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समस्या: पाली

Fri, 31 Aug 2018 02:28 AM IST
Updated Fri, 31 Aug 2018 02:28 AM IST
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समस्या: पाली
पाली का भुजरया तालाब अब भी खाली
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पाली। कस्बे में आबादी क्षेत्र से लगा भुजरया तालाब है। जिसका क्षेत्रफल लगभग तीस एकड़ में फैला हुआ है। अब तक बारिश इतनी हुई कि मात्र दो से तीन एकड़ के क्षेत्र में ही पानी का मामूली भराव देखने को मिल रहा है।
देर से मानसून आने एवं कम बारिश के चलते इसमें खरीफ की खड़ी फसल सूखने की कगार है। अगर बारिश हुई भी तो पाली का यह भुजरया तालाब अपने आंचल में बारिश के पानी को पूरी तरह नहीं समेट पाएगा। वजह इसके मुहाने पर जो चेकडैम बना है, वह पहले से क्षतिग्रस्त है। बारिश का इसमें पानी तो आएगा लेकिन तालाब में संचय न होकर यहां से आगे की राह पकड़ लेगा। जब तालाब अपनी लौ में होता था तो इससे किसान रबी सीजन में सिंचाई करते थे। कुछ ऐसा ही हाल राजगढ़ नागौरी तालाब का है । जिसका भी एक मुहाना क्षतिग्रस्त बना है । नीलकंठेश्वर मार्ग पर बना तालाब जिसे स्थानीय भाषा में फुट्टा तालाब कहा जाता है । इसके नाम के अनरूप इसकी किस्मत भी हमेशा फूटी नजर आती है। जलस्तर अपनी ऊंचाई लेना भी चाहता तो नहीं ले पाता क्योंकि सड़क के पास इसकी भी बंध कटी पड़ी है ।
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बारिश आने से पहले तालाबों के जीर्णोद्धार को लेकर बड़े दावे किए जा रहे थे । वो तो पाली से बादल दगाबाजी करते नजर आए अन्यथा बारिश होने के बाद भी तालाब खाली ही रहते । अब भादों माह से बड़ी उम्मीद है , अच्छी बारिश हो गयी तो किसानों के साथ लोगों के चेहरे भी खिल जाएंगे । ऐसे में इन तालाबों की थोड़ी बहुत मरम्मत ही जाए तो तालाब में पानी नजर आने लगेगा । तालाबों में पानी होगा तो कस्बे के जलस्तर का पैमाना भी ऊंचा होगा ।
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संकेतांक से तीस फीट नीचे चंद्रबावड़ी
पाली। कस्बे में बारिश का कितना पैमाना है इसका अंदाजा यहां के लोग एक प्राचीन बावड़ी से लगाते हैं । कस्बे के बार्ड सात में हजारिया महादेव मंदिर के पास प्राचीन चंद्रबावड़ी है , जो तैराकी के लिए भी लोगों की पहली पसंद हुआ करती है। बावड़ी में दो संकेतांक छोटी अलमारी है। जिनकी ऊंचाई तक पानी आ जाये तो लोग जान जाते की जलस्तर का पैमाना बिल्कुल ठीक है। लेकिन अभी इसका जलस्तर अलमारी से तीस से पैंतीस फीट नीचे बना है।
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