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तीन दिन पूर्व सीएमओ को सौंपी जांच रिपोर्ट, कार्रवाई का इंतजार
Updated Mon, 25 Sep 2017 12:55 AM IST
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तीन दिन पूर्व सीएमओ को सौंपी जांच रिपोर्ट, कार्रवाई का इंतजार
ललितपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बार में स्टाफ नर्सों व अन्य स्टाफ के बीच चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। नर्सों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर चिकित्सकों व कर्मियों ने अस्पताल में तालाबंदी करने की चेतावनी दी है, तो वहीं नर्सों की संविदा समाप्ति कराने की मांग को लेकर मंगलवार को होने वाली जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में बोर्ड के समक्ष प्रस्ताव रखने की तैयारी चल रही है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बार में चिकित्सकों से लेकर पूरा स्टाफ एक जुट हो गया है। स्वास्थ्य केंद्र का माहौल बिगाड़ रही व मरीजों से अवैध वसूली कर रही संविदा पर तैनात दो महिला स्टाफ नर्स की संविदा समाप्ति व एक एएनएम को हटाने की मांग पर अड़े हुए हैं। पूर्व में हुई घटना की जांच को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. प्रताप सिंह ने तीन वरिष्ठ अधिकारियों की जांच कमेटी गठित की थी। जांच टीम ने मामले की जांच करके अपनी रिपोर्ट तैयार करके बीते शुक्रवार को सीएमओ के लिए सौंप दी है। जांच रिपोर्ट सौंपे हुए तीन दिन बीत गए हैं, लेकिन अभी तक सीएमओ के द्वारा इस मामले में नर्स के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। गौरतलब है कि गत दिवस सीएमओ ने जांच रिपोर्ट आने का इंतजार किए बगैर ही चिकित्सा अधीक्षक डा. ध्रुव कुमार का स्थानांतरण महरौनी कर दिया था, लेकिन जांच रिपोर्ट आने के बाद भी नर्सों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है, इससे कर्मियों व चिकित्सकों में दोबारा आक्रोश पनपने लगा है। हाल ही में चिकित्सकों व कर्मियों को मौखिक रूप से चेतवानी दी है कि यदि नर्स के खिलाफ तत्कालीन प्रभाव के कार्रवाई नहीं की गई तो वह दो बार से अस्पताल में तालाबंदी करने को मजबूर होंगे। गौरतलब है कि विगत 11 सितंबर को विपक्षियों द्वारा अस्पताल में किए गए उपद्रव व मारपीट की घटना और अधीक्षक के स्थानांतरण के विरोध में समस्त चिकित्सक सामूहिक अवकाश लेकर बैठ गए थे और अस्पताल में तालाबंदी कर दी थी। वहीं चिकित्सा अधिकारियों द्वारा दोनों नर्सों की संविदा समाप्त कराने और एएनएम को हटाने के लिए प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है, यह प्रस्ताव मंगलवार को होने वाली जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में जिलाधिकारी के समक्ष रखा जाएगा।
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स्टाफ नर्स द्वारा फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने का है मामला
यह पूरा मामला स्वास्थ्य केंद्र में तैनात महिला स्टाफ नर्स आशा गौतम के द्वारा बनाए गये फर्जी जन्म प्रमाण पत्र का है। स्टाफ नर्स ने विगत रोज एक ग्रामीण के दो पुत्रों का फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बना दिया था। यह मामला उजागर होने के बाद चिकित्सा अधीक्षक ने नर्स से स्पष्टीकरण तलब किया था, इसके बाद अभद्रता व मारपीट की घटना को अंजाम दिया गया। जांच अधिकारियों ने इस फर्जी जन्म प्रमाणपत्र मामले में नर्स को दोषी भी पाया है, अब केवल मुख्य चिकित्सा अधिकारी के ऊपर मामला अटका हुआ है। वह इस बार कोई कार्रवाई करते हैं या फिर पूर्व की भांति जांच रिपोर्ट ठंडे बस्ते में चली जाती है।
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जांच तो होती है पर कार्रवाई नहीं
केवल यह फर्जी जन्म प्रमाण पत्र वाला ही मामला नहीं है, इससे पूर्व इसी महिला नर्स के खिलाफ विगत वर्ष अगस्त के ही माह में जांच कमेटी गठित की गई थी। यह नर्स घरों पर होने वाले प्रसव को स्वास्थ्य केंद्र पर होना दर्शाकर वित्तीय अनियमितता करती थी। इस मामले में भी जांच कमेटी ने नर्स को दोषी पाया था, लेकिन अभी तक सीएमओ के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है। विगत माह केंद्र पर एक महिला की प्रसव के दौरान मौत हो गई थी। इस मामले में स्टाफ नर्स चंद्रकला पर लापरवाही के आरोप लगे थे। इस मामले में भी सीएमओ के द्वारा जांच कराई गई थी। इसमें जांच टीम द्वारा एक माह पूर्व 21 अगस्त को सीएमओ को रिपोर्ट सौंप दी है और इस मामले में नर्स की लापरवाही सामने आई थी, लेकिन अभी तक इस मामले में भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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जरूर होगी कार्रवाई
जांच रिपोर्ट आने के बाद भी कुछ बिंदु स्पष्ट नहीं हो पाते हैं, इस कारण कार्रवाई में देरी हो जाती है। आरोपी के खिलाफ कार्रवाई जरूर की जाएगी। पूर्व में हुए मामलों को भी इस मामले के साथ जोड़ा जा रहा है। यदि नर्स आरोपी है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-डा.प्रताप सिंह
मुख्य चिकित्साधिकारी, ललितपुर।
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ललितपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बार में स्टाफ नर्सों व अन्य स्टाफ के बीच चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। नर्सों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर चिकित्सकों व कर्मियों ने अस्पताल में तालाबंदी करने की चेतावनी दी है, तो वहीं नर्सों की संविदा समाप्ति कराने की मांग को लेकर मंगलवार को होने वाली जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में बोर्ड के समक्ष प्रस्ताव रखने की तैयारी चल रही है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बार में चिकित्सकों से लेकर पूरा स्टाफ एक जुट हो गया है। स्वास्थ्य केंद्र का माहौल बिगाड़ रही व मरीजों से अवैध वसूली कर रही संविदा पर तैनात दो महिला स्टाफ नर्स की संविदा समाप्ति व एक एएनएम को हटाने की मांग पर अड़े हुए हैं। पूर्व में हुई घटना की जांच को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. प्रताप सिंह ने तीन वरिष्ठ अधिकारियों की जांच कमेटी गठित की थी। जांच टीम ने मामले की जांच करके अपनी रिपोर्ट तैयार करके बीते शुक्रवार को सीएमओ के लिए सौंप दी है। जांच रिपोर्ट सौंपे हुए तीन दिन बीत गए हैं, लेकिन अभी तक सीएमओ के द्वारा इस मामले में नर्स के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। गौरतलब है कि गत दिवस सीएमओ ने जांच रिपोर्ट आने का इंतजार किए बगैर ही चिकित्सा अधीक्षक डा. ध्रुव कुमार का स्थानांतरण महरौनी कर दिया था, लेकिन जांच रिपोर्ट आने के बाद भी नर्सों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है, इससे कर्मियों व चिकित्सकों में दोबारा आक्रोश पनपने लगा है। हाल ही में चिकित्सकों व कर्मियों को मौखिक रूप से चेतवानी दी है कि यदि नर्स के खिलाफ तत्कालीन प्रभाव के कार्रवाई नहीं की गई तो वह दो बार से अस्पताल में तालाबंदी करने को मजबूर होंगे। गौरतलब है कि विगत 11 सितंबर को विपक्षियों द्वारा अस्पताल में किए गए उपद्रव व मारपीट की घटना और अधीक्षक के स्थानांतरण के विरोध में समस्त चिकित्सक सामूहिक अवकाश लेकर बैठ गए थे और अस्पताल में तालाबंदी कर दी थी। वहीं चिकित्सा अधिकारियों द्वारा दोनों नर्सों की संविदा समाप्त कराने और एएनएम को हटाने के लिए प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है, यह प्रस्ताव मंगलवार को होने वाली जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में जिलाधिकारी के समक्ष रखा जाएगा।
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स्टाफ नर्स द्वारा फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने का है मामला
यह पूरा मामला स्वास्थ्य केंद्र में तैनात महिला स्टाफ नर्स आशा गौतम के द्वारा बनाए गये फर्जी जन्म प्रमाण पत्र का है। स्टाफ नर्स ने विगत रोज एक ग्रामीण के दो पुत्रों का फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बना दिया था। यह मामला उजागर होने के बाद चिकित्सा अधीक्षक ने नर्स से स्पष्टीकरण तलब किया था, इसके बाद अभद्रता व मारपीट की घटना को अंजाम दिया गया। जांच अधिकारियों ने इस फर्जी जन्म प्रमाणपत्र मामले में नर्स को दोषी भी पाया है, अब केवल मुख्य चिकित्सा अधिकारी के ऊपर मामला अटका हुआ है। वह इस बार कोई कार्रवाई करते हैं या फिर पूर्व की भांति जांच रिपोर्ट ठंडे बस्ते में चली जाती है।
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जांच तो होती है पर कार्रवाई नहीं
केवल यह फर्जी जन्म प्रमाण पत्र वाला ही मामला नहीं है, इससे पूर्व इसी महिला नर्स के खिलाफ विगत वर्ष अगस्त के ही माह में जांच कमेटी गठित की गई थी। यह नर्स घरों पर होने वाले प्रसव को स्वास्थ्य केंद्र पर होना दर्शाकर वित्तीय अनियमितता करती थी। इस मामले में भी जांच कमेटी ने नर्स को दोषी पाया था, लेकिन अभी तक सीएमओ के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है। विगत माह केंद्र पर एक महिला की प्रसव के दौरान मौत हो गई थी। इस मामले में स्टाफ नर्स चंद्रकला पर लापरवाही के आरोप लगे थे। इस मामले में भी सीएमओ के द्वारा जांच कराई गई थी। इसमें जांच टीम द्वारा एक माह पूर्व 21 अगस्त को सीएमओ को रिपोर्ट सौंप दी है और इस मामले में नर्स की लापरवाही सामने आई थी, लेकिन अभी तक इस मामले में भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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जरूर होगी कार्रवाई
जांच रिपोर्ट आने के बाद भी कुछ बिंदु स्पष्ट नहीं हो पाते हैं, इस कारण कार्रवाई में देरी हो जाती है। आरोपी के खिलाफ कार्रवाई जरूर की जाएगी। पूर्व में हुए मामलों को भी इस मामले के साथ जोड़ा जा रहा है। यदि नर्स आरोपी है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-डा.प्रताप सिंह
मुख्य चिकित्साधिकारी, ललितपुर।