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अफसरों का दल लेगा कई बांधों का जायजा
Lalitpur
Updated Tue, 13 Nov 2012 12:00 PM IST
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ललितपुर। बांध व नहरों में समय- समय पर आने वाली कमियों को दूर करने के लिए बहुत जल्द जनपद में पैक्ट की टीम आने वाली है। टीम के सदस्य रोहिणी, सजनम व जामनी बांध तथा उनसे निकली नहरों का निरीक्षण करेंगे। टीम के सदस्य इस दौरान विभागीय अफसरों से विभिन्न पहलुओं पर विचार- विमर्श भी करेंगे।
जनपद के किसानों को सिंचाई के लिए पानी मुहैया कराने में सिंचाई विभाग का बहुत बड़ा योगदान है। विभाग ने इस जनपद में सात बांधों का निर्माण करवाया है, जिनकी नहरों से हजारों एकड़ ऊसर भूमि पर रबी व खरीफ की फसल लहलहाती है। गोविंद सागर, जमानी, शहजाद, सजनाम, रोहिणी, राजघाट, माताटीला बांध काफी पुराने हो चुके हैं। पानी के संग बांध में आने वाली सिल्ट ने उनकी भंडारण क्षमता को प्रभावित किया है। उक्त बांधों से निकली नहरें भी बहुत पुरानी हो गई हैं। इन बांधों से निकली कई नहरें कच्ची होने कारण संचालन के दौरान फट जाती हैं। यही नहीं कई स्थानों पर ग्रामीण उसे काट देते हैं। इन हालातों में लाखों लीटर पानी की बरबादी हो जाती है। बांधों व नहरों की मरम्मत के लिए धन मुहैया नहीं कराए जाने के कारण उनकी देखरेख नहीं हो पाती। इन हालातों से मुखातिब होने के लिए आने वाले कुछ ही दिनों में वाटर रिस्टेक्चरिंग प्रोजेक्ट का एक दल जनपद आ रहा है। दल में मौजूद आला अधिकारी रोहिणी, सजनाम व जामनी बांध की स्थितियों का जायजा लेंगे। बांधों की जल भंडारण क्षमता उसमें आने वाले सिल्ट का अफसर अध्ययन करेंगे। मजबूती पर उनकी नजर रहेगी। इसके अलावा बांध की नहरों से होने वाली वास्तविक सिंचाई के क्षेत्रफल का भी पता लगाया जाएगा। इस दौरान ऐसे सुधार कार्यों पर विचार विमर्श होगा जिससे कम पानी से अधिक सिंचाई हो सके। दल के दौरे को लेकर जनपदस्तरीय अधिकारियों ने तैयारियां करनी शुरू कर दी हैं, उनका कहना है कि पैक्ट की टीम के दौरे से नहरों की दुर्दशा सुधर सकती है।
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जनपद के किसानों को सिंचाई के लिए पानी मुहैया कराने में सिंचाई विभाग का बहुत बड़ा योगदान है। विभाग ने इस जनपद में सात बांधों का निर्माण करवाया है, जिनकी नहरों से हजारों एकड़ ऊसर भूमि पर रबी व खरीफ की फसल लहलहाती है। गोविंद सागर, जमानी, शहजाद, सजनाम, रोहिणी, राजघाट, माताटीला बांध काफी पुराने हो चुके हैं। पानी के संग बांध में आने वाली सिल्ट ने उनकी भंडारण क्षमता को प्रभावित किया है। उक्त बांधों से निकली नहरें भी बहुत पुरानी हो गई हैं। इन बांधों से निकली कई नहरें कच्ची होने कारण संचालन के दौरान फट जाती हैं। यही नहीं कई स्थानों पर ग्रामीण उसे काट देते हैं। इन हालातों में लाखों लीटर पानी की बरबादी हो जाती है। बांधों व नहरों की मरम्मत के लिए धन मुहैया नहीं कराए जाने के कारण उनकी देखरेख नहीं हो पाती। इन हालातों से मुखातिब होने के लिए आने वाले कुछ ही दिनों में वाटर रिस्टेक्चरिंग प्रोजेक्ट का एक दल जनपद आ रहा है। दल में मौजूद आला अधिकारी रोहिणी, सजनाम व जामनी बांध की स्थितियों का जायजा लेंगे। बांधों की जल भंडारण क्षमता उसमें आने वाले सिल्ट का अफसर अध्ययन करेंगे। मजबूती पर उनकी नजर रहेगी। इसके अलावा बांध की नहरों से होने वाली वास्तविक सिंचाई के क्षेत्रफल का भी पता लगाया जाएगा। इस दौरान ऐसे सुधार कार्यों पर विचार विमर्श होगा जिससे कम पानी से अधिक सिंचाई हो सके। दल के दौरे को लेकर जनपदस्तरीय अधिकारियों ने तैयारियां करनी शुरू कर दी हैं, उनका कहना है कि पैक्ट की टीम के दौरे से नहरों की दुर्दशा सुधर सकती है।
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