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सता के लाजे नेतन ने खुटिया पर टांग दए सिद्घांत
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सत्ता के लाजें नेतन ने खुटिया पै टांग दए सिद्धांत
ललितपुर। लोकसभा चुनाव के महासंग्राम में राजनीतिक दलों ने जीत पाने के लिए बूथ व सेक्टर को मजबूत बनाना प्रारंभ कर दिया है। वहीं, शिक्षित वर्ग चाय की चुस्की लेते हुए चुनावी चर्चा कर रहे हैं। ऐसा ही नजारा बीएसए कार्यालय के पास चाय की दुकान पर रहा।
ग्राम वस्त्रावन के महेंद्र कुमार कहते हैं कि पैले के जमाने में राजनीत नीति, सिद्धातों पर हुआ करती थी। ऐई वजह से जनता कौ नेतन पै भरोसो हतो। जब नेतन की अपनी ही पार्टी में उपेक्षा होन लगतती तो कई नेता खुद की दम पर चुनाव में उतर जात ते। मुहल्ला चौबयाना निवासी कृपाल सिंह उनकी बात आगे बढ़ाते हुए कहते हैं कि मौजूदा समय में तो राजनीत कौ चेहरा ही बदल गओ है। अब नेता हो या पार्टी सबई को एक ही लक्ष्य सत्ता पावे को हो गओ। ईसें नीत, सिद्धांत कैवे के रह गए हैं और नेतन ने खुटिया पै सिद्धांत टांग दए।
छत्रसालपुरा निवासी अनिल कुमार कहते हैं कि पैले के समय में नेतन को अपनो नाम हतो। जब वे सड़कन पर उतरते तो उनके पीछे जनता की भीड़ हो जातती। अब नेतन के पीछे उनकी पार्टी के कार्यकर्ता व चापलूसों की फौज दिखाई देत। ग्राम गदयाना निवासी मलखान सिंह ने उनकी बात का समर्थन करते हुए कहते हैं कि नेतन की हालत जा हो गई कि वे अकेले अपनी दम पर चुनाव लड़वे की हैसियत में नई रह गए। ऐई वजह से निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव में पिछड़ जात। मोहल्ला तलैयापुरा निवासी नरेंद्र कुमार साहू कहते हैं कि अब तो गठबंधन की राजनीति फिर से लौट आई है। अकेले पार्टी चुनाव में उतरने की हिम्मत नहीं जुटा पा रई। ईके लाजे दलन ने नीत, सिद्धांतन से समझौता कर लओ है। नेतन को भी लगत कि फलाने दल की हवा चल रही है, ईसे टिकट मिल गओ तो जीत मिलवो तय है। ई कारण कइयन को पाला बदलने की महारथ हासिल हो गई है। ऐसे नेतन को पाला बदलवे में एक मिनट नहीं लगत। इसी दौरान और लोग चाय पीने के लिए आ जाते हैं तो चुनाव चर्चा कर रहे लोग बैंच से खड़े हो जाते हैं। इससे चर्चा पर विराम लग जाता है।
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ललितपुर। लोकसभा चुनाव के महासंग्राम में राजनीतिक दलों ने जीत पाने के लिए बूथ व सेक्टर को मजबूत बनाना प्रारंभ कर दिया है। वहीं, शिक्षित वर्ग चाय की चुस्की लेते हुए चुनावी चर्चा कर रहे हैं। ऐसा ही नजारा बीएसए कार्यालय के पास चाय की दुकान पर रहा।
ग्राम वस्त्रावन के महेंद्र कुमार कहते हैं कि पैले के जमाने में राजनीत नीति, सिद्धातों पर हुआ करती थी। ऐई वजह से जनता कौ नेतन पै भरोसो हतो। जब नेतन की अपनी ही पार्टी में उपेक्षा होन लगतती तो कई नेता खुद की दम पर चुनाव में उतर जात ते। मुहल्ला चौबयाना निवासी कृपाल सिंह उनकी बात आगे बढ़ाते हुए कहते हैं कि मौजूदा समय में तो राजनीत कौ चेहरा ही बदल गओ है। अब नेता हो या पार्टी सबई को एक ही लक्ष्य सत्ता पावे को हो गओ। ईसें नीत, सिद्धांत कैवे के रह गए हैं और नेतन ने खुटिया पै सिद्धांत टांग दए।
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छत्रसालपुरा निवासी अनिल कुमार कहते हैं कि पैले के समय में नेतन को अपनो नाम हतो। जब वे सड़कन पर उतरते तो उनके पीछे जनता की भीड़ हो जातती। अब नेतन के पीछे उनकी पार्टी के कार्यकर्ता व चापलूसों की फौज दिखाई देत। ग्राम गदयाना निवासी मलखान सिंह ने उनकी बात का समर्थन करते हुए कहते हैं कि नेतन की हालत जा हो गई कि वे अकेले अपनी दम पर चुनाव लड़वे की हैसियत में नई रह गए। ऐई वजह से निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव में पिछड़ जात। मोहल्ला तलैयापुरा निवासी नरेंद्र कुमार साहू कहते हैं कि अब तो गठबंधन की राजनीति फिर से लौट आई है। अकेले पार्टी चुनाव में उतरने की हिम्मत नहीं जुटा पा रई। ईके लाजे दलन ने नीत, सिद्धांतन से समझौता कर लओ है। नेतन को भी लगत कि फलाने दल की हवा चल रही है, ईसे टिकट मिल गओ तो जीत मिलवो तय है। ई कारण कइयन को पाला बदलने की महारथ हासिल हो गई है। ऐसे नेतन को पाला बदलवे में एक मिनट नहीं लगत। इसी दौरान और लोग चाय पीने के लिए आ जाते हैं तो चुनाव चर्चा कर रहे लोग बैंच से खड़े हो जाते हैं। इससे चर्चा पर विराम लग जाता है।
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