{"_id":"5a64eb5d4f1c1b84268b5a7d","slug":"51516563293-lalitpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बदहाल अवस्था में है सीएमओ कार्यालय परिसर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बदहाल अवस्था में है सीएमओ कार्यालय परिसर
Updated Mon, 22 Jan 2018 01:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बदहाल अवस्था में है सीएमओ कार्यालय परिसर
ललितपुर।
स्वच्छता का संदेश देने वाले चिकित्सा विभाग का कार्यालय परिसर ही गंदा है। देखरेख के अभाव में जहां कुंआ क्षतिग्रस्त हो गया है। वहीं परिसर में नाली का गंदा पानी यहां वहां फैल रहा है। इतना ही नहीं पुराने भवन की दीवारों पर घास जम आई है।
स्वस्थ शरीर के लिए स्वच्छता जरूरी है। इस तरह के संदेश स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व कर्मचारी जनता के बीच लेकर पहुंचते हैं। लेकिन जिस कार्यालय में जिम्मेदार अधिकारी बैठते हैं। उन्हीं का परिसर गंदा है। सीएमओ कार्यालय परिसर में बने कुआं से पूर्व में अस्पताल के लिए पानी की सप्लाई की जाती थी। इसकी देखरेख न होने से कुआं की स्थिति काफी खराब हो गई है। कुआं वर्तमान में शराब की खाली बोतलें फेंकने का अड्डा बन गया है। कुआं के पास में ही दवाईयों की सीसी जलाई गई हैं। कुआं में गंदगी व कचरा भी फेंका जा रहा है, जिससे कुआं पानी किसी भी उपयोग के लायक नहीं रहा है। कुआं की देखरेख न होने के कारण क्षतिग्रस्त हो गया है। लेकिन ऐसी ऐसी स्थिति होने पर भी एक मोटर से पानी निकाला जा रहा है। जिस पर सीएमओ ने बताया कि इस मोटर के पानी का उपयोग सीसी रोड के निर्माण में किया जा रहा है। परिसर की पुरानी बिल्डिंग की देखरेख के अभाव में इसकी साफ-सफाई न होने के कारण घास जम आई है। इसकी सफाई नहीं की जा रही है, जिसके कारण ही पुरानी बिल्डिंग की छतों के व दीवारों के ऊपर घास जम गया है। गेट नंबर दो आम लोगों व परिसर के कर्मचारियों के लिए प्रसाधन का अड्डा बन गया है। गेट के पास ही परिसर की नाली निकली है। जो सफाई न होने के कारण नालियों में कचरा जम गया है। इसके कारण नालियां बजबजा रहीं है। पानी नहीं निकल पा रहा है। जिसके कारण नालियों का गंदा पानी परिसर में फैल रहा है। परिसर के मूत्रालयों की भी सफाई नहीं है। मूत्रालय में भारी गंदगी व्याप्त है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के ठीक सामने ही कचरे का ढ़ेर लगा है। जो कार्यालय परिसर के ठीक बगल में ही है। जहां से दिन भर कार्यालय के अधिकारियों व कर्मचारियों का आना जाना होता है। लेकिन मुख्य द्वार के पास में पड़े कचरे पर किसी अधिकारी व कर्मचारियों की नजर नहीं गई है। जिससे लगता है कि परिसर अधिकारियों को सफाई से कोई मतलब नहीं है। कार्यालय में आकर अपने कार्यों से ही वास्ता रखते हैं। परिसर की सफाई व्यवस्था पर नजर नहीं रखने से परिसर गंदगी का अंबार बन गया है। साथ ही स्वच्छ भारत मिशन केवल एक सपना साबित हो रहा है।
कुछ दवाइयों की सीसी ( बोतलें ) व शराब की बोतलें फेंक रहे हैं। जिसका पता लगाकर कार्रवाई की जाएगी। कुएं की सफाई कराकर ढकवा देंगे या वायरिंग करवा देंगे। सफाई के लिए नगर पालिका को लिखा जाएगा और बिल्डिंग की पुताई कराई जाएगी।
