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आठ माह में इक्कीस नवजातों की मौत

Fri, 17 Jan 2020 12:36 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jan 2020 12:36 AM IST
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21 new born baby dead under eight month
ललितपुर। जनपद के अधिकांश अस्पतालों में नवजात बच्चों के लिए आधुनिक संसाधनों का अभाव है। इससे ग्रामीण क्षेत्र व नर्सिंग होम में जन्मे बच्चों को जिला महिला अस्पताल में इलाज के लिए लाना पड़ता है। मशीनों की सुविधा नहीं मिलने पर अक्सर बच्चे रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। आठ माह में अब तक छह नवजात बच्चों की अस्पताल में मौत हो चुकी है, जबकि दस बच्चे घर में ही दम तोड़ चुके हैं। सात नवजात की स्वास्थ्य इकाइयों में मौत हो चुकी है, जिन्हें जिला मुख्यालय तक लाया ही नहीं जा सका है। इस तरह कुल 21 बच्चे काल के गाल में समा चुके हैं।
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नवजात बच्चों को जन्म के तुरंत बाद सांस लेने में परेशानी होने लगती है। ऐसे में उन्हें ऑक्सीजन देने की आवश्यकता होती है। इसके साथ ही पीलिया हो जाने पर सिकाई मशीन ( फोटोथ्रेफी ) की जरुरत होती है। सर्दी के मौसम में सबसे बड़ी समस्या नवजात को गर्म माहौल में रखने की होती है। इसके लिए अस्पताल में वार्मर की आवश्यकता पड़ती है। लेकिन, जिले में मशीनों की कमी है।
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जनपद के आठ माह के स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड के अनुसार शहर की अपेक्षा तीन गुने से अधिक प्रसव ग्रामीण क्षेत्रों में होते हैं। ऐसे में मशीनों की आवश्यकता सबसे अधिक ग्रामीण क्षेत्रों में खुले सीएचसी व पीएचसी में होती है। ग्रामीण क्षेत्र में जानकारी का अभाव भी होता है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान मिलने वाली सुविधाओं व आवश्यक आहार की जानकारी नहीं होती है और न ही मिल पाता है। इससे गर्भावस्था में पल रहे बच्चे का विकास नहीं हो पाता है। प्रसव के दौरान नवजात में कई कमियां पाई जाती हैं। बच्चों का कम वजन, कम दिन में प्रसव होने से बच्चे का विकास न हो पाने जैसी कई समस्याएं आती है। इससे जन्म के पश्चात तुरंत ही नवजात बच्चों को आधुनिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में मशीनों के अभाव में देर से इलाज मिलने के कारण उनकी मौत हो जाती है। जबकि, ऐसे कमजोर बच्चों को जन्म के तुरंत बाद ही गर्म रखने व ऑक्सीजन देने के लिए न्यू सिक बार्न केयर यूनिट की आवश्यकता होती है।
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पीलिया होने पर बच्चों को सिकाई मशीन की जरुरत पड़ती है, लेकिन अस्पतालों में संसाधनों की कमी है। इसलिए लोग अपने नवजात को लेकर जिला महिला अस्पताल के सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में पहुचंते हैं। लेकिन, नवजात को समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।
इकलौते सरकारी अस्पताल में है सुविधा
जनपद में नवजात बच्चों को न्यू सिक बार्न की आवश्यकता होने पर जिला मुख्यालय स्थित जिला महिला अस्पताल में आना पड़ता है। यहां पर 12 न्यू सिक बोर्न हैं, जिनमें 24 बच्चों केे लिटाया जा सकता है। लेकिन, ग्रामीण क्षेत्रों से जिला मुख्यालय तक आने में नवजातों को समय पर व्यवस्थित इलाज नहीं मिलता, जिससे बच्चे रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। जिला मुख्यालय पर दस नर्सिंग होम संचालित हैं। इनमें कुछ ही नर्सिंग होम में प्रसव होते हैं, लेकिन न्यू सिक बोर्न की सुविधा नहीं है। केवल एक निजी अस्पताल में दस बेड की न्यू सिक बोर्न की सुविधा है।

नवजात बच्चों के लिए जिला महिला अस्पताल में न्यू सिक बोर्न यूनिट बनाया गया है। जहां एक साथ 24 बच्चों को इलाज दिया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह सुविधा अभी नहीं है। लेकिन, आवश्यकता पड़ने पर जिला महिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है।
- डा. प्रताप सिंह
मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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