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किसानों की खबर
Updated Wed, 19 Jul 2017 02:06 AM IST
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आषाढ़ ने किया निराश, सावन से बंधी आस
ललितपुर।
एक सप्ताह में हुई अच्छी बारिश ने किसानों के चेहरे पर खुशियां बिखेर दी हैं। कृषि विभाग भी हाल ही में हुई बारिश को फसलों के हित में मान रहा है। हालांकि, पिछले साल के मुकाबले पानी इस बार अब तक आधा ही बरसा है।
जिले में पिछले चार साल से किसान प्राकृतिक आपदाओं से ग्रस्त हैं। इस साल उन्हें अच्छी बारिश होने से पैदावार होने की उम्मीद थी, लेकिन जुलाई तक खेती के मुताबिक बारिश न होने से किसानों की चिंताएं बढ़ गई थीं। लेकिन, एक हफ्ते के दौरान हुई अच्छी बारिश ने किसानों के चेहरे पर खुशी ला दी है। बारिश न होने से किसानों की बुवाई भी पिछड़ गई थी। सामान्यत: किसान रबी की फसल में दलहन की फसल बोने के लिए जून महीने में ही बुआई शुरू कर देते हैं। इसके लिए उन्होंने फसल बोनी शुरू भी कर दी थी। जुलाई तक बारिश न होने और तापमान अधिक होने से खरीफ में उर्द की फसल सूखने की कगार पर आ गई थी। जुलाई के मध्य में हुई अच्छी बारिश ने फिर से फसलों को जीवित कर दिया है। कृषि अधिकारियों की मानें तो अभी हाल ही के एक महीने में बरसा पानी किसानों के लिए अमृत बनकर आया है। इससे खेतों में नमी के साथ-साथ पैदावार भी अच्छी होने के आसार हैं। बुआई पिछड़ने के संबंध में कृषि विज्ञान केंद्र के सह निदेशक डा. एकेएस चौहान ने बताया कि खरीफ की फसल के लिए बुआई का समय 10 जुलाई से 25 जुलाई तक का समय होता है। क्योंकि, खरीफ की फसल को पकने के लिए 75 दिनों का समय लगता है। जुलाई के अंतिम सप्ताह तक भी फसल बोने से अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में फसल तैयार हो सकती है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि पानी न मिलने से सूख चुकी फसल यदि 50 प्रतिशत भी जीवित है तो उसके लिए तीन प्रतिशत यूरिया का घोल मिलाकर फिर से बचाया जा सकता है।
पिछले साल के मुकाबले अभी तक आधी बारिश
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले साल 18 जुलाई के मुकाबले आधी ही बारिश हुई है। पिछले साल 18 जुलाई तक 422.57 मिलीमीटर बारिश हुई थी। जबकि इस साल यह मात्र 235.01 मिलीमीटर ही हुई है। इसके अलावा जिले में पिछले साल मानसून के मौसम कुल 799.09 मिलीमीटर बारिश ही हुई है।
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फोटो- 04
अब मिली राहत
बुआई तो जून के महीने में ही हो चुकी थी। 10 जुलाई तक अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसल की चिंता होने लगी थी। एक हफ्ते से हो रही अच्छी बारिश ने खेतों में रौनक ला दी है।
धनीराम, बम्हौरीकलां गांव
फोटो- 06
सूख रही थी फसल
बारिश न होने से किसानों की फसलें सूखने लगी थीं, इससे चिंता गहराने लगी थी। सावन के महीने में बरसा पानी किसानों के लिए अमृत साबित हो रहा है। उम्मीद है कि बारिश अच्छी होगी।
ओमप्रकाश तिवारी, कुआघोषी
फोटो- 05
पानी न बरसने से बुवाई तो पिछड़ गई है, लेकिन पानी बरसने से फिर से बुआई हो जाएगी। जिनकी फसल सूख चुकी थी वह फिर से बुआई कर रहे हैं। उम्मीद है कि अच्छी बारिश और पैदावार होगी।
राजपाल यादव, तालबेहट
फोटो- 07
कीटनाशकों की बढ़ाई मांग
बारिश ने जहां एक ओर किसानों को फायदा पहुंचाया है, वहीं, रोग लगने का खतरा भी बढ़ा दिया है। इसके लिए कीटनाशक दवाओं की मांग बढ़ गई है। फसल को बारिश ने जीवित कर दिया है।
जगदीश पुरोहित, सिलावन
पानी बरसने के बाद फसल में रोग तेजी से फैलते हैं। इससे बचने के लिए किसान कीटनाशक दवाओं का इस्तेमाल कर फसलों को बचा सकते हैं। हाल ही के दिनों में हुई बारिश किसानों के लिए फायदेमंद है और जिन लोगों ने बुआई नहीं की है वह बुआई भी कर सकते हैं।
