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सात वर्षो में पुस्तकालय में नहीं ले पाया मूर्तरूप
Updated Thu, 14 Sep 2017 03:27 AM IST
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सात साल बाद भी पुस्तकालय में किताबें नहीं
ललितपुर। शहर में मलिन बस्तियों की उपेक्षा हो रही है। इन इलाकों में कराए जा रहे विकास कार्यों की गति बेहद धीमी है। इस वजह से क्षेत्रवासियों को इनके लाभ से वंचित होना पड़ रहा है। इसका ताजा उदाहरण जेल चौराहे के पास बना पुस्तकालय है, जो सात वर्षों में मूर्तरूप नहीं ले सका है।
नगर पालिका परिषद ने मलिन बस्ती में रहने वाले परिवारों के ज्ञान अर्जन करने के मकसद से जेल चौराहे के पास करीब 21 लाख रुपये की लागत से पुस्तकालय भवन का निर्माण कराया गया है। इसमें अभी तक पुस्तकों की आपूर्ति नहीं की जा सकी है। वर्तमान में पुस्तकालय भवन खाली पड़ा है, केवल एक मेज पर डा. भीमराव अंबेडकर की फोटो व भगवान बुद्ध की प्रतिमा रखी हुई है। इसके अतिरिक्त भवन में लगी खिड़कियों के कांच पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इन हालात में भवन को साफ सुथरा रखना मुश्किल हो रहा है। उधर, नगर पालिका परिषद ने पुस्तकालय भवन को अपने हाल पर छोड़ दिया है। इस संबंध में विभागीय कर्मियों का कहना है कि इसी परिसर में काम कर रही समिति ने इस पुस्तकालय के संचालन की जिम्मेदारी ली थी। समिति पदाधिकारियों ने ही पाठकों को पुस्तकें उपलब्ध कराने की बात कही थी। लेकिन, उन्होंने कुछ इंतजाम किया नहीं है। जिससे यह स्थिति बन गई है।
पालिका के दो बोर्डों का कार्यकाल हो चुका पूर्ण
तत्कालीन पालिकाध्यक्ष रमेश खटीक के कार्यकाल में जेल चौराहे के पास स्थित खाली जमीन पर जिम बनाने की आधारशिला रखी गई थी। जिसके उपरांत भवन का निर्माण शुरू हो गया था। लेकिन, उस दौरान बसपा के कुछ नेताओं को यह बात रास नहीं आई और उन्होंने जिम की जगह पुस्तकालय बनाने का प्रस्ताव दे दिया। जिसे स्वीकार कर लिया गया। पालिकाध्यक्ष सुभाष जायसवाल ने अपने कार्यकाल में इस अधूरे भवन को पुस्तकालय के रूप में पूर्ण कराया। लेकिन, इसके बाद नवनिर्मित भवन में पुस्तकों की व्यवस्था नहीं हो सकी और उनका भी कार्यकाल पूरा हो गया। वर्तमान में पुस्तकालय भवन शोपीस बनकर रह गया है। क्षेत्रवासियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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शहर में पहले से चल रहे दो पुस्तकालय
शहर में नगर पालिका परिषद द्वारा राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन पुस्तकालय एवं प्रशासन की निगरानी में राजकीय जिला पुस्तकालय पहले से ही संचालित हो रहा है। यह तीसरा पुस्तकालय है जो अधूरा है।
पुस्तकालय पर काम कर रही सरकार
योगी सरकार ने दीनदयाल उपाध्याय के नाम से पुस्तकालय खोलने की घोषणा कर रखी है, जिसमें जिले में पुस्तकालय खुलवाए जाने हैं।
मामला है नीतिगत
जेल चौराहे के पास बने पुस्तकालय का मामला नीतिगत है। इसमें कोई जल्दबाजी में निर्णय नहीं लिया जा सकता है। हालांकि, क्या और हो सकता है, इन संभावनाओं पर विचार किया जाएगा।
