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बिना मान्यता के स्कूलों पर कसा शिकंजा
Lalitpur
Updated Wed, 30 Jan 2013 05:30 AM IST
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ललितपुर। शिक्षा को दागदार बनाने का काम रहे अमान्य विद्यालयों पर एक बार फिर से संकट के बादल मंडराते दिखाई दे रहे हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक ने ब्लाकवार विद्यालयों का चिह्नींकरण कराने को खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखा है।
शिक्षा के अधिकार अधिनियम को धरातल पर लागू करने का विभागीय अफसर भले ही दावा कर रहे हों लेकिन, हकीकत इससे कोसों दूर है। वर्तमान में जिले में करीब आधा सैकड़ा से अधिक अमान्य विद्यालय धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। हालांकि जुलाई, अगस्त माह के दौरान चिह्नित अमान्य विद्यालयों को नोटिस जारी किए गए थे। इसके बाद कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई। जिला विद्यालय निरीक्षक दीपचंद ने इसे गंभीरता से लिया है। उन्होंने ब्लाकवार अमान्य विद्यालयों का चिह्नींकरण कराकर सूची उपलब्ध कराने को कहा है। इसकी एक प्रति बीएसए को भी मुहैया कराई गई है। उल्लेखनीय है कि जनपद में मान्यता प्राप्त विद्यालयों की संख्या कम है। इस कारण विभिन्न ब्लाकों में अमान्य विद्यालय खूब फलफूल रहे हैं।
कसबा पाली, बानपुर, कुआगांव आदि अमान्य विद्यालयों के संचालन को मुफीद स्थल बनते जा रहे हैं। बीते माहों में अंकतालिका कहीं की और टीसी किसी विद्यालय की प्रकरण सुर्खियों में रहा लेकिन, जिम्मेदारों ने मामले को निस्तारित करने में तनिक भी दिलचस्पी नहीं दिखाई और इस तरह मामला धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला गया।
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शिक्षा के अधिकार अधिनियम को धरातल पर लागू करने का विभागीय अफसर भले ही दावा कर रहे हों लेकिन, हकीकत इससे कोसों दूर है। वर्तमान में जिले में करीब आधा सैकड़ा से अधिक अमान्य विद्यालय धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। हालांकि जुलाई, अगस्त माह के दौरान चिह्नित अमान्य विद्यालयों को नोटिस जारी किए गए थे। इसके बाद कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई। जिला विद्यालय निरीक्षक दीपचंद ने इसे गंभीरता से लिया है। उन्होंने ब्लाकवार अमान्य विद्यालयों का चिह्नींकरण कराकर सूची उपलब्ध कराने को कहा है। इसकी एक प्रति बीएसए को भी मुहैया कराई गई है। उल्लेखनीय है कि जनपद में मान्यता प्राप्त विद्यालयों की संख्या कम है। इस कारण विभिन्न ब्लाकों में अमान्य विद्यालय खूब फलफूल रहे हैं।
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कसबा पाली, बानपुर, कुआगांव आदि अमान्य विद्यालयों के संचालन को मुफीद स्थल बनते जा रहे हैं। बीते माहों में अंकतालिका कहीं की और टीसी किसी विद्यालय की प्रकरण सुर्खियों में रहा लेकिन, जिम्मेदारों ने मामले को निस्तारित करने में तनिक भी दिलचस्पी नहीं दिखाई और इस तरह मामला धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला गया।
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