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खदानें बंद होने पर व्यापारियों व मजदूरों ने किया प्रदर्शन

Tue, 16 Oct 2018 01:32 AM IST
Updated Tue, 16 Oct 2018 01:32 AM IST
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खदानें बंद होने पर व्यापारियों व मजदूरों ने किया प्रदर्शन
खदानें बंद होने पर व्यापारियों व मजदूरों नेे किया प्रदर्शन
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बंद खदानें फिर से शुरु कराने को जिलाधिकारी को दिया ज्ञापन
हजारों मजदूरों व व्यापारियों में रोजगार का संकट होने से नाराजगी
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। इमारती पत्थर के खनन कर्ताओं, व्यापारियों, परिवहन कर्ताओं और मजदूरों द्वारा जिलाधिकारी द्वारा इमारती पत्थर की खदानें बंद करने के आदेश पर आक्रोश जताते हुए सोमवार को हजारों की संख्या में कलक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया और हजारों लोगों के सामने रोजगार का संकट के दौरान होने वाली स्थितियों को लेकर चिंता जाहिर करते हुए बंद खदानें शुरू करने को लेकर जमकर नारेबाजी की।

दस दिन पूर्व पांच अक्टूबर को जिला प्रशासन द्वारा जिले की 31 पत्थर खदानों के लिए पर्यावरण की एनओसी नहीं मिलने का हवाला देकर प्रतिबंध लगा दिया था। डीएम के उक्त आदेश में देवगढ़ के पास महावीर वन्य जीव बिहार होने के चलते पर्यावरण विभाग द्वारा अनुमति नहीं देने की बात कही गई थी। इसके बाद उक्त 31 पत्थर खदानें बंद हो गईं, जिसके चलते इन खदानों से पत्थर का व्यापार करने वाले व्यापारी, मजदूर, परिवहनकर्ता आदि का बड़े स्तर पर रोजगार छिन गया और उनके सामने रोजी रोटी का संकट उत्पन्न होने लगा है। अपने परिवार का पालन पोषण करने के लिए बेरोजगार हो गए हजारों खनन व्यापारियों, परिवहन कर्ताओं व मजदूरों ने जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्ट्रेट परिसर में उक्त खदानें का संचालन फिर से शुरू कराने के लिए जमकर नारेबाजी की और इस संबंध में खदानें शुरू कराने को लेकर एक ज्ञापन भी दिया। ज्ञापन में बताया गया है कि डीएम के आदेश द्वारा जिला ललितपुर की अधिकांश इमारती पत्थर की खदानें बंद हो गई हैं। प्राचीन समय से चल आ रहे इस परंपरागत कार्य से विशेष तौर पर जाखलौन, धौर्रा, पाली और बालाबेहट के करीब पचास ग्रामों के सैकड़ों खनन पट्टेदार एवं हजारों मजदूर, व्यापारी परिवहन कर्ता आदि रोजगार प्राप्त करते हैं और उनके पास जीविकोपार्जन का यह एक मात्र साधन है। इन ग्रामों की अधिकांश आबादी इसके व्यापार व संबंधित अर्थ व्यवस्था से जुड़ी है। लगभग सभी खनन कार्य बंद कर दिए जाने के कारण हजारों मजदूरों के सामने रोजगार की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है। ज्ञापन में खनन बंद करने का प्रमुख कारण प्रभागीय वनाधिकारी कैमूर वन्य जीव प्रभाग मिर्जापुर का 23 जनवरी 2011 के पत्र को भ्रामक और इसे गलत जानकारी व तथ्यों पर आधारित बताया, जिसके आधार पर इतनी कठोर कार्रवाई उचित नहीं है। उक्त आदेश के पैरा एक में उल्लेखित किए गए कारणों में कहीं भी किसी भी वन्य जंतु विहार के ईएसजैड की अधिकतम सीमा दस किलोमीटर तक हो सकने का उल्लेख है एवं इस क्षेत्र में भी खनन गतिविधियां रेगुलेट किया जाना है न कि प्रतिबंधित। इसमें यह भी उल्लेखनीय बताया कि महावीर स्वामी जन्तु विहार, देवगढ़, ललितपुर में वर्तमान में कोई इएसजैड अस्तित्व में नहीं है। जिला स्तरीय समिति एवं राज्य सरकार द्वारा ईएसजैड का प्रस्ताव वर्ष 2014 में केंद्र सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजा गया है जो अभी तक विचाराधीन है। इसलिए किसी काल्पनिक दस किलोमीटर का ईएसजैड मान लेना और उसके आधार पर खनन कार्य करना निषिद्घ कर देना उचित नही है। प्रभागीय वनाधिकारी कैमूर वन जीव प्रभाग मिर्जापुर द्वारा ऐसा कोई शासनादेश या आदेश प्रेषित नहीं किया गया है और न ही कोई ऐसा आदेश अस्तित्व में ही है। जिसमें बिना किसी अधिसूचना के काल्पनिक ईएसजैड मानकर दस किलोमीटर की परिधि में खनन कार्य बंद कर दिया जाए। इस प्रकरण के संबंध में महावीर स्वामी जन्तु विहार के गठन की अधिसूचना, उसका प्रमाणित मानचित्र भी उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया है। जबकि सरकार के बार-बार निर्देशों के बावजूद उक्त जन्तु विहार का टोपो ग्राफिक मेप प्रेषित नहीं किया जा रहा है। आज तक कभी भी विधिक रुप से इस काल्पनिक ईएसजैड की पैमाइश नहीं की गई है। ऐसे किसी भी पैमाइश या नाप होने का कोई भी प्रमाणिक अभिलेख वन विभाग या जिलाधिकारी कार्यालय में उपलब्ध नहीं है और न ही अस्तित्व में है, जिसमें बंद किए गए खनन क्षेत्रों का चिह्नीकरण हो। प्रदेश सरकार द्वारा मात्र सौ मीटर का ईएसजैड बनाने का प्रस्ताव भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को प्रेषित किया गया। जबकि वनाधिकारी कैमूर एवं अन्य अधिकारी इस तथ्य को छिपाकर राज्य सरकार के निर्णय के विरुद्घ दस किलोमीटर की ईएसजैड कल्पना करके पत्राचार करते रहने का भी आरोप लगाया है। खनन कर्ताओं, खनन व्यापारियों व मजदूरों ने ज्ञापन में बताया कि उक्त तथ्यों के आधार पर स्पष्ट है कि किसी भी शासनादेश या गाइडलाइन में खनन कार्य बंद करने का कोई निर्देश नहीं है। उन्होंने जिलाधिकारी से उनके रोजगार और उनके परिवार के भरण पोषण की खातिर पांच अक्टूबर के 31 खदानों के बंद करने के आदेश पर पुनर्विचार कर खदानें फिर से शुरु कराने की मांग की है। ज्ञापन पर नीरज शर्मा, देवी प्रसाद वर्मा, भगवानदास, हुसेन शाह, संजीव लिटौरिया, देव सिंह, विनोद मिश्रा, विजय पटैरिया, दीपक मिश्रा, रतन सिंह, बृृजभान सिंह, दशरथ, लक्ष्मीकांत वैद्य, फूलचंद, राकेश कुमार, काशीराम, विजय सिंह, नीलम सिंह, बब्बूराजा, लक्ष्मन सिंह, सुनील, राकेेश, आलोक शर्मा, निमेश मिश्रा, सुजान सिंह, सुरेश, गनपत, जगदीश समेत दर्जनों लोगों के हस्ताक्षर हैं।
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