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लक्ष्मण शक्ति का मंचन देख भाव विभोर हुए लोग
Updated Mon, 05 Nov 2018 02:09 AM IST
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लक्ष्मण शक्ति का मंचन देख भाव विभोर हुए लोग
बार (ललितपुर)। ग्राम बस्तगुवां में रामलीला के ग्यारवें दिन लक्ष्मण शक्ति, कुंभकरण वध की लीला रोचक ढंग से हुई। वानर सेना ने लंका को चारों तरफ से घेर लिया, सूचना मिलने पर रावण ने राक्षसी सेना को आदेश दिया कि शत्रु को युद्ध में पराजित करें। रावण ने सेनापति, नरान्तक, देवान्तक को युद्ध भूमि में भेजा। लक्ष्मण ने नरान्तक, देवान्तक सहित राक्षसी सेना को पराजित किया, नरान्तक, देवान्तक के वध से रावण ने क्रोधित होते हुए, अपने पुत्र मेघनाथ को बदला लेने, श्रीराम और लक्ष्मण को युद्ध भूमि में पराजित करने का आदेश दिया। मेघनाद ने युद्ध भूमि में जाकर हड़कंप मचा दिया। वानरसेना और राक्षसी सेना के मध्य भीषण संग्राम हुआ, लक्ष्मण ने अपने वाणों से मेघनाथ की सभी शस्त्रों को काट दिया, जिससे मेघनाथ भयभीत हो गया, उसने अपने प्राणों की रक्षा हेतु ब्रह्मा की दी गयी वीरघाटनी शक्ति का प्रहार लक्ष्मण पर कर दिया, जिससे लक्ष्मण शक्ति के प्रहार से मूर्छित हो गये। इससे वानरसेना में कोहराम मच गया, हनुमानजी मूर्छित लक्ष्मण को उठाकर भगवान श्रीराम के पास ले गये। श्रीराम लक्ष्मण की दशा देखकर विलाप करने लगते है। जामवंत श्रीराम को सब्र रखने, लंका से वैद्व सुषेन को बुलाने का आग्रह करते है, जिस पर हनुमान लंका जाकर वैद्व सुसेन को ले आते हैं, सुषेण लक्ष्मण की नाड़ी देख कर कहते हैं कि रात्रि में अगर द्रौणागिरि पर्वत से संजीवनी बूटी लायी जाए, तो बूटी के सेवन से लक्ष्मण के प्राण बच सकते हैं। अंत में राम वाणों से कुंभकरण का संहार कर देते है। व्यास गद्दी पर रामेश्वर पटैरिया रहे। संचालन रवि बबेले ने किया। इस अवसर पर महेंद्र प्रताप सिंह, जय सिंह, रामरक्षपाल सिंह, सोनेजू, सोनसिंह, सुंदर सिंह, राजेंद्र प्रताप सिंह, जयपालसिंह, धर्मेंद्र सिंह का विशेष सहयोग रहा ।
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बार (ललितपुर)। ग्राम बस्तगुवां में रामलीला के ग्यारवें दिन लक्ष्मण शक्ति, कुंभकरण वध की लीला रोचक ढंग से हुई। वानर सेना ने लंका को चारों तरफ से घेर लिया, सूचना मिलने पर रावण ने राक्षसी सेना को आदेश दिया कि शत्रु को युद्ध में पराजित करें। रावण ने सेनापति, नरान्तक, देवान्तक को युद्ध भूमि में भेजा। लक्ष्मण ने नरान्तक, देवान्तक सहित राक्षसी सेना को पराजित किया, नरान्तक, देवान्तक के वध से रावण ने क्रोधित होते हुए, अपने पुत्र मेघनाथ को बदला लेने, श्रीराम और लक्ष्मण को युद्ध भूमि में पराजित करने का आदेश दिया। मेघनाद ने युद्ध भूमि में जाकर हड़कंप मचा दिया। वानरसेना और राक्षसी सेना के मध्य भीषण संग्राम हुआ, लक्ष्मण ने अपने वाणों से मेघनाथ की सभी शस्त्रों को काट दिया, जिससे मेघनाथ भयभीत हो गया, उसने अपने प्राणों की रक्षा हेतु ब्रह्मा की दी गयी वीरघाटनी शक्ति का प्रहार लक्ष्मण पर कर दिया, जिससे लक्ष्मण शक्ति के प्रहार से मूर्छित हो गये। इससे वानरसेना में कोहराम मच गया, हनुमानजी मूर्छित लक्ष्मण को उठाकर भगवान श्रीराम के पास ले गये। श्रीराम लक्ष्मण की दशा देखकर विलाप करने लगते है। जामवंत श्रीराम को सब्र रखने, लंका से वैद्व सुषेन को बुलाने का आग्रह करते है, जिस पर हनुमान लंका जाकर वैद्व सुसेन को ले आते हैं, सुषेण लक्ष्मण की नाड़ी देख कर कहते हैं कि रात्रि में अगर द्रौणागिरि पर्वत से संजीवनी बूटी लायी जाए, तो बूटी के सेवन से लक्ष्मण के प्राण बच सकते हैं। अंत में राम वाणों से कुंभकरण का संहार कर देते है। व्यास गद्दी पर रामेश्वर पटैरिया रहे। संचालन रवि बबेले ने किया। इस अवसर पर महेंद्र प्रताप सिंह, जय सिंह, रामरक्षपाल सिंह, सोनेजू, सोनसिंह, सुंदर सिंह, राजेंद्र प्रताप सिंह, जयपालसिंह, धर्मेंद्र सिंह का विशेष सहयोग रहा ।