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आठ रोडवेज बसों से बिहार भेजे गए तीन सौ प्रवासी मजदूर
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अमरपुर मंडी में भोजन करते प्रवासी मजदूर
- फोटो : LALITPUR
ललितपुर। प्रवासियों के आने का सिलसिला अभी बंद नहीं हुआ है। सोमवार को तीन सौ प्रवासी मजदूरों को थर्मल स्क्रीनिंग के बाद आठ रोडवेज बसों से बिहार के लिए भेजा गया।
कोरोना महामारी को रोकने के लिए लॉकडाउन के 69 दिन बाद भी प्रवासी मजदूरों के आने का सिलसिला थम नहीं रहा है। लॉकडाउन से जहां व्यापार, उद्योग धंधे पूरी तरह से ठप कर दिए हैं, वहीं निर्धन तबके के मजदूरों की रोजी रोटी भी छिन गई है। शुरुआत में लोग लॉकडाउन के खुलने का इंतजार करते रहे, लेकिन लॉकडाउन लगातार बढ़ता रहा। इससे परेशान लोगों ने अपने घरों पर ही पहुंचना बेहतर समझा।
इसी के चलते लोग अपने घरो की ओर चल पड़े। यातायात सेवाएं ठप होने से लोग पैदल व अन्य वाहनों का सहारा लेकर निकल पड़े। रविवार की शाम को तीन सौ अधिक प्रवासी मजदूर अमझरा घाटी से जिले की सीमा में आए। मजदूरों को बसों द्वारा विशिष्ट गल्ला मंडी अमरपुर लाया गया, जहां पर थर्मल स्क्रीनिंग कराकर ठहराया गया। सोमवार को दोपहर के बाद सभी को रोडवेज की आठ बसों से बिहार भेजा गया है। इस दौरान प्रवासी मजदूरों ने बताया कि रात्रि में खाना के बाद पानी के लिए एक ही टैंकर रखा रहा। पानी गर्म था।
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समाजसेवियों ने की भोजन व्यवस्था
प्रवासी मजदूरों को दोपहर में समाजसेवी संस्थाएं भोजन व अन्य खाद्य सामग्री लेकर पहुंचीं, जहां पर प्रवासियों को बैठाकर भोजन कराया गया। भोजन से बच्चों को राहत मिली, तो बड़ों के भी चेहरे खिल उठे। उन्होंने समाजसेवियों की सराहना की।
घर से बाहर मजदूरी करने के लिए गए थे, जहां पहुंचते ही लॉकडाउन लागू हो गया। इससे फैक्ट्री बंद हो गई। कुछ भी नहीं कमा सके और घर वापस जा रहे हैं।
- राहुल कुमार
प्रशासन ने केवल आवेदन भरवा लिया है, लेकिन यहां पर कोई सुविधा नहीं दी गई है। सुबह से खाना व नाश्ता नहीं दिया गया है।
- डुमर यादव
बस मिले तो सुविधा से घर पहुंच सकें। यहां पर बस की कोई सुविधा नहीं है। इसलिए अब जाने के लिए परेशान हो रहे हैं।
- संतोष यादव
मुंबई से बसों व अन्य साधनों से यहां तक पहुंचे। अब तक सबसे अधिक साधन के लिए इंतजार भी इसी जनपद में करना पड़ा है।
- रामलाल
प्रवासी मजदूरों के लिए रोडवेज की आठ बसें मंगाई गईं, जिससे सभी को बिहार तक भेजा गया है।
- अनिल कुमार मिश्र
अपर जिलाधिकारी
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कोरोना महामारी को रोकने के लिए लॉकडाउन के 69 दिन बाद भी प्रवासी मजदूरों के आने का सिलसिला थम नहीं रहा है। लॉकडाउन से जहां व्यापार, उद्योग धंधे पूरी तरह से ठप कर दिए हैं, वहीं निर्धन तबके के मजदूरों की रोजी रोटी भी छिन गई है। शुरुआत में लोग लॉकडाउन के खुलने का इंतजार करते रहे, लेकिन लॉकडाउन लगातार बढ़ता रहा। इससे परेशान लोगों ने अपने घरों पर ही पहुंचना बेहतर समझा।
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इसी के चलते लोग अपने घरो की ओर चल पड़े। यातायात सेवाएं ठप होने से लोग पैदल व अन्य वाहनों का सहारा लेकर निकल पड़े। रविवार की शाम को तीन सौ अधिक प्रवासी मजदूर अमझरा घाटी से जिले की सीमा में आए। मजदूरों को बसों द्वारा विशिष्ट गल्ला मंडी अमरपुर लाया गया, जहां पर थर्मल स्क्रीनिंग कराकर ठहराया गया। सोमवार को दोपहर के बाद सभी को रोडवेज की आठ बसों से बिहार भेजा गया है। इस दौरान प्रवासी मजदूरों ने बताया कि रात्रि में खाना के बाद पानी के लिए एक ही टैंकर रखा रहा। पानी गर्म था।
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समाजसेवियों ने की भोजन व्यवस्था
प्रवासी मजदूरों को दोपहर में समाजसेवी संस्थाएं भोजन व अन्य खाद्य सामग्री लेकर पहुंचीं, जहां पर प्रवासियों को बैठाकर भोजन कराया गया। भोजन से बच्चों को राहत मिली, तो बड़ों के भी चेहरे खिल उठे। उन्होंने समाजसेवियों की सराहना की।
घर से बाहर मजदूरी करने के लिए गए थे, जहां पहुंचते ही लॉकडाउन लागू हो गया। इससे फैक्ट्री बंद हो गई। कुछ भी नहीं कमा सके और घर वापस जा रहे हैं।
- राहुल कुमार
प्रशासन ने केवल आवेदन भरवा लिया है, लेकिन यहां पर कोई सुविधा नहीं दी गई है। सुबह से खाना व नाश्ता नहीं दिया गया है।
- डुमर यादव
बस मिले तो सुविधा से घर पहुंच सकें। यहां पर बस की कोई सुविधा नहीं है। इसलिए अब जाने के लिए परेशान हो रहे हैं।
- संतोष यादव
मुंबई से बसों व अन्य साधनों से यहां तक पहुंचे। अब तक सबसे अधिक साधन के लिए इंतजार भी इसी जनपद में करना पड़ा है।
- रामलाल
प्रवासी मजदूरों के लिए रोडवेज की आठ बसें मंगाई गईं, जिससे सभी को बिहार तक भेजा गया है।
- अनिल कुमार मिश्र
अपर जिलाधिकारी

अमरपुर मंडी में बैठे बाहर से आए लोग- फोटो : LALITPUR

अमरपुर मंडी में भोजन वितरण को लाइन में खड़े लोग- फोटो : LALITPUR