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मड़ावरा उड़द क्रय केंद्र बंद होने से किसानों में छायी मायूसी
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मड़ावरा उड़द क्रय केंद्र बंद होने से किसानों में मायूसी
दो दिन पहले टोकन को लेकर हुए विवाद और धरना-प्रदर्शन के बाद से बंद है केन्द्र
अमर उजाला ब्यूरो
मड़ावरा (ललितपुर)। मड़ावरा उड़द क्रय केंद्र पर पिछले तीन दिन पहले शुक्रवार को तहसीलदार और किसान के मध्य टोकन नंबर लेने को लेकर विवाद हो गया था, जिसके बाद किसानों द्वारा किसान के साथ हुई मारपीट के विरोध में धरना प्रदर्शन और सड़क जाम तक किया गया। इसके बाद डीएम द्वारा इस क्रय केंद्र पर उड़द की खरीद बंद करने के आदेश दे दिए, लेकिन खरीद बंद होने से अब वास्तविक किसान अपनी उड़द की उपज बेचने से वंचित रह गए हैं। जबकि दूसरी ओर व्यापारी अपना माल दलालों और प्रभावशाली लोगों के माध्यम से केंद्र पर बेचने में सफल रहे। हालांकि कई लोगों के पकड़े जाने पर जिला प्रशासन द्वारा ट्रैक्टर पकड़कर सीज भी किए गए।
अनाज मंडियों और बाजार में उड़द की फसल का खरीद मूल्य बहुत कम होने के कारण सरकार ने किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम दिलाने के उद्देश्य से वर्ष 2018-19 के अंतर्गत 5600 रुपये प्रति क्विंटल उड़द की फसल का समर्थन मूल निर्धारित करके खरीद के निर्देश जारी किया था। सरकार द्वारा इन केंद्रों पर उड़द की खरीद एक नवंबर से शुरू करके 90 दिन की अवधि निर्धारित की गई थी। लेकिन उड़द क्रय केंद्रों पर किसानों से पहले दलालों और प्रभावशाली लोगों ने सेंधमारी शुरू कर दी, जिसके चलते सैकड़ों की संख्या में किसान इस योजना का लाभ लेने से वंचित रह गए। किसानों की माने तो मड़ावरा क्रय केंद्र पर गुणवत्ता को ताक पर रखते हुये 60 प्रतिशत से ज्यादा उड़द व्यापारियों का खरीद लिया गया, जिन किसानों का उड़द केंद्र पर खरीदा गया है, उन किसानों से सुविधा शुल्क की वसूली की गई। राजनीतिक पकड़ के चलते प्रभावशाली लोग दलाली पर उतर आए। इतना ही नहीं इन लोगों ने क्रय केंद्रों पर कर्मचारियों की भांति डेरा डाल लिया और व्यापारियों से सांठगांठ करके उनका सारा माल केंद्रों पर तुलवा दिया गया और वहीं किसान हफ्तों अपनी बारी आने का इंतजार ही करते रह गए। देखते ही देखते क्षेत्र के व्यापारियों की गोदामें और बेयर हाउस खाली हो गए। काफी दिनों के इंतजार के बाद जब किसानों का नंबर नहीं आया तो कुछ किसानों ने मजबूर होकर अपने अनाज की केंद्र पर तुलाई कराने के लिये दलालों का सहारा लेना पड़ा, तब जाकर उनकी फसल की तुलाई हो सकी। लेकिन बीते शुक्रवार को मड़ावरा के रनगांव में स्थित पारौल साधन सहकारी समिति लिमिटेड के उड़द खरीद केंद्र पर गोरा कछया निवासी अशोक पुत्र नथू कुशवाहा का टोकन नबंर को लेकर तहसीलदार से विवाद हो गया था। जिसमें आरोप लगाया गया था कि तहसीलदार ने किसान के साथ अभद्रता करते हुए उसकी बेरहमी के साथ पिटाई कर दी थी। जिससे वह घायल हो गया था। किसान की पिटाई के बाद मौके पर मौजूद किसानों में आक्रोश फैल गया और किसानों ने तहसील के सामने मुख्यमार्ग पर सड़क जाम करते हुये जमकर नारेबाजी करते हुए तहसीलदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। इस घटना के बाद से मड़ावरा क्रय केंद्र पर खरीद बंद कर दी गई थी। शनिवार को जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने जिन केन्द्रों पर खरीद बंद करने का आदेश जारी किया है, उनमें पीसीएफ अमरपुर मंडी, विरधा साधन सहकारी समिति, पारौल साधन सहकारी समिति मड़ावरा शामिल हैं। मड़ावरा केंद्र पर खरीद बंद होने से किसानों के अरमानों पर भी पानी फिर गया। किसान अपना घर परिवार एवं कामकाज छोड़ के कड़ाके की ठंड में अपना अनाज को तुलवाने की आस में कई दिन रात गुजार दिए, लेकिन उनका अनाज केंद्र पर नहीं तुल सका जिससे किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। केन्द्र पर खरीद बंद होने के आदेश के बाद भी दर्जनों की संख्या में किसान अभी भी खरीद चालू होने की उम्मीद में केंद्र के बाहर डेरा जमाए हुए हैं। परेशान किसानों ने डीएम से कुछ दिनों के लिए और उड़द क्रय केंद्र को फिर से खोलने की मांग की है।
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अपनी फसल की अच्छी कीमत मिलने की उम्मीद में काफी दिनों पहले केंद्र पर रजिस्ट्रेशन कराया था, लेकिन काफी दिन बीतने के बाद भी उड़द डालने का नबंर नहीं लग पाया। जबकि केंद्र पर दलालों के माध्यम से हजारों कुंतल अनाज खरीद लिया गया। अब केंद्र बंद होने से उड़द बेचने की आखिरी उम्मीद भी खत्म हो गई है।
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- मुलायम सिंह लोधी, किसान, कारीटोरन ।
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काफी दिनों के इंतजार के बाद जब नंबर नहीं आया तो शुक्रवार को उसके बेटे ने अपनी बारी आने की बात तहसीलदार साहब से पूंछना मंहगा पड़ गया। बेटे की पिटाई भी हो गई और कुछ हाथ भी नहीं लगा। अब कौन सा मुंह लेकर घर जाएं। यह कहते हुये किसान की आंखों से आंसू छलक उठे।
- नत्थू कुशवाहा, निवासी गोरा कछया ।
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साहूकारों से लिया उधार चुकाने की उम्मीद में अपना घर का कामकाज एवं खेती किसानी भगवान भरोसे छोड़ के केंद्र पर एक हफ्ते से अपना नंबर आने का इंतजार कर रहे थे लेकिन केन्द्र प्रभारी की मनमानी एंव दलालों की दखलंदाजी के कारण किसानों का बहुत कम अनाज केंद्र पर डल पाया है। केन्द्र पर अनाज न डल पाने का हम लोगों को बहुत दुख है, लेकिन गरीबों और किसानों की कोई सुनने वाला नहीं है।
- हीरा पाल किसान, गोरा कछया।
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दो दिन पहले टोकन को लेकर हुए विवाद और धरना-प्रदर्शन के बाद से बंद है केन्द्र
अमर उजाला ब्यूरो
मड़ावरा (ललितपुर)। मड़ावरा उड़द क्रय केंद्र पर पिछले तीन दिन पहले शुक्रवार को तहसीलदार और किसान के मध्य टोकन नंबर लेने को लेकर विवाद हो गया था, जिसके बाद किसानों द्वारा किसान के साथ हुई मारपीट के विरोध में धरना प्रदर्शन और सड़क जाम तक किया गया। इसके बाद डीएम द्वारा इस क्रय केंद्र पर उड़द की खरीद बंद करने के आदेश दे दिए, लेकिन खरीद बंद होने से अब वास्तविक किसान अपनी उड़द की उपज बेचने से वंचित रह गए हैं। जबकि दूसरी ओर व्यापारी अपना माल दलालों और प्रभावशाली लोगों के माध्यम से केंद्र पर बेचने में सफल रहे। हालांकि कई लोगों के पकड़े जाने पर जिला प्रशासन द्वारा ट्रैक्टर पकड़कर सीज भी किए गए।