बृजेश कुमार, जिला कृषि अधिकारी
ललितपुर।
एक सप्ताह में हुई अच्छी बारिश ने किसानों के चेहरे पर खुशियां बिखेर दी हैं। कृषि विभाग भी हाल ही में हुई बारिश को फसलों के हित में मान रहा है। हालांकि, पिछले साल के मुकाबले पानी इस बार अब तक आधा ही बरसा है।
जिले में पिछले चार साल से किसान प्राकृतिक आपदाओं से ग्रस्त हैं। इस साल उन्हें अच्छी बारिश होने से पैदावार होने की उम्मीद थी, लेकिन जुलाई तक खेती के मुताबिक बारिश न होने से किसानों की चिंताएं बढ़ गई थीं। लेकिन, एक हफ्ते के दौरान हुई अच्छी बारिश ने किसानों के चेहरे पर खुशी ला दी है। बारिश न होने से किसानों की बुवाई भी पिछड़ गई थी। सामान्यत: किसान रबी की फसल में दलहन की फसल बोने के लिए जून महीने में ही बुआई शुरू कर देते हैं। इसके लिए उन्होंने फसल बोनी शुरू भी कर दी थी। जुलाई तक बारिश न होने और तापमान अधिक होने से खरीफ में उर्द की फसल सूखने की कगार पर आ गई थी। जुलाई के मध्य में हुई अच्छी बारिश ने फिर से फसलों को जीवित कर दिया है। कृषि अधिकारियों की मानें तो अभी हाल ही के एक महीने में बरसा पानी किसानों के लिए अमृत बनकर आया है। इससे खेतों में नमी के साथ-साथ पैदावार भी अच्छी होने के आसार हैं। बुआई पिछड़ने के संबंध में कृषि विज्ञान केंद्र के सह निदेशक डा. एकेएस चौहान ने बताया कि खरीफ की फसल के लिए बुआई का समय 10 जुलाई से 25 जुलाई तक का समय होता है। क्योंकि, खरीफ की फसल को पकने के लिए 75 दिनों का समय लगता है। जुलाई के अंतिम सप्ताह तक भी फसल बोने से अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में फसल तैयार हो सकती है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि पानी न मिलने से सूख चुकी फसल यदि 50 प्रतिशत भी जीवित है तो उसके लिए तीन प्रतिशत यूरिया का घोल मिलाकर फिर से बचाया जा सकता है।
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पिछले साल के मुकाबले अभी तक आधी बारिश
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले साल 18 जुलाई के मुकाबले आधी ही बारिश हुई है। पिछले साल 18 जुलाई तक 422.57 मिलीमीटर बारिश हुई थी। जबकि इस साल यह मात्र 235.01 मिलीमीटर ही हुई है। इसके अलावा जिले में पिछले साल मानसून के मौसम कुल 799.09 मिलीमीटर बारिश ही हुई है।
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अब मिली राहत
बुआई तो जून के महीने में ही हो चुकी थी। 10 जुलाई तक अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसल की चिंता होने लगी थी। एक हफ्ते से हो रही अच्छी बारिश ने खेतों में रौनक ला दी है।
धनीराम, बम्हौरीकलां गांव
फोटो- 06
सूख रही थी फसल
बारिश न होने से किसानों की फसलें सूखने लगी थीं, इससे चिंता गहराने लगी थी। सावन के महीने में बरसा पानी किसानों के लिए अमृत साबित हो रहा है। उम्मीद है कि बारिश अच्छी होगी।
ओमप्रकाश तिवारी, कुआघोषी
फोटो- 05
पानी न बरसने से बुवाई तो पिछड़ गई है, लेकिन पानी बरसने से फिर से बुआई हो जाएगी। जिनकी फसल सूख चुकी थी वह फिर से बुआई कर रहे हैं। उम्मीद है कि अच्छी बारिश और पैदावार होगी।
राजपाल यादव, तालबेहट
फोटो- 07
कीटनाशकों की बढ़ाई मांग
बारिश ने जहां एक ओर किसानों को फायदा पहुंचाया है, वहीं, रोग लगने का खतरा भी बढ़ा दिया है। इसके लिए कीटनाशक दवाओं की मांग बढ़ गई है। फसल को बारिश ने जीवित कर दिया है।
जगदीश पुरोहित, सिलावन
पानी बरसने के बाद फसल में रोग तेजी से फैलते हैं। इससे बचने के लिए किसान कीटनाशक दवाओं का इस्तेमाल कर फसलों को बचा सकते हैं। हाल ही के दिनों में हुई बारिश किसानों के लिए फायदेमंद है और जिन लोगों ने बुआई नहीं की है वह बुआई भी कर सकते हैं।
बृजेश कुमार, जिला कृषि अधिकारी