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27 दुकानदारों पर 26 लाख बकायेदारी
ललितपुर ब्यूरो
Updated Tue, 28 Jul 2015 02:05 AM IST
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ललितपुर। नगर पालिका के शादीलाल दुबे कांपलेक्स में मौजूद 27 दुकानदारों पर 26 लाख रुपए की बकायेदारी चली आ रही है। जनप्रतिनिधियों ने दूसरों के नाम पर दुकानें आवंटित कराई और किराया तथा प्रीमियम जमा करना भूल गए। अब, नगर पालिका के कर्मचारी उनके चक्कर लगा रहे हैं।
नगर पालिका परिषद की सीमा के अंतर्गत पालिका की सात सैकड़ा से अधिक दुकानें बनी हुई हैं, इनसे नगर पालिका अलग- अलग किराया वसूलती है। इसके अलावा पालिका ने संगठित विकास योजना के माध्यम से सुपर मार्केट व शादीलाल दुबे कांपलेक्स का निर्माण कराया, इसमें करीब आधा सैकड़ा दुकानें मौजूद हैं। इन दुकानों का किराया व प्रीमियम संगठित विकास योजना के खाते में जमा किया जाता है। पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष रमेश खटीक के शासन काल में घंटाघर स्थित शादी लाल दुबे कांलेक्स की 27 दुकानों का अक्टूबर- 2008 में बोली लगाकर आवंटन किया गया। आवंटी दुकानदारों में से अधिकांश ने 25 प्रतिशत प्रीमियम जमाकर दुकानें तो अपने नाम करा लीं, लेकिन तब से लेकर अब तक उन्होंने प्रीमियम को जमा नहीं किया है। कुल 27 दुकानों पर 23,26,750 रुपए प्रीमियम बाकी चल रहा है तथा करीब तीन लाख रुपए किराया है।
हैरानी की बात तो यह है कि करीब सात साल होने के बाद भी आवंटित दुकानदारों ने अपने प्रीमियम की पूरी धनराशि जमा नहीं की है। कई तो ऐसे दुकानदार हैं, जिन्होंने किराये का भी भुगतान नहीं किया है। हालांकि, नगर पालिका कर्मचारी किराया लेने के लिए हर माह उनकी दुकानों पर दस्तक देते हैं, लेकिन संबंधित बकायेदार दुकानदार अपना किराया जमा नहीं करते हैं।
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पूर्व अध्यक्ष से लेकर पार्षद के चहेते शामिल
शादीलाल दुबे कांपलेक्स में बनी 27 दुकानों पर पूर्व अध्यक्ष व पार्षदों के चहेतों के नाम पर आधा सैकड़ा दुकानें मौजूद हैं। इन चहेते शुभचिंतकों ने अपने नाम दुकानें आवंटित जरूर कराईं, लेकिन प्रीमियम व किराया जमा करने की जिम्मेदारी संबंधित जनप्रतिनिधि की है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों से प्रीमियम व किराया निकालना आसान नहीं है। कर्मचारी इन दुकानों के संचालकों के पास जाते जरूर हैं, लेकिन उनसे किराया मांगने की हिम्मत नहीं है। कई बार तो नगर पालिका के कर्मचारियों को ही दुत्कार दिया जाता है।
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नगर पालिका परिषद की सीमा के अंतर्गत पालिका की सात सैकड़ा से अधिक दुकानें बनी हुई हैं, इनसे नगर पालिका अलग- अलग किराया वसूलती है। इसके अलावा पालिका ने संगठित विकास योजना के माध्यम से सुपर मार्केट व शादीलाल दुबे कांपलेक्स का निर्माण कराया, इसमें करीब आधा सैकड़ा दुकानें मौजूद हैं। इन दुकानों का किराया व प्रीमियम संगठित विकास योजना के खाते में जमा किया जाता है। पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष रमेश खटीक के शासन काल में घंटाघर स्थित शादी लाल दुबे कांलेक्स की 27 दुकानों का अक्टूबर- 2008 में बोली लगाकर आवंटन किया गया। आवंटी दुकानदारों में से अधिकांश ने 25 प्रतिशत प्रीमियम जमाकर दुकानें तो अपने नाम करा लीं, लेकिन तब से लेकर अब तक उन्होंने प्रीमियम को जमा नहीं किया है। कुल 27 दुकानों पर 23,26,750 रुपए प्रीमियम बाकी चल रहा है तथा करीब तीन लाख रुपए किराया है।
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हैरानी की बात तो यह है कि करीब सात साल होने के बाद भी आवंटित दुकानदारों ने अपने प्रीमियम की पूरी धनराशि जमा नहीं की है। कई तो ऐसे दुकानदार हैं, जिन्होंने किराये का भी भुगतान नहीं किया है। हालांकि, नगर पालिका कर्मचारी किराया लेने के लिए हर माह उनकी दुकानों पर दस्तक देते हैं, लेकिन संबंधित बकायेदार दुकानदार अपना किराया जमा नहीं करते हैं।
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पूर्व अध्यक्ष से लेकर पार्षद के चहेते शामिल
शादीलाल दुबे कांपलेक्स में बनी 27 दुकानों पर पूर्व अध्यक्ष व पार्षदों के चहेतों के नाम पर आधा सैकड़ा दुकानें मौजूद हैं। इन चहेते शुभचिंतकों ने अपने नाम दुकानें आवंटित जरूर कराईं, लेकिन प्रीमियम व किराया जमा करने की जिम्मेदारी संबंधित जनप्रतिनिधि की है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों से प्रीमियम व किराया निकालना आसान नहीं है। कर्मचारी इन दुकानों के संचालकों के पास जाते जरूर हैं, लेकिन उनसे किराया मांगने की हिम्मत नहीं है। कई बार तो नगर पालिका के कर्मचारियों को ही दुत्कार दिया जाता है।