अनाज मंडियों और बाजार में उड़द की फसल का खरीद मूल्य बहुत कम होने के कारण सरकार ने किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम दिलाने के उद्देश्य से वर्ष 2018-19 के अंतर्गत 5600 रुपये प्रति क्विंटल उड़द की फसल का समर्थन मूल निर्धारित करके खरीद के निर्देश जारी किया था। सरकार द्वारा इन केंद्रों पर उड़द की खरीद एक नवंबर से शुरू करके 90 दिन की अवधि निर्धारित की गई थी। लेकिन उड़द क्रय केंद्रों पर किसानों से पहले दलालों और प्रभावशाली लोगों ने सेंधमारी शुरू कर दी, जिसके चलते सैकड़ों की संख्या में किसान इस योजना का लाभ लेने से वंचित रह गए। किसानों की माने तो मड़ावरा क्रय केंद्र पर गुणवत्ता को ताक पर रखते हुये 60 प्रतिशत से ज्यादा उड़द व्यापारियों का खरीद लिया गया, जिन किसानों का उड़द केंद्र पर खरीदा गया है, उन किसानों से सुविधा शुल्क की वसूली की गई। राजनीतिक पकड़ के चलते प्रभावशाली लोग दलाली पर उतर आए। इतना ही नहीं इन लोगों ने क्रय केंद्रों पर कर्मचारियों की भांति डेरा डाल लिया और व्यापारियों से सांठगांठ करके उनका सारा माल केंद्रों पर तुलवा दिया गया और वहीं किसान हफ्तों अपनी बारी आने का इंतजार ही करते रह गए। देखते ही देखते क्षेत्र के व्यापारियों की गोदामें और बेयर हाउस खाली हो गए। काफी दिनों के इंतजार के बाद जब किसानों का नंबर नहीं आया तो कुछ किसानों ने मजबूर होकर अपने अनाज की केंद्र पर तुलाई कराने के लिये दलालों का सहारा लेना पड़ा, तब जाकर उनकी फसल की तुलाई हो सकी। लेकिन बीते शुक्रवार को मड़ावरा के रनगांव में स्थित पारौल साधन सहकारी समिति लिमिटेड के उड़द खरीद केंद्र पर गोरा कछया निवासी अशोक पुत्र नथू कुशवाहा का टोकन नबंर को लेकर तहसीलदार से विवाद हो गया था। जिसमें आरोप लगाया गया था कि तहसीलदार ने किसान के साथ अभद्रता करते हुए उसकी बेरहमी के साथ पिटाई कर दी थी। जिससे वह घायल हो गया था। किसान की पिटाई के बाद मौके पर मौजूद किसानों में आक्रोश फैल गया और किसानों ने तहसील के सामने मुख्यमार्ग पर सड़क जाम करते हुये जमकर नारेबाजी करते हुए तहसीलदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। इस घटना के बाद से मड़ावरा क्रय केंद्र पर खरीद बंद कर दी गई थी। शनिवार को जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने जिन केन्द्रों पर खरीद बंद करने का आदेश जारी किया है, उनमें पीसीएफ अमरपुर मंडी, विरधा साधन सहकारी समिति, पारौल साधन सहकारी समिति मड़ावरा शामिल हैं। मड़ावरा केंद्र पर खरीद बंद होने से किसानों के अरमानों पर भी पानी फिर गया। किसान अपना घर परिवार एवं कामकाज छोड़ के कड़ाके की ठंड में अपना अनाज को तुलवाने की आस में कई दिन रात गुजार दिए, लेकिन उनका अनाज केंद्र पर नहीं तुल सका जिससे किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। केन्द्र पर खरीद बंद होने के आदेश के बाद भी दर्जनों की संख्या में किसान अभी भी खरीद चालू होने की उम्मीद में केंद्र के बाहर डेरा जमाए हुए हैं। परेशान किसानों ने डीएम से कुछ दिनों के लिए और उड़द क्रय केंद्र को फिर से खोलने की मांग की है।
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अपनी फसल की अच्छी कीमत मिलने की उम्मीद में काफी दिनों पहले केंद्र पर रजिस्ट्रेशन कराया था, लेकिन काफी दिन बीतने के बाद भी उड़द डालने का नबंर नहीं लग पाया। जबकि केंद्र पर दलालों के माध्यम से हजारों कुंतल अनाज खरीद लिया गया। अब केंद्र बंद होने से उड़द बेचने की आखिरी