विज्ञापन
- डॉ. प्रताप सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी
विज्ञापन
ललितपुर।
स्वच्छता का संदेश देने वाले चिकित्सा विभाग का कार्यालय परिसर ही गंदा है। देखरेख के अभाव में जहां कुंआ क्षतिग्रस्त हो गया है। वहीं परिसर में नाली का गंदा पानी यहां वहां फैल रहा है। इतना ही नहीं पुराने भवन की दीवारों पर घास जम आई है।
स्वस्थ शरीर के लिए स्वच्छता जरूरी है। इस तरह के संदेश स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व कर्मचारी जनता के बीच लेकर पहुंचते हैं। लेकिन जिस कार्यालय में जिम्मेदार अधिकारी बैठते हैं। उन्हीं का परिसर गंदा है। सीएमओ कार्यालय परिसर में बने कुआं से पूर्व में अस्पताल के लिए पानी की सप्लाई की जाती थी। इसकी देखरेख न होने से कुआं की स्थिति काफी खराब हो गई है। कुआं वर्तमान में शराब की खाली बोतलें फेंकने का अड्डा बन गया है। कुआं के पास में ही दवाईयों की सीसी जलाई गई हैं। कुआं में गंदगी व कचरा भी फेंका जा रहा है, जिससे कुआं पानी किसी भी उपयोग के लायक नहीं रहा है। कुआं की देखरेख न होने के कारण क्षतिग्रस्त हो गया है। लेकिन ऐसी ऐसी स्थिति होने पर भी एक मोटर से पानी निकाला जा रहा है। जिस पर सीएमओ ने बताया कि इस मोटर के पानी का उपयोग सीसी रोड के निर्माण में किया जा रहा है। परिसर की पुरानी बिल्डिंग की देखरेख के अभाव में इसकी साफ-सफाई न होने के कारण घास जम आई है। इसकी सफाई नहीं की जा रही है, जिसके कारण ही पुरानी बिल्डिंग की छतों के व दीवारों के ऊपर घास जम गया है। गेट नंबर दो आम लोगों व परिसर के कर्मचारियों के लिए प्रसाधन का अड्डा बन गया है। गेट के पास ही परिसर की नाली निकली है। जो सफाई न होने के कारण नालियों में कचरा जम गया है। इसके कारण नालियां बजबजा रहीं है। पानी नहीं निकल पा रहा है। जिसके कारण नालियों का गंदा पानी परिसर में फैल रहा है। परिसर के मूत्रालयों की भी सफाई नहीं है। मूत्रालय में भारी गंदगी व्याप्त है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के ठीक सामने ही कचरे का ढ़ेर लगा है। जो कार्यालय परिसर के ठीक बगल में ही है। जहां से दिन भर कार्यालय के अधिकारियों व कर्मचारियों का आना जाना होता है। लेकिन मुख्य द्वार के पास में पड़े कचरे पर किसी अधिकारी व कर्मचारियों की नजर नहीं गई है। जिससे लगता है कि परिसर अधिकारियों को सफाई से कोई मतलब नहीं है। कार्यालय में आकर अपने कार्यों से ही वास्ता रखते हैं। परिसर की सफाई व्यवस्था पर नजर नहीं रखने से परिसर गंदगी का अंबार बन गया है। साथ ही स्वच्छ भारत मिशन केवल एक सपना साबित हो रहा है।
विज्ञापन
कुछ दवाइयों की सीसी ( बोतलें ) व शराब की बोतलें फेंक रहे हैं। जिसका पता लगाकर कार्रवाई की जाएगी। कुएं की सफाई कराकर ढकवा देंगे या वायरिंग करवा देंगे। सफाई के लिए नगर पालिका को लिखा जाएगा और बिल्डिंग की पुताई कराई जाएगी।
विज्ञापन
- डॉ. प्रताप सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी