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न इन्हें जान की फिक्र न उन्हें नियमों की परवाह
Lalitpur
Updated Tue, 13 Nov 2012 12:00 PM IST
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ललितपुर। हजारों जिंदगियां हर वर्ष सड़क हादसों का शिकार होती हैं। दुर्घटनाओं में लोग अपंग होकर दूसरों पर निर्भर होकर लाचारी की जिंदगी गुजारने को मजबूर हो जाते हैं। इस कटु सत्य को जानने के बाद भी यातायात नियमों का पालन नहीं करना चालकों का शगल बन गया है। खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ने के बाद भी पुलिस इस त्रासदी को लेकर बेपरवाह है। मौका यातायात माह का जरूर है पर सिर्फ रस्म अदायगी हो रही है।
सड़क दुर्घटनाओं में हजारों लोग काल के गाल में समा जाते हैं। नियमों के पालन के लिए लोगों को सचेत करने के लिए शासन ने एक महीने यातायात माह का आयोजन किया। इस दौरान हेलमेट, सीट बेल्ट सहित यातायात से संबंधित विभिन्न नियमों से लोगों को अवगत कराया, साथ ही चेकिंग बढ़ाकर यातायात नियमों को तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इंसानी जिंदगी के साथ जुड़ा हुआ यह मामला बहुत गंभीर है लेकिन चालक व पुलिस दोनों इसके प्रति बेपरवाह है। खासकर इस माह में भी लोगों को नियमों की कोई परवाह नहीं है। परिवहन मंत्री के निर्देशों के बावजूद जनपद के सभी पंपों पर बिना हेलमेट पेट्रोल मिल रहा है। नेताओं के रसूख के आगे पुलिस व नियम बौने हैं। सड़कों पर दौड़ते चार पहिया वाहनों के आगे राजनीतिक दलों के लहराते परचम आसानी से देखे जा सकते हैं। सिर्फ यही नहीं अफसोसजनक यह है कि नियमों के अनुपालन करवाने की जिम्मेदारी उठाने वाले पुलिस कर्मी खुद इनका पालन नहीं कर रहे हैं। यातायात माह के दौरान सड़कों पर दुपहिया वाहनों से पुलिस कर्मी भी बिना हेलमेट के ही फर्राटा भरते नजर आ रहेहैं। दुपहिया वाहन पर तीन खाकीधारियों की सवारी आम बात हो गई है, अब भला इन्हें नियम बताने की हिम्मत कौन जुटाए? लेकिन, इन सबके बावजूद अपनी जिंदगी को सुरक्षित रखने के लिए वाहन चालक ही संजीदा नहीं हैं। हर आयु वर्ग के लोग बिना हेलमेट व सीट बेल्ट के वाहन चलाना अपना हक समझते हैं। सब कुछ देखते हुए पुलिस सख्ती के साथ वाहन चालकों को अनुशासन का पाठ नहीं पढ़ाती। हालांकि विभाग की एक टीम यातायात रैली, स्कूली बच्चों को यातायात नियम बताने, ग्रीन कार्ड बनाने जैसी रवायतें निभाकर लकीर जरूर पीट रही है।
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सड़क दुर्घटनाओं में हजारों लोग काल के गाल में समा जाते हैं। नियमों के पालन के लिए लोगों को सचेत करने के लिए शासन ने एक महीने यातायात माह का आयोजन किया। इस दौरान हेलमेट, सीट बेल्ट सहित यातायात से संबंधित विभिन्न नियमों से लोगों को अवगत कराया, साथ ही चेकिंग बढ़ाकर यातायात नियमों को तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इंसानी जिंदगी के साथ जुड़ा हुआ यह मामला बहुत गंभीर है लेकिन चालक व पुलिस दोनों इसके प्रति बेपरवाह है। खासकर इस माह में भी लोगों को नियमों की कोई परवाह नहीं है। परिवहन मंत्री के निर्देशों के बावजूद जनपद के सभी पंपों पर बिना हेलमेट पेट्रोल मिल रहा है। नेताओं के रसूख के आगे पुलिस व नियम बौने हैं। सड़कों पर दौड़ते चार पहिया वाहनों के आगे राजनीतिक दलों के लहराते परचम आसानी से देखे जा सकते हैं। सिर्फ यही नहीं अफसोसजनक यह है कि नियमों के अनुपालन करवाने की जिम्मेदारी उठाने वाले पुलिस कर्मी खुद इनका पालन नहीं कर रहे हैं। यातायात माह के दौरान सड़कों पर दुपहिया वाहनों से पुलिस कर्मी भी बिना हेलमेट के ही फर्राटा भरते नजर आ रहेहैं। दुपहिया वाहन पर तीन खाकीधारियों की सवारी आम बात हो गई है, अब भला इन्हें नियम बताने की हिम्मत कौन जुटाए? लेकिन, इन सबके बावजूद अपनी जिंदगी को सुरक्षित रखने के लिए वाहन चालक ही संजीदा नहीं हैं। हर आयु वर्ग के लोग बिना हेलमेट व सीट बेल्ट के वाहन चलाना अपना हक समझते हैं। सब कुछ देखते हुए पुलिस सख्ती के साथ वाहन चालकों को अनुशासन का पाठ नहीं पढ़ाती। हालांकि विभाग की एक टीम यातायात रैली, स्कूली बच्चों को यातायात नियम बताने, ग्रीन कार्ड बनाने जैसी रवायतें निभाकर लकीर जरूर पीट रही है।
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