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1800 के छात्रांकन पर सात शिक्षक, तो कैसा होगा पढ़ाई का स्तर

Sat, 13 Aug 2022 02:00 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 13 Aug 2022 02:00 AM IST
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1800 child school problem
बांसी/ललितपुर। कस्बा में स्थित इंटरमीडिएट कॉलेज की पांच दशक बाद भी मरम्मत नहीं हुई है। कई भवन जर्जर हालत में आ गए हैं। यहां पर विद्यार्थियों के बैठने तक की व्यवस्थाएं नहीं हैं। यहीं नहीं 1800 के छात्रांकन पर महज सात अध्यापक तैनात हैं। इंटरमीडिएट में 400 छात्रों के लिए एक सत्र और एक कक्ष है। ऐसे में पढ़ाई के स्तर की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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बांसी कस्बा में वर्ष 1965 में विद्यालय भवन का निर्माण किया गया था। इसके कुछ ही वर्षों में कुछ अन्य कक्षों का निर्माण हुआ और इंटरमीडिएट कॉलेज का दर्जा प्राप्त हुआ। यह पांच दशक से अधिक समय बाद भी क्षेत्र में इकलौता सहायता प्राप्त कॉलेज है। अब कॉलेज का भवन मरम्मत के अभाव में जर्जर हाल में है। बारिश में सभी कक्षाओं में पानी आ रहा है। किसी भी कक्ष में बैठने की स्थिति नहीं है।
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कुछ कमरे तो पूरी तरह से टूटकर गिर गए हैं। विद्यार्थियों के कक्ष तो दूर कार्यालय कक्ष में पानी आने से कंप्यूटर खराब हो चुका है।
वर्तमान में कालेज का छात्रांकन 1800 के लगभग है। इन बच्चों को पढ़ाई के लिए शिक्षक तक नहीं है। यहां पर प्रधानाचार्य समेत सात शिक्षक हैं। इसके अलावा दो पीटीए और तीन मैनेजमेंट की ओर से पढ़ाई का कार्य कर रहे हैं।
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एक कमरे में पढ़ते हैं 400 विद्यार्थी
कक्षा 12वीं में 400 विद्यार्थियों का नामांकन है। इन्हें पढ़ाई के लिए एक सत्र ही लग रहा है। इससे बैठने तक में समस्या हो रही है। ऐसे में बालक और बालिकाएं दोनों को बैठना पड़ रहा है। ऐसे में कई बालिकाएं विद्यालय आने तक में संकोच करतीं है। कई विद्यार्थी कक्षा में खड़े रहकर ही पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

क्षेत्र में नहीं है एक भी इंटरमीडिएट कॉलेज
कस्बा बांसी की आबादी लगभग 12 हजार से अधिक है। इसके साथ ही आस-पास की ग्राम पंचायतों में कॉलेज नहीं है। ऐसे में कक्षा नौ से 12 वीं तक बच्चों को पढ़ाई के लिए इकलौता कस्बा बांसी का इंटरमीडिएट कॉलेज ही है। इससे कॉलेज में 18 सौ बच्चे अध्ययनरत हैं। कई कक्षाओं में अधिक बच्चे होने के चलते बैठने तक की व्यवस्था नहीं है। इसके बाद भी पढाई कराने के लिए इसी विद्यालय में पहुंचाने के लिए मजबूर हैं।
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