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उजले दामन में वो सियासत की दुकान सजाए बैठे हैं...
Lalitpur
Updated Tue, 18 Dec 2012 05:30 AM IST
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ललितपुर। साहित्यक संस्था सृजन भारती ‘विंध्यांचल’ के तत्वावधान में गोविंद नगर में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से देश के नेताओं पर जमकर कटाक्ष किया। देर रात तक चले कवि सम्मेलन में कवियों ने श्रोताओं को जमकर हंसाया।
गोविंद नगर स्थित संस्था के अध्यक्ष एमएल भटनागर के निवास पर आयोजित कवि सम्मेलन में देश की राजनीति और राजनेताओं को आइना दिखाते हुए कवि रामकृष्ण कुशवाहा ने कहा कि ‘उजले दामन में वो सियासत की दुकान सजाए बैठे हैं, बगुला भक्तों को देखो जैसे गंगा नहाए बैठे हैं।’ पढ़ा तो तालियों की गड़गड़ाहट गूंजने लगी। श्रीराम नामदेव ने ‘वैसे इस मुल्क के बादशाह हमी हैं, ये बात अलग है कि सर पर ताज नहीं है’ कविता पढ़ी। रमेश पाठक रविंद्र ने ग्रामीणों की दास्ता बताते हुए कहा कि ‘इक भोला गांव का गया शहर की छांव में, चलते चलते छाले पड़ गए उसके दोनों पांव में’। बालकवि राज ललितपुरी ने ‘बच्चे हिंदू के हों या मुसलमान के, वो तो भविष्य हैं हिंदुस्तान के’ रचना पढ़ी। हास्य कवि किशन सिंह बंजारा ने ‘किसको दें हम गाली मेरी समझ नहीं आई, ये दुनियां बड़ी निराली मेरी समझ नहीं आई’ रचना पढ़ी। इस अवसर पर कन्हेया लाल शास्त्री मुकुल, हरनारायण पटेल, मुरली मनोहर, विजय नारायण रावत, भाग्य सिंह तोमर, एमएल भटनागर आदि ने कविता पाठ किया। कार्यक्रम में गनेश राम रजक, महम्मद नदीम, मनीष कुमार, अनुराग भटनागर, वर्णित भटनागर, कीर्ति विशाल, दिलीप शुक्ला, मदन मोहन व्यास, राजेंद्र प्रसाद, अजय सिंह, माधव सिंह परिहार, बृजेश श्रीवास्तव, हरनारायण, भरत सिंह सेंगर, चालीराजा, हरगोविंद अहिरवार आदि उपस्थित रहे।
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गोविंद नगर स्थित संस्था के अध्यक्ष एमएल भटनागर के निवास पर आयोजित कवि सम्मेलन में देश की राजनीति और राजनेताओं को आइना दिखाते हुए कवि रामकृष्ण कुशवाहा ने कहा कि ‘उजले दामन में वो सियासत की दुकान सजाए बैठे हैं, बगुला भक्तों को देखो जैसे गंगा नहाए बैठे हैं।’ पढ़ा तो तालियों की गड़गड़ाहट गूंजने लगी। श्रीराम नामदेव ने ‘वैसे इस मुल्क के बादशाह हमी हैं, ये बात अलग है कि सर पर ताज नहीं है’ कविता पढ़ी। रमेश पाठक रविंद्र ने ग्रामीणों की दास्ता बताते हुए कहा कि ‘इक भोला गांव का गया शहर की छांव में, चलते चलते छाले पड़ गए उसके दोनों पांव में’। बालकवि राज ललितपुरी ने ‘बच्चे हिंदू के हों या मुसलमान के, वो तो भविष्य हैं हिंदुस्तान के’ रचना पढ़ी। हास्य कवि किशन सिंह बंजारा ने ‘किसको दें हम गाली मेरी समझ नहीं आई, ये दुनियां बड़ी निराली मेरी समझ नहीं आई’ रचना पढ़ी। इस अवसर पर कन्हेया लाल शास्त्री मुकुल, हरनारायण पटेल, मुरली मनोहर, विजय नारायण रावत, भाग्य सिंह तोमर, एमएल भटनागर आदि ने कविता पाठ किया। कार्यक्रम में गनेश राम रजक, महम्मद नदीम, मनीष कुमार, अनुराग भटनागर, वर्णित भटनागर, कीर्ति विशाल, दिलीप शुक्ला, मदन मोहन व्यास, राजेंद्र प्रसाद, अजय सिंह, माधव सिंह परिहार, बृजेश श्रीवास्तव, हरनारायण, भरत सिंह सेंगर, चालीराजा, हरगोविंद अहिरवार आदि उपस्थित रहे।
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