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9 बसों से भेजे गए मजदूर

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Thu, 30 Apr 2020 04:42 PM IST
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9 bus se bheje gaye majdoor
अमझराघाटी में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर फंसे मजदूरों को नौ बसों के माध्यम से उन्हें रवाना कर दिया गया। लेकिन, अभी भी एक सैकड़ा लोग फंसे हुए हैं। कोराना संकट ने पूरे देश को संकट में डाल दिया है। एक तरफ वायरस के संक्रमण के खतरे से लोग डरे सहमे हैं तो दूसरी तरफ बेवस और लाचार कामकाजी मजदूर हैं, जो लॉकडाउन के कारण एक दूसरे राज्य की सीमाएं सील होने की वजह से परदेश में फंसकर रह गए हैं। महानगरों से भूखे- प्यासे सैकडों मील की यात्रा पैदल चलकर आए यह मजदूर अब यूपी और एमपी बार्डर पर फंस गए। इन मजदूरों को भोजन व पानी की व्यवस्था बनाना दोनों राज्यों के प्रसाशन के लिए चुनौती से कम नहीं है। जो मदद उन तक पहुंच रही है, वह ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही है। बच्चों व महिलाओं का बुरा हाल है। वह अपने घर पंहुचने के लिए हर आने- जाने वाले से मदद मांग रहे हैं। बुधवार को अपर जिलाधिकारी अनिल कुमार मिश्र और अपर पुलिस अधीक्षक एके विजेता ने क्षेत्र का दौरा किया और यहां फंसे मजदूरों के लिए बसों की व्यवस्था की। देर शाम नौ बसों में से प्रत्येक बस में 32 लोगों को सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए बैठाया गया और 288 मजदूरों को यहां से रवाना कर दिया गया। इन लोगों को प्रदेश के अलग - अलग 32 जिलों में भेजा जाएगा। ------------------------ नेशनल हाइवे पर पैदल चल रहे मजदूर हैदराबाद से आए दस लोगों ने बताया कि फैक्टरी में काम करने गए थे। 22 दिन काम कर पाए और लाॅकङाऊन हो गया। इसके बाद एक माह इंतजार किया, लेकिन प्रशासन ने वहां से भगा दिया। जालौन जिले के बर्द गांव जाना है। धूप व गर्मी का मौसम है, ऐसे में बुरा हाल हो रहा है। क्योंकि आने जाने का साधन नहीं है। इसलिए पैदल चलना मजबूरी है। ----------------------- महावत समुदाय के लोग फंसे अमझरा घाटी यूपी और एमपी सीमा पर 45 लोग नरसिंहपुर मध्य प्रदेश से आये हुए हैं। लल्लू महावत ने बताया कि है कि पांच दिन मालथौन टोल प्लाजा पर रुके रहे। उसके बाद यहां आ गए। मनोज महावत ने बताया कि मथुरा से नगीना पत्थर लाकर अगूंठी बनाने का काम करते हैं और देश का भ्रमण करते हैं। जिला जालौन के मुरारखेरा गांव जाना है। --------------------
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