अवनींद्र कुमार, अधिशासी अधिकारी
नगर पालिका परिषद ललितपुर।
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ललितपुर। शहर में मलिन बस्तियों की उपेक्षा हो रही है। इन इलाकों में कराए जा रहे विकास कार्यों की गति बेहद धीमी है। इस वजह से क्षेत्रवासियों को इनके लाभ से वंचित होना पड़ रहा है। इसका ताजा उदाहरण जेल चौराहे के पास बना पुस्तकालय है, जो सात वर्षों में मूर्तरूप नहीं ले सका है।
नगर पालिका परिषद ने मलिन बस्ती में रहने वाले परिवारों के ज्ञान अर्जन करने के मकसद से जेल चौराहे के पास करीब 21 लाख रुपये की लागत से पुस्तकालय भवन का निर्माण कराया गया है। इसमें अभी तक पुस्तकों की आपूर्ति नहीं की जा सकी है। वर्तमान में पुस्तकालय भवन खाली पड़ा है, केवल एक मेज पर डा. भीमराव अंबेडकर की फोटो व भगवान बुद्ध की प्रतिमा रखी हुई है। इसके अतिरिक्त भवन में लगी खिड़कियों के कांच पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इन हालात में भवन को साफ सुथरा रखना मुश्किल हो रहा है। उधर, नगर पालिका परिषद ने पुस्तकालय भवन को अपने हाल पर छोड़ दिया है। इस संबंध में विभागीय कर्मियों का कहना है कि इसी परिसर में काम कर रही समिति ने इस पुस्तकालय के संचालन की जिम्मेदारी ली थी। समिति पदाधिकारियों ने ही पाठकों को पुस्तकें उपलब्ध कराने की बात कही थी। लेकिन, उन्होंने कुछ इंतजाम किया नहीं है। जिससे यह स्थिति बन गई है।
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पालिका के दो बोर्डों का कार्यकाल हो चुका पूर्ण
तत्कालीन पालिकाध्यक्ष रमेश खटीक के कार्यकाल में जेल चौराहे के पास स्थित खाली जमीन पर जिम बनाने की आधारशिला रखी गई थी। जिसके उपरांत भवन का निर्माण शुरू हो गया था। लेकिन, उस दौरान बसपा के कुछ नेताओं को यह बात रास नहीं आई और उन्होंने जिम की जगह पुस्तकालय बनाने का प्रस्ताव दे दिया। जिसे स्वीकार कर लिया गया। पालिकाध्यक्ष सुभाष जायसवाल ने अपने कार्यकाल में इस अधूरे भवन को पुस्तकालय के रूप में पूर्ण कराया। लेकिन, इसके बाद नवनिर्मित भवन में पुस्तकों की व्यवस्था नहीं हो सकी और उनका भी कार्यकाल पूरा हो गया। वर्तमान में पुस्तकालय भवन शोपीस बनकर रह गया है। क्षेत्रवासियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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शहर में पहले से चल रहे दो पुस्तकालय
शहर में नगर पालिका परिषद द्वारा राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन पुस्तकालय एवं प्रशासन की निगरानी में राजकीय जिला पुस्तकालय पहले से ही संचालित हो रहा है। यह तीसरा पुस्तकालय है जो अधूरा है।
पुस्तकालय पर काम कर रही सरकार
योगी सरकार ने दीनदयाल उपाध्याय के नाम से पुस्तकालय खोलने की घोषणा कर रखी है, जिसमें जिले में पुस्तकालय खुलवाए जाने हैं।
मामला है नीतिगत
जेल चौराहे के पास बने पुस्तकालय का मामला नीतिगत है। इसमें कोई जल्दबाजी में निर्णय नहीं लिया जा सकता है। हालांकि, क्या और हो सकता है, इन संभावनाओं पर विचार किया जाएगा।
अवनींद्र कुमार, अधिशासी अधिकारी
नगर पालिका परिषद ललितपुर।