दिए थे लेकिन, इसका भी अनुपालन नहीं हो सका। बैठकों में वाद विवाद प्रतियोगिता तो दूर अंत्याक्षरी भी नहीं हो रही है।