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बांध के गेट खुलने से उफनाई शहजाद नदी, कइयों के घर में घुसा पानी
Updated Sun, 09 Sep 2018 12:53 AM IST
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बांध के गेट खोले, उफनाई शहजाद नदी, घरों में घुसा पानी
लोगों को अपने घरों से सामान निकालने का नहीं मिला मौका
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। गोविंद सागर बांध के गेट खुलने से शहजाद नदी उफना गई है। इसका पानी आसपास के घरों में घुस गया है। वहीं, हाईवे के पुल को छोड़कर शहजाद नदी के लगभग सभी पुल जलमग्न हो गए हैं, इससे वाहन चालकों को गंतव्य तक जाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ी।
कई दिनों से जिले में हो रही बारिश के चलते अधिकांश नदी, नाले उफना गए हैं। गोविंद सागर बांध में भी बड़ी मात्रा में पानी पहुंच रहा है। बांध के जल स्तर का लेवल बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पानी की निकासी की जा रही है। शुक्रवार की रात करीब सात बजे बांध के गेट खोल दिए गए थे, जो अभी भी खुले हुए हैं। इससे शहजाद नदी ने रौद्र रूप ले लिया है। नदी के किनारे रहने वाले परिवारों के लिए मानो आफत आ गई है। नदी में पानी इतनी तेजी से आगे बढ़ा कि कइयों को घर से सामान उठाने का भी अवसर नहीं मिला। वर्तमान में ऐसे परिवार खौफ के साये में उन्हीं घरों में रह रहे हैं। शनिवार को नदी के पानी के बीच उतरकर कई लोगों ने अपने घरों से सामान उठाया। वहीं, तैराकी के शौकीन युवाओं ने नदी में छलांग लगाकर मौसम का आनंद उठाया। उनके चेहरे पर तनिक नदी के तेज बहाव की चिंता नहीं दिखी। स्थानीय कुछ लोगों का कहना है कि प्रशासन ने बांध के गेट खुलने का ऐलान कराया। इसका प्रचार-प्रसार सीमित क्षेत्र तक रखा। इससे तमाम लोगों को नदी में पानी छोड़ने की सूचना देर से मिल पाई। प्रशासन की ओर से राहत पहुंचाने के लिए कोई अभी तक पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं। मुहल्ला खिरकापुरा से होकर पंचमुखी मंदिर जाने वाला मार्ग दिन भर बाधित रहा। यहां पुल के ऊपर से पानी बह रहा था। उधर, गोविंद नगर स्थित कांशीराम कालोनीवासी नदी का रोद्र रूप देखकर भयभीत नजर आए। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्ष 2013 में साइफन चले थे तो उस समय कांशीराम आवास कालोनी परिसर में नदी का पानी पहुंच गया था। यही नहीं, उस दौरान यहां का टैंक क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसकी मरम्मत आज तक नहीं हो पाई।
कहीं साइफन न खुल जाएं, सताती रही चिंता
बांध के गेट खुलने के बाद लोगों को साइफन की चिंता सता रही है। जब शहजाद नदी उफनाई तो ट्रांसफार्मर भी इसकी चपेट में आ गया। इससे नदीपार की बिजली गुल हो गई। ऐसे में लोगों ने घरों की जगह खुले में रात गुजारी। वहीं, नाली उफनाने से दुकान में भी पानी घुस गया था।
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निजामुद्दीन, दुकानदार
दरवाजे से सटकर बह रही थी नदी
शहजाद नदी दरवाजे से सटकर बहकर रही थी। इससे पूरी रात सोए नहीं। घर से बाहर निकले तो रात्रि में कैलगुवां तिराहे के पास नालियों का पानी सड़क से होकर बह रहा था। पानी कई दुकानों में घुस गया था। हर तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा था।
अल्लू, स्थानीय व्यक्ति
ये हुए नदी से प्रभावित
नदी पार रहने वाले हबीब शाह, शाकिर अली, इकबाल कुरैशी, जाकिर पेंटर, मुहम्मद इदरीश चिल्ले मिस्त्री, महेंद्र खटीक, रमेश पाल, ताहिर कुरैशी, वाहिद, कदीर मिस्त्री, शकावत, रज्जव, बृजेश, गनेश पाल, जुम्मन, नसीम मिस्त्री, मुनव्वर, शाहिद, हाफिज, नजीर सागर वाले, लखनलाल, जहरी चच्चा, साहेब आलम, शरीफ, अख्तर कमर, जहीर ड्राइवर, विन्नी, वारी, शकीला, नासिर, फरीदा के घर शहजाद नदी के पानी से प्रभावित हुए हैं।
इतने खुले गेट
गोविंद सागर बांध के 16 गेट खुले हुए हैं। इनमें आठ गेट छह फीट एवं आठ गेट चार फीट खोलकर पानी की निकासी की जा रही है। इससे ग्यारह हजार पांच सौ बयालीस क्यूसिक पानी निकाला गया है। अधिकारियों का कहना है कि बांध के ऊपरी क्षेत्र से पानी आना कम हुआ है। ऐसी स्थिति में बांध के गेट कम किए जा सकते हैं।
