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21 साल से सूखा पड़ा कमल
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 21 Jan 2017 12:31 AM IST
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bjp , lalitpur news
- फोटो : demo
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नगर की सदर विधानसभा सीट पर पिछले 21 साल से भाजपा का कमल नहीं खिल सका है। पहले यह सीट जनसंघ फिर बाद में भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती थी। लेकिन 1991 के बाद यहां भाजपा के पक्ष में मतदान प्रतिशत में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। 2007 के विधानसभा चुनाव में तो भाजपा को यहां से 8.18 प्रतिशत वोट ही मिले थे। हालांकि वर्ष 2012 में भाजपा के वोट प्रतिशत में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई और यह आंकड़ा 19.82 प्रतिशत तक जा पहुंचा, लेकिन जीत फिर भी दूर रही।
सदर विधानसभा पर जनसंघ ने 1969 में जीत दर्ज की और भगवत दयाल विधानसभा पहुंचे। आपात काल के बाद हुए 1977 के चुनाव में जनसंघ का विलय जनता पार्टी में हो गया और जनता पार्टी से सुदामा प्रसाद गोस्वामी ने जीत दर्ज की। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने 1989 में सदर विधानसभा पर जीत दर्ज की। डॉ. अरविंद जैन ने चुनाव जीता और भाजपा का कमल खिलाया। डॉ. अरविंद जैन ने 42 प्रतिशत वोट पाकर बड़ी जीत दर्ज की। यह वोट प्रतिशत सदर विधानसभा पर भाजपा का अव्वल प्रदर्शन है। इसके बाद 1991, 1993 और 1996 में भाजपा के डॉ. अरविंद कुमार जैन ने लगातार जीत दर्ज कर सदर विधानसभा को अपना गढ़ साबित किया। हालांकि वोट प्रतिशत में लगातार गिरावट दर्ज हुई।
इन चुनावों में भाजपा का वोट प्रतिशत क्रमश: 33.15, 35.15 व 35.23 रहा। वर्ष 2002 में भाजपा ने अपने सिटिंग विधायक डॉ. अरविंद जैन का टिकट काटकर रामकुमार तिवारी को टिकट दी और करारी शिकस्त का सामना किया। इस बार भाजपा का वोट बैंक सिमटकर 11.54 फीसदी ही रह गया। 2007 के चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर डॉ. अरविंद जैन पर भरोसा जताया, लेकिन तब तक जनपद की नदियों में काफी पानी बह चुुका था। इस चुनाव में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा और उसका वोट बैंक आठ प्रतिशत पर जाकर सिमट गया। भाजपा संगठन की आपसी कलह में लगातार उसके प्रदर्शन में गिरावट दर्ज होती रही। वर्ष 2009 में हुए उपचुनाव में तो भाजपा संगठन को प्रत्याशी के टोटे पड़ गए थे। आखिरकार राजेंद्र सिंह यादव को प्रत्याशी बनाया, जिनका वोट का आंकड़ा दस हजार से नीचे रहा। 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सबसे आखिरी में अपनी टिकट रामरतन कुशवाहा को दी और इस बार भाजपा का वोट ग्राफ बढ़कर 19 फीसदी तक पहुंच गया।
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टिकट को लेकर मची मारकाट
