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कुशवाहा वोट साधने में लगे राजनैतिक दल
Updated Fri, 17 Nov 2017 03:18 AM IST
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कुशवाहा वोट साधने में लगे राजनीतिक दल
ललितपुर।
राजनीतिक दलों ने निकाय चुनाव में अपने उम्मीदवार को जीत दिलाने के लिए गणित लगाना शुरू कर दिया है। सभी दल की नजर बड़े वोट बैंक के रूप में कुशवाहा बिरादरी पर है। बसपा, कांग्रेस में जिलाध्यक्ष स्वयं इसका जिम्मा अपने कंधों पर लिए हुए हैं तो भाजपा में सदर विधायक ने इसकी जिम्मेदारी ले रखी है। इस मामले में सपा अभी तक कोई रणनीति तैयार नहीं कर सकी है।
नगर पालिका परिषद अध्यक्ष पद के चुनाव प्रचार में विकास पर जातिवाद हावी होता दिखाई दे रहा है। शहर में सबसे बड़ी संख्या कुशवाहा जाति की है। इसका वोट करीब 12 हजार के आसपास माना जा रहा है। इस कारण हर दल की उस पर सीधी नजर है। विधानसभा चुनाव में यह बिरादरी भाजपा के साथ रही थी। निकाय चुनाव में कुशवाहा बिरादरी का एक उम्मीदवार निर्दलीय के तौर पर आ जाने से भाजपा को इसके खिसकने का भय सताने लगा है। हालांकि, सदर विधायक रामरतन कुशवाहा ने वोटों के बिखराव को रोकने के लिए बिरादरी के लोगों से संपर्क साधना प्रारंभ कर दिया है। उनका कहना है कि मुखिया, माते ही बरगलाने में आ रहे हैं। लेकिन समाज का बड़ा हिस्सा भाजपा के ही साथ है। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के जिलाध्यक्ष कैलाश नारायण कुशवाहा का कहना है कि कुछ लोग दुष्प्रचार फैला रहे हैं। बसपा ने कुशवाहा समाज के तीन विधायक बनवाए हैं, इसलिए कुशवाहा समाज का वोट उनके साथ रहेगा। कांग्रेस जिलाध्यक्ष दुर्गा प्रसाद कुशवाहा का कहना है कि कोई भी समाज एकजुट होकर किसी एक के लिए वोट नहीं करता है, जो लोग इस तरह का प्रचार कर रहे हैं, वह पूरी तरह निराधार है। कुशवाहा समाज का वोट कांग्रेस के साथ अन्य दलों को भी मिलेगा। सपा की जिला प्रभारी ज्योति सिंह का कहना है कि समाजवादी पार्टी की अधिकृत उम्मीदवार को सभी वर्ग से वोट मिल रहा है। कुशवाहा समाज का वोट हासिल करने के लिए रणनीति तैयार की जा रही है। आने वाले दिनों में पार्टी के कई दिग्गज नेता प्रचार में दिखाई देंगे।
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ललितपुर।
राजनीतिक दलों ने निकाय चुनाव में अपने उम्मीदवार को जीत दिलाने के लिए गणित लगाना शुरू कर दिया है। सभी दल की नजर बड़े वोट बैंक के रूप में कुशवाहा बिरादरी पर है। बसपा, कांग्रेस में जिलाध्यक्ष स्वयं इसका जिम्मा अपने कंधों पर लिए हुए हैं तो भाजपा में सदर विधायक ने इसकी जिम्मेदारी ले रखी है। इस मामले में सपा अभी तक कोई रणनीति तैयार नहीं कर सकी है।
नगर पालिका परिषद अध्यक्ष पद के चुनाव प्रचार में विकास पर जातिवाद हावी होता दिखाई दे रहा है। शहर में सबसे बड़ी संख्या कुशवाहा जाति की है। इसका वोट करीब 12 हजार के आसपास माना जा रहा है। इस कारण हर दल की उस पर सीधी नजर है। विधानसभा चुनाव में यह बिरादरी भाजपा के साथ रही थी। निकाय चुनाव में कुशवाहा बिरादरी का एक उम्मीदवार निर्दलीय के तौर पर आ जाने से भाजपा को इसके खिसकने का भय सताने लगा है। हालांकि, सदर विधायक रामरतन कुशवाहा ने वोटों के बिखराव को रोकने के लिए बिरादरी के लोगों से संपर्क साधना प्रारंभ कर दिया है। उनका कहना है कि मुखिया, माते ही बरगलाने में आ रहे हैं। लेकिन समाज का बड़ा हिस्सा भाजपा के ही साथ है। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के जिलाध्यक्ष कैलाश नारायण कुशवाहा का कहना है कि कुछ लोग दुष्प्रचार फैला रहे हैं। बसपा ने कुशवाहा समाज के तीन विधायक बनवाए हैं, इसलिए कुशवाहा समाज का वोट उनके साथ रहेगा। कांग्रेस जिलाध्यक्ष दुर्गा प्रसाद कुशवाहा का कहना है कि कोई भी समाज एकजुट होकर किसी एक के लिए वोट नहीं करता है, जो लोग इस तरह का प्रचार कर रहे हैं, वह पूरी तरह निराधार है। कुशवाहा समाज का वोट कांग्रेस के साथ अन्य दलों को भी मिलेगा। सपा की जिला प्रभारी ज्योति सिंह का कहना है कि समाजवादी पार्टी की अधिकृत उम्मीदवार को सभी वर्ग से वोट मिल रहा है। कुशवाहा समाज का वोट हासिल करने के लिए रणनीति तैयार की जा रही है। आने वाले दिनों में पार्टी के कई दिग्गज नेता प्रचार में दिखाई देंगे।
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