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लोगों को अपने घरों से सामान निकालने का नहीं मिला मौका
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। गोविंद सागर बांध के गेट खुलने से शहजाद नदी उफना गई है। इसका पानी आसपास के घरों में घुस गया है। वहीं, हाईवे के पुल को छोड़कर शहजाद नदी के लगभग सभी पुल जलमग्न हो गए हैं, इससे वाहन चालकों को गंतव्य तक जाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ी।
कई दिनों से जिले में हो रही बारिश के चलते अधिकांश नदी, नाले उफना गए हैं। गोविंद सागर बांध में भी बड़ी मात्रा में पानी पहुंच रहा है। बांध के जल स्तर का लेवल बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पानी की निकासी की जा रही है। शुक्रवार की रात करीब सात बजे बांध के गेट खोल दिए गए थे, जो अभी भी खुले हुए हैं। इससे शहजाद नदी ने रौद्र रूप ले लिया है। नदी के किनारे रहने वाले परिवारों के लिए मानो आफत आ गई है। नदी में पानी इतनी तेजी से आगे बढ़ा कि कइयों को घर से सामान उठाने का भी अवसर नहीं मिला। वर्तमान में ऐसे परिवार खौफ के साये में उन्हीं घरों में रह रहे हैं। शनिवार को नदी के पानी के बीच उतरकर कई लोगों ने अपने घरों से सामान उठाया। वहीं, तैराकी के शौकीन युवाओं ने नदी में छलांग लगाकर मौसम का आनंद उठाया। उनके चेहरे पर तनिक नदी के तेज बहाव की चिंता नहीं दिखी। स्थानीय कुछ लोगों का कहना है कि प्रशासन ने बांध के गेट खुलने का ऐलान कराया। इसका प्रचार-प्रसार सीमित क्षेत्र तक रखा। इससे तमाम लोगों को नदी में पानी छोड़ने की सूचना देर से मिल पाई। प्रशासन की ओर से राहत पहुंचाने के लिए कोई अभी तक पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं। मुहल्ला खिरकापुरा से होकर पंचमुखी मंदिर जाने वाला मार्ग दिन भर बाधित रहा। यहां पुल के ऊपर से पानी बह रहा था। उधर, गोविंद नगर स्थित कांशीराम कालोनीवासी नदी का रोद्र रूप देखकर भयभीत नजर आए। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्ष 2013 में साइफन चले थे तो उस समय कांशीराम आवास कालोनी परिसर में नदी का पानी पहुंच गया था। यही नहीं, उस दौरान यहां का टैंक क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसकी मरम्मत आज तक नहीं हो पाई।
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कहीं साइफन न खुल जाएं, सताती रही चिंता
बांध के गेट खुलने के बाद लोगों को साइफन की चिंता सता रही है। जब शहजाद नदी उफनाई तो ट्रांसफार्मर भी इसकी चपेट में आ गया। इससे नदीपार की बिजली गुल हो गई। ऐसे में लोगों ने घरों की जगह खुले में रात गुजारी। वहीं, नाली उफनाने से दुकान में भी पानी घुस गया था।
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निजामुद्दीन, दुकानदार
दरवाजे से सटकर बह रही थी नदी
शहजाद नदी दरवाजे से सटकर बहकर रही थी। इससे पूरी रात सोए नहीं। घर से बाहर निकले तो रात्रि में कैलगुवां तिराहे के पास नालियों का पानी सड़क से होकर बह रहा था। पानी कई दुकानों में घुस गया था। हर तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा था।
अल्लू, स्थानीय व्यक्ति
ये हुए नदी से प्रभावित
नदी पार रहने वाले हबीब शाह, शाकिर अली, इकबाल कुरैशी, जाकिर पेंटर, मुहम्मद इदरीश चिल्ले मिस्त्री, महेंद्र खटीक, रमेश पाल, ताहिर कुरैशी, वाहिद, कदीर मिस्त्री, शकावत, रज्जव, बृजेश, गनेश पाल, जुम्मन, नसीम मिस्त्री, मुनव्वर, शाहिद, हाफिज, नजीर सागर वाले, लखनलाल, जहरी चच्चा, साहेब आलम, शरीफ, अख्तर कमर, जहीर ड्राइवर, विन्नी, वारी, शकीला, नासिर, फरीदा के घर शहजाद नदी के पानी से प्रभावित हुए हैं।
इतने खुले गेट
गोविंद सागर बांध के 16 गेट खुले हुए हैं। इनमें आठ गेट छह फीट एवं आठ गेट चार फीट खोलकर पानी की निकासी की जा रही है। इससे ग्यारह हजार पांच सौ बयालीस क्यूसिक पानी निकाला गया है। अधिकारियों का कहना है कि बांध के ऊपरी क्षेत्र से पानी आना कम हुआ है। ऐसी स्थिति में बांध के गेट कम किए जा सकते हैं।