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दो हैंडपंप के सहारे देवगढ़ की एक हजार की आबादी
amarujala
Updated Thu, 14 Jun 2018 01:06 AM IST
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water, jhansi news
- फोटो : amar ujala, lalitpur news
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धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से प्रसिद्ध देवगढ़ के गांव में इस समय पेयजल की भारी किल्लत चल रही है, जिससे आम व्यक्ति परेशान हो उठा है। दो सप्ताह से अधिक समय से देवगढ़ गांव में नलों में जलापूर्ति बंद चल रही है। गांव में लगे करीब 20 में दो हैंडपंप से ही एक हजार की आबादी की प्यास बुझ रही है, जबकि 18 हैंडपंप खराब हैं, जिनकी सुध नहीं लेने से यहां के ग्रामीणों को पेयजल की किल्लत से जूझना पड़ रहा है।
देवगढ़ दशावतार और जैन मंदिरों के अलावा बौद्ध गुफाओं के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध हैं। यहां आए दिन सैकड़ों पर्यटक पहुंचते हैं। देवगढ़ को विश्व पर्यटन पर लाने के लिए शासन स्तर से भी प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन वर्तमान में मुख्यालय से करीब 32 किलोमीटर दूर स्थित देवगढ़ के ग्रामीण पेयजल की किल्लत से जूझ रहे हैं। यहां गांव में करीब एक सप्ताह से अधिक समय से नलों में पानी की बूंद भी नहीं आई है। जिससे लोगों को पीने के पानी के लिए ही भटकना पड़ रहा है। छोटे-छोटे बच्चे भी दूर लगे हैंडपंपों में पानी भरने के लिए परेशान हो रहे हैं। देवगढ़ गांव में करीब एक हजार की आबादी है। इसके बीच नलों के अलावा 20 हैंडपंप भी लगाए गए हैं। लेकिन वर्तमान में इनमें अधिकांश हैंडपंपों ने भी भीषण गर्मी में पानी छोड़ दिया है तो बहुत से हैंडपंप खराब पड़े हैं। मात्र दो हैंडपंपों से पूरे गांव के लोगों को पानी मिल रहा है।
जलसंस्थान की मोटर सही कराकर एक दिन भी पानी की सप्लाई नहीं हो पाती है कि फिर से मोटर कभी खराब हो जाती है तो कभी वोल्टेज की समस्या को लेकर मोटर नहीं चल पाती है। वहीं देवगढ़ पहाड़ी पर ही मंदिरों के लिए पेयजल के लिए कई बार समिति की मांग पर टैंकरों से सप्लाई होती है, जिससे कई बार यहां भी पर्यटकों के लिए पीने के पानी का संकट हो जाता है। लेकिन गांव में ही पानी की सप्लाई बंद रहने और हैंडपंपों से पानी नहीं मिलने के कारण ग्रामीणों को तो भीषण गर्मी में कंठ तर करने के लिए दूर लगे हैंडपंपों से पानी भरना पड़ रहा है तो वहीं पर्यटकों को भी पीने का पानी नहीं मिलने से अपनी प्यास बुझाने के घंटों भटकना होता है और कई बार तो पर्यटकों को पेयजल की व्यवस्था नहीं होने से वापस लौटना पड़ता है।
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बेेतवा नदी है फिर भी पीने के पानी को परेशान
देवगढ़ में बेेतवा नदी निकली है, जिसमें भरपूर पानी तो है, लेकिन ग्रामीण पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। नये हैंडपंप लगाने के लिए कई बार प्रार्थना पत्र दिए गए, लेकिन कुछ नहीं हुआ। गांव में सबसे ज्यादा पानी की परेशानी है। मशता मंदिर पर तो हैंडपंप का बोर हो चुका है, लेकिन दो वर्ष के बाद भी हैंडपंप नहीं लगाया गया है।
- मंगल सिंह, ग्रामीण।
।
पेयजल पर गुमराह कर रहे अधिकारी
देवगढ़ में पेयजल की भारी किल्लत है। मोटर खराब होने का बार-बार बहाना किया जाता है। पहले दो माह नलों में पानी नहीं आया, फिर कुुछ दिन पानी आया और फिर से 11 दिन पानी नहीं आया, इसके बाद दो दिन पहले ही एक दिन के लिए नलों से पानी टपका, लेकिन अब दो दिन से फिर नलों से पानी सप्लाई बंद हो गई है। पेयजल पर अधिकारी हर बार गुमराह कर अपना पल्ला झाड़ ले रहे हैं, लेकिन पेयजल का स्थायी समाधान नहीं किया गया।