भारतीय जनता पार्टी भले ही पिछले 21 साल से सदर विधानसभा पर कोई कमाल नहीं दिखा पा रही हो, लेकिन टिकट के लिए सबसे ज्यादा प्रतिस्पर्द्धा इसी पार्टी में मची हुई है। मोदी लहर में झांसी ललितपुर संसदीय क्षेत्र से उमा भारती की बढ़ी जीत ने भाजपाईयों को उत्साह से भर दिया। इस बार विधानसभा चुनाव में सभी लोग मोदी के सहारे विधायक बनने की जुगत में है। उम्मीद की जा रही है, कि एक दो दिन में भाजपा के उम्मीदवार की घोषणा हो जाएगी। टिकट के दावेदारों में बसपा छोड़ भाजपा में आए वर्तमान विधायक रमेश कुशवाहा का नाम सबसे आगे चल रहा है। इनके साथ ही जेके सिंह, हाकिम सिंह, गंधर्व सिंह, नीरज जैन गौना, रामरतन कुशवाहा, प्रदीप चौबे व जगदीश लोधी भी टिकट के लिए प्रयासरत हैं।
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सदर विधानसभा पर जनसंघ ने 1969 में जीत दर्ज की और भगवत दयाल विधानसभा पहुंचे। आपात काल के बाद हुए 1977 के चुनाव में जनसंघ का विलय जनता पार्टी में हो गया और जनता पार्टी से सुदामा प्रसाद गोस्वामी ने जीत दर्ज की। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने 1989 में सदर विधानसभा पर जीत दर्ज की। डॉ. अरविंद जैन ने चुनाव जीता और भाजपा का कमल खिलाया। डॉ. अरविंद जैन ने 42 प्रतिशत वोट पाकर बड़ी जीत दर्ज की। यह वोट प्रतिशत सदर विधानसभा पर भाजपा का अव्वल प्रदर्शन है। इसके बाद 1991, 1993 और 1996 में भाजपा के डॉ. अरविंद कुमार जैन ने लगातार जीत दर्ज कर सदर विधानसभा को अपना गढ़ साबित किया। हालांकि वोट प्रतिशत में लगातार गिरावट दर्ज हुई।
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इन चुनावों में भाजपा का वोट प्रतिशत क्रमश: 33.15, 35.15 व 35.23 रहा। वर्ष 2002 में भाजपा ने अपने सिटिंग विधायक डॉ. अरविंद जैन का टिकट काटकर रामकुमार तिवारी को टिकट दी और करारी शिकस्त का सामना किया। इस बार भाजपा का वोट बैंक सिमटकर 11.54 फीसदी ही रह गया। 2007 के चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर डॉ. अरविंद जैन पर भरोसा जताया, लेकिन तब तक जनपद की नदियों में काफी पानी बह चुुका था। इस चुनाव में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा और उसका वोट बैंक आठ प्रतिशत पर जाकर सिमट गया। भाजपा संगठन की आपसी कलह में लगातार उसके प्रदर्शन में गिरावट दर्ज होती रही। वर्ष 2009 में हुए उपचुनाव में तो भाजपा संगठन को प्रत्याशी के टोटे पड़ गए थे। आखिरकार राजेंद्र सिंह यादव को प्रत्याशी बनाया, जिनका वोट का आंकड़ा दस हजार से नीचे रहा। 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सबसे आखिरी में अपनी टिकट रामरतन कुशवाहा को दी और इस बार भाजपा का वोट ग्राफ बढ़कर 19 फीसदी तक पहुंच गया।
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टिकट को लेकर मची मारकाट
भारतीय जनता पार्टी भले ही पिछले 21 साल से सदर विधानसभा पर कोई कमाल नहीं दिखा पा रही हो, लेकिन टिकट के लिए सबसे ज्यादा प्रतिस्पर्द्धा इसी पार्टी में मची हुई है। मोदी लहर में झांसी ललितपुर संसदीय क्षेत्र से उमा भारती की बढ़ी जीत ने भाजपाईयों को उत्साह से भर दिया। इस बार विधानसभा चुनाव में सभी लोग मोदी के सहारे विधायक बनने की जुगत में है। उम्मीद की जा रही है, कि एक दो दिन में भाजपा के उम्मीदवार की घोषणा हो जाएगी। टिकट के दावेदारों में बसपा छोड़ भाजपा में आए वर्तमान विधायक रमेश कुशवाहा का नाम सबसे आगे चल रहा है। इनके साथ ही जेके सिंह, हाकिम सिंह, गंधर्व सिंह, नीरज जैन गौना, रामरतन कुशवाहा, प्रदीप चौबे व जगदीश लोधी भी टिकट के लिए प्रयासरत हैं।