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‘लक्ष्मीबाई का अदम्य साहस जीवन में उतारें’
Updated Sun, 18 Jun 2017 08:31 PM IST
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‘लक्ष्मीबाई का अदम्य साहस जीवन में उतारें’
ललितपुर। वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर बुंदेलखंड विकास सेना के कार्यकर्ताओं ने संकल्प दिवस के रूप में मनाया। इसमें संगठन के अध्यक्ष हरीश कुमार टीटू ने महारानी लक्ष्मीबाई की गौरव गाथाओं को सुनाकर उनसे प्रेरणा लेने का आह्वान किया। इस मौके पर लोगों से अपील की कि रानी लक्ष्मी बाई की देशभक्ति, अदम्य साहस, शौर्य को अपने जीवन में उतारें। इस अवसर पर वक्ताओं ने महिलाओं से अपील की कि रानी के प्रसंगों से सीख लेकर पृथक बुंदेलखंड की मांग में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। इससे पहले उपस्थित लोगों ने महारानी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की और संकल्प लिया कि बुंदेलखंड के प्रत्येक जिले में रानी की प्रतिमा स्थापित करवाई जाए और उनके बलिदान दिवस पर सरकार के स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इस मौके पर राजमल जैन, शिवप्रसाद, सुदेश नायक, भगवत दयाल वर्मा, ओमकार तोमर, नंदराम कुशवाहा, पंचम झा, देवीलाल, प्रदीप साहू मौजूद रहे।
इसी तरह बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से एक सभा आयोजित की गई। इसमें अतिथियों ने रानी लक्ष्मीबाई के साहस, शौर्य और पराक्रम को याद करते हुए उनको श्रद्धासुमन अर्पित किए। जिलाध्यक्ष विवेक तिवारी ने बताया कि झांसी की रानी ने बुंदेलखंड के नाम को विश्व के मानचित्र पटल पर स्वर्णाक्षरों में अंकित करवा दिया। बुंदेलखंड की नारी-शक्ति की प्रशंसा करते हुए तत्कालीन ब्रिटिश जनरल ह्यूरोज ने कहा था कि रानी लक्ष्मीबाई अपनी सुंदरता, चालाकी और दृढ़ता के लिए तो उल्लेखनीय थी ही, बल्कि विद्रोही नेताओं में सबसे ज्यादा खतरनाक भी थीं। 18 जून को ग्वालियर में झांसी और देश की रक्षा करते हुए उन्होंने अपने प्राण न्यौक्षावर कर दिए। इस मौके पर दिनेश गोस्वामी, नवनीत किलेदार, देश प्रेमशंकर गुप्ता, विशाल पटैरिया, कपिल तिवारी, मनोहर ताम्रकार, कृष्ण कुमार कटारे, राजू राजपूत, नीतेश पाठक, केपी कंचन मौजूद रहे।
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ललितपुर। वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर बुंदेलखंड विकास सेना के कार्यकर्ताओं ने संकल्प दिवस के रूप में मनाया। इसमें संगठन के अध्यक्ष हरीश कुमार टीटू ने महारानी लक्ष्मीबाई की गौरव गाथाओं को सुनाकर उनसे प्रेरणा लेने का आह्वान किया। इस मौके पर लोगों से अपील की कि रानी लक्ष्मी बाई की देशभक्ति, अदम्य साहस, शौर्य को अपने जीवन में उतारें। इस अवसर पर वक्ताओं ने महिलाओं से अपील की कि रानी के प्रसंगों से सीख लेकर पृथक बुंदेलखंड की मांग में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। इससे पहले उपस्थित लोगों ने महारानी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की और संकल्प लिया कि बुंदेलखंड के प्रत्येक जिले में रानी की प्रतिमा स्थापित करवाई जाए और उनके बलिदान दिवस पर सरकार के स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इस मौके पर राजमल जैन, शिवप्रसाद, सुदेश नायक, भगवत दयाल वर्मा, ओमकार तोमर, नंदराम कुशवाहा, पंचम झा, देवीलाल, प्रदीप साहू मौजूद रहे।
इसी तरह बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से एक सभा आयोजित की गई। इसमें अतिथियों ने रानी लक्ष्मीबाई के साहस, शौर्य और पराक्रम को याद करते हुए उनको श्रद्धासुमन अर्पित किए। जिलाध्यक्ष विवेक तिवारी ने बताया कि झांसी की रानी ने बुंदेलखंड के नाम को विश्व के मानचित्र पटल पर स्वर्णाक्षरों में अंकित करवा दिया। बुंदेलखंड की नारी-शक्ति की प्रशंसा करते हुए तत्कालीन ब्रिटिश जनरल ह्यूरोज ने कहा था कि रानी लक्ष्मीबाई अपनी सुंदरता, चालाकी और दृढ़ता के लिए तो उल्लेखनीय थी ही, बल्कि विद्रोही नेताओं में सबसे ज्यादा खतरनाक भी थीं। 18 जून को ग्वालियर में झांसी और देश की रक्षा करते हुए उन्होंने अपने प्राण न्यौक्षावर कर दिए। इस मौके पर दिनेश गोस्वामी, नवनीत किलेदार, देश प्रेमशंकर गुप्ता, विशाल पटैरिया, कपिल तिवारी, मनोहर ताम्रकार, कृष्ण कुमार कटारे, राजू राजपूत, नीतेश पाठक, केपी कंचन मौजूद रहे।
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