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बरसे न बदरा, सावन बीता अब बीत न जाए भादों

Tue, 15 Aug 2017 01:00 AM IST
Updated Tue, 15 Aug 2017 01:00 AM IST
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बरसे न बदरा, सावन बीता अब बीत न जाए भादों

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बरसे न बदरा, सावन बीता अब बीत न जाए भादों

अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। सावन माह बीत गया है और बरसात का मौसम बीतने में लगभग एक माह का ही समय रह गया है, लेकिन जनपद में अभी तक एक भी दिन मूसलाधार बारिश नहीं हुई है। वर्तमान में आलम यह है कि जनपद का कोई भी बांध 50 फीसदी भी नहीं भर सका है। यदि अगले कुछ दिनों तक ऐसी ही स्थिति रही तो जनपद में सूखा पड़ना लगभग तय ही समझा जाए। बांधों में मौजूद पानी से क्षेत्रीय लोगों की प्यास बुझा पाना भी आसान नहीं है सिंचाई तो अलग बात है, ऐसे में आगामी रबी की फसल के दौरान किसानों को सिंचाई के लिए लाले पड़ सकते हैं। इस बात को सिंचाई विभाग व कृषि विभाग के अधिकारी भी मान रहे हैं।
सामान्य तौर पर बरसात का मौसम सितंबर माह तक माना जाता है, इसके बाद तो बिन मौसम ही बरसात होती है। यदि जनपद में अब तक हुई बरसात की बात करें तो सावन का माह बीत गया है और भादो का माह बीतने वाला है, लेकिन अभी जनपद में एक भी दिन मूसलाधार बारिश नहीं हो हुई है। जबकि, इस मौसम में तो जनपद के बांध लबालब भरे होते थे और बांध के गेट भी खुल जाते थे, लेकिन इस बार हालात काफी खराब है। जनपद के गोविंद सागर बांध, शहजाद बांध, जामनी बांध, सजनाम, रोहिणी, राजघाट और माताटीला यह सात ऐसे बांध हैं, जिनपर जनपद की पेयजल व सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह से निर्भर है। इसमें राजघाट बांध व माताटीला बांध मध्यप्रदेश व उत्तरप्रदेश दोनों के हिस्सों में आता है, लेकिन अन्य पांचों बांधों के जलस्तर की बात करें तो आज की तारीख में कोई भी बांध पचास फीसदी भी नहीं भरा है। सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनपद में बारिश का वार्षिक लक्ष्य 914 मिमी होता है। इसके सापेक्ष जनपद के उक्त पांचों बांधों में हुई बारिश व जलस्तर पर एक नजर मारे तो सामने आने वाले परिणाम काफी भयंकर हैं। शहर में स्थित गोविंद सागर बांध अभी 69 प्रतिशत खाली है। इसके अलावा शहजाद बांध अभी 55 प्रतिशत खाली है। जामनी बांध भी वर्तमान में 64 प्रतिशत खाली है। सजनाम बांध अभी 66 प्रतिशत और रोहिणी बांध भी अभी 62 प्रतिशत खाली है। वर्तमान के हालात आने वाले दिनों में सूखा की स्थिति की ग्वाही दे रहे है। यदि आने वाले दिनों में भी ऐसे ही हालात रहे तो कुछ माह बाद ही रबी की फसल आने वाली है, इस दौरान खेतों की सिंचाई के भी किसानों को पर्याप्त पानी नहीं मिल सकेगा।
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पशुओं को भी खड़ी होगी समस्या
सिंचाई के साथ-साथ पशुओं की प्यास बुझाने के लिए भी पानी की समस्या खड़ी होगी। बरसात नहीं होने और बांध के गेट नहीं खुल पाने के कारण वर्तमान में जनपद की समस्त नदी, नाले, तालाबे व पोखर समेत सभी जलस्रोत सूखे पड़े हुए हैं। ऐसे में पशुओं को प्यास बुझाने के लिए काफी दिक्कत आने वाली है।
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