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साहित्व व संस्कृति से दूर भाग रही युवा पीढ़ी

Sat, 08 Jul 2017 11:15 PM IST
Updated Sat, 08 Jul 2017 11:15 PM IST
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साहित्व व संस्कृति से दूर भाग रही युवा पीढ़ी
साहित्य व संस्कृति से दूर भाग रही युवा पीढ़ी
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ललितपुर।
शनिवार को नेहरू महाविद्यालय में अखिल भारतीय साहित्य परिषद द्वारा एक दिवसीय अधिवेशन और महर्षि वेदव्यास के जीवन दर्शन पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। महाविद्यालय के संस्कृत भवन सभागार में कार्यक्रम का शुभारंभ कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे परिषद के जिलाध्यक्ष डॉ. ओमप्रकाश शास्त्री व मुख्य अतिथि के रूप में आए प्रांतीय अध्यक्ष महेश पांडेय ‘बजरंग’ ने किया। संगोष्ठी में वक्ताओं ने युवा पीढ़ी द्वारा श्रेष्ठ साहित्य से बनाई जा रही दूूरी पर विशेष चर्चा की गई और विचार रखे गए।
मुख्य अतिथि महेश पांडेय ने अपने संबोधन में साहित्यकारों से समाजहित में कलम चलाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा और साहित्य से देश की पहचान होती है। हमारे वेदों, धार्मिक ग्रंथों और भारत के आचार्य, मनीषियों के पवित्र चिंतन से ही भारत विश्व का गौरव बन सका है। उन्होंने लार्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति तथा पश्चिमी सभ्यता द्वारा भारतीय संस्कृति के साथ किए गए अन्याय को विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से प्रस्तुत किया। इसी क्रम में जिलाध्यक्ष डॉ. शास्त्री ने कहा कि महर्षि वेदव्यास भगवान विष्णु के नौंवे अवतार थे। उन्होंने वेदों का एकत्रीकरण कर चार विभागों में विभाजन कर संपूर्ण विश्व को वेदरूपी ज्ञान राशि प्रदान की। वहीं, उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी साहित्य एवं सृजनात्मकता से दूर होती जा रही है। इससे समाज में नैतिक मूल्यों का हस प्रारंभ हो गया है। आज आवश्यकता है कि हम वैदिक साहित्य, पौराणिक साहित्य, दर्शन साहित्य के साथ संस्कृत एवं हिंदी के महाकवियों की श्रेष्ठतम रचनाओं को समाज में प्रसारित करे। इसी संबोधन के क्रम में साहित्य परिषद की उपाध्यक्ष डॉ. जनक किशोरी वर्मा ने कहा कि जिस समाज में जैसा साहित्य होता है, समाज उसी तरह का बन जाता है। साहित्य से वातावरण का सृजन होता है, आज लोग अच्छे साहित्य से दूर भाग रहे हैं। साहित्य परिषद के संयोजक अधिवक्ता राजेश दुबे ने कहा कि वर्तमान समय की मांग है कि साहित्यकार समाज को सही दिशा दें और लोगों का मार्गदर्शन करें। इसी क्रम में साहित्य परिषद की सदस्य हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. ऊषा पाठक ने कहा कि साहित्यकार समाज के जागरूक प्रहरी हैं। इनका हमेशा संरक्षण व संवर्धन होते रहना चाहिए। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि साहित्य परिषद के तत्वाधान में जनपद के साहित्यकारों, कवियों को चिह्नित कर उनकी रचनाओं का प्रकाशन कराया जाना चाहिए।
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वक्ताओं के क्रम में आरएसएस के जिला कार्यवाह सजन कुमार शर्मा समेत अन्य साहित्य और शिक्षा जगत के अनेक विद्वानों ने अपने-अपने विचार रखे। वहीं साहित्य के संरक्षण के लिए अनेक प्रस्तावों पर चर्चा की गई एवं निर्णय लिया गया कि जनपद के कवियों, साहित्यकारों के साहित्य को एकत्रित कर प्रकाशन हेतु राष्ट्रीय इकाई को भेजा जाए। इस मौके पर भगवत दयाल सिंधी, बाबूलाल द्विवेदी, जयशंकर प्रसाद द्विवेदी, पूर्व प्रधानाचार्य डीपी वर्मा, प्रभुदयाल पटैरिया, अवध बिहारी कौशिक, रामस्वरुप साहू, सुभाष जैन, संजीव शर्मा, दीपक पाठक, प्रीति सिरौठिया, वर्षा जैन, मुकेश पंथ, राजीव निरंजन, रुपनारायण निरंजन उपस्थित थे। संचालन डॉ. सुधाकर उपाध्याय ने किया।
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