- शेर सिंह, अधिवक्ता व ग्रामीण।
इनका कहना है-
वोल्टेज की समस्या के चलते पिछले दिनों पेयजल की समस्या आ रही थी। लेकिन सोमवार को मोटर से पेयजल सप्लाई गांव की गई थी। यदि अब भी समस्या है तो निस्तारण कराया जाएगा और गांव में पेयजल आपूर्ति के पूरे प्रबंध किए जाएंगे।
प्रशांत त्रिपाठी, अवर अभियंता, जलसंस्थान।
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देवगढ़ दशावतार और जैन मंदिरों के अलावा बौद्ध गुफाओं के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध हैं। यहां आए दिन सैकड़ों पर्यटक पहुंचते हैं। देवगढ़ को विश्व पर्यटन पर लाने के लिए शासन स्तर से भी प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन वर्तमान में मुख्यालय से करीब 32 किलोमीटर दूर स्थित देवगढ़ के ग्रामीण पेयजल की किल्लत से जूझ रहे हैं। यहां गांव में करीब एक सप्ताह से अधिक समय से नलों में पानी की बूंद भी नहीं आई है। जिससे लोगों को पीने के पानी के लिए ही भटकना पड़ रहा है। छोटे-छोटे बच्चे भी दूर लगे हैंडपंपों में पानी भरने के लिए परेशान हो रहे हैं। देवगढ़ गांव में करीब एक हजार की आबादी है। इसके बीच नलों के अलावा 20 हैंडपंप भी लगाए गए हैं। लेकिन वर्तमान में इनमें अधिकांश हैंडपंपों ने भी भीषण गर्मी में पानी छोड़ दिया है तो बहुत से हैंडपंप खराब पड़े हैं। मात्र दो हैंडपंपों से पूरे गांव के लोगों को पानी मिल रहा है।
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जलसंस्थान की मोटर सही कराकर एक दिन भी पानी की सप्लाई नहीं हो पाती है कि फिर से मोटर कभी खराब हो जाती है तो कभी वोल्टेज की समस्या को लेकर मोटर नहीं चल पाती है। वहीं देवगढ़ पहाड़ी पर ही मंदिरों के लिए पेयजल के लिए कई बार समिति की मांग पर टैंकरों से सप्लाई होती है, जिससे कई बार यहां भी पर्यटकों के लिए पीने के पानी का संकट हो जाता है। लेकिन गांव में ही पानी की सप्लाई बंद रहने और हैंडपंपों से पानी नहीं मिलने के कारण ग्रामीणों को तो भीषण गर्मी में कंठ तर करने के लिए दूर लगे हैंडपंपों से पानी भरना पड़ रहा है तो वहीं पर्यटकों को भी पीने का पानी नहीं मिलने से अपनी प्यास बुझाने के घंटों भटकना होता है और कई बार तो पर्यटकों को पेयजल की व्यवस्था नहीं होने से वापस लौटना पड़ता है।
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बेेतवा नदी है फिर भी पीने के पानी को परेशान
देवगढ़ में बेेतवा नदी निकली है, जिसमें भरपूर पानी तो है, लेकिन ग्रामीण पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। नये हैंडपंप लगाने के लिए कई बार प्रार्थना पत्र दिए गए, लेकिन कुछ नहीं हुआ। गांव में सबसे ज्यादा पानी की परेशानी है। मशता मंदिर पर तो हैंडपंप का बोर हो चुका है, लेकिन दो वर्ष के बाद भी हैंडपंप नहीं लगाया गया है।
- मंगल सिंह, ग्रामीण।
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पेयजल पर गुमराह कर रहे अधिकारी
देवगढ़ में पेयजल की भारी किल्लत है। मोटर खराब होने का बार-बार बहाना किया जाता है। पहले दो माह नलों में पानी नहीं आया, फिर कुुछ दिन पानी आया और फिर से 11 दिन पानी नहीं आया, इसके बाद दो दिन पहले ही एक दिन के लिए नलों से पानी टपका, लेकिन अब दो दिन से फिर नलों से पानी सप्लाई बंद हो गई है। पेयजल पर अधिकारी हर बार गुमराह कर अपना पल्ला झाड़ ले रहे हैं, लेकिन पेयजल का स्थायी समाधान नहीं किया गया।
- शेर सिंह, अधिवक्ता व ग्रामीण।
इनका कहना है-
वोल्टेज की समस्या के चलते पिछले दिनों पेयजल की समस्या आ रही थी। लेकिन सोमवार को मोटर से पेयजल सप्लाई गांव की गई थी। यदि अब भी समस्या है तो निस्तारण कराया जाएगा और गांव में पेयजल आपूर्ति के पूरे प्रबंध किए जाएंगे।
प्रशांत त्रिपाठी, अवर अभियंता, जलसंस्थान।