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चौराहों की सुंदरता का नहीं हो रहा रखरखाव

Mon, 02 Apr 2018 02:00 AM IST
Updated Mon, 02 Apr 2018 02:00 AM IST
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चौराहों की सुंदरता का नहीं हो रहा रखरखाव
चौराहों की सुंदरता का नहीं हो रहा रखरखाव
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ललितपुर।
नगर की सुंदरता बढ़ाने के लिए चौराहों पर लगाए फुव्वारों को लगाया तो गया, लेकिन ठीक से रखरखाव नहीं होने के कारण यह सभी खराब पड़े हुए हैं। तुवन चौराहे का फुव्वारा महीनों से टूटा पड़ा है, तो वहीं कचहरी चौराहा का फुव्वारा भी तोड़ दिया गया है, जो अभी तक विवादों में घिरा है।

जिला प्रशासन के सहयोग से कुछ वर्ष पूर्व शहर के प्रमुुख चौराहों पर लाल रंग के राजस्थानी पत्थरों से आकर्षक लाइटिंग युक्त फुव्वारे लगाए गए थे। इसके तहत शहर के तुवन चौराहा पर स्वतंत्रता सेनानी परमानंद की प्रतिमा के आगे, कचहरी चौराहा व वर्णी चौराहा पर यह फुव्वारे लगाए गए थे। यह कुछ समय तक तो ठीक से चलते रहे, लेकिन बहुत ज्यादा रखरखाव नहीं होने के कारण यह कई बार खराब हो गए तो कई बार टूट भी चुके। हालांकि शुरू में तो फुव्वारों का मेंटीनेंस किया गया, लेकिन यह मेंटीनेंस बहुत अधिक समय तक नहीं किया गया और आज यह स्थिति है कि तुवन चौराहा का फुव्वारा करीब चार महीने से अधिक समय से टूटा पड़ा हुआ है, जो अब चलता भी नहीं है। इसी प्रकार कचहरी चौराहा के फुव्वारे का हाल तो और भी दयनीय है, जहां से हर रोज खुद डीएम समेत तमाम जिले के बड़े आला अधिकारियों का निकलना होता है। यहां का फुव्वारा गत माह किसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए तोड़ दिया गया, जिसके बाद में विवाद सामने आने पर इस पर होने वाले नये निर्माण पर रोक लगा दी गई। वहीं, वर्णी चौराहा पर लगा फुव्वारा भी कई महीनों से नहीं चल रहा है। इससे चौराहों पर लगाए जाने वाले यह फुव्वारे मात्र शोपीस बन कर रहे गए हैं। सावरकर चौक पर काफी वर्षों पूर्व एक संगठन द्वारा लगाया गया फुव्वारा भी आज क्षतिग्रस्त अवस्था में है। नगर की सुंदरता को बढ़ाने के लिए कई वर्षों पूर्व जिला प्रशासन के निर्देश पर नगर पालिका द्वारा प्रमुख चौराहों के साथ ही रेलवे स्टेशन पर लाइटिंग युक्त खजूर के आकर्षक कृत्रिम पेड़ लगाए गए थे, जिससे शहर की सुंदरता काफी बढ़ गई थी और इस प्रकार के कार्य को शहरवासियों द्वारा काफी सराहा भी गया था। लेकिन प्रशासनिक फेरबदल होने के बाद नगर की सुंदरता बढ़ाने के लिए किए इन निर्माण कार्य देखरेख के अभाव में खजूर के यह कृत्रिम पेड़ भी क्षतिग्रस्त हो गए थे और आज की स्थिति में इन कृत्रिम पेड़ों का तो वजूद भी नहीं बचा है। इसी प्रकार वर्तमान में विभिन्न चौराहों पर स्थापित किए गए राजस्थानी लाल पत्थर युक्त इन फुव्वारों का अस्तित्व भी खतरे में है।
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सत्यापन करा के दूर की जाएंगी कमियां
चौराहों पर लगे फुव्वारों का सत्यापन कराया जाएगा और जो भी कमियां होंगी उन्हें दुरुस्त कराया जाएगा।
अवनींद्र कुमार, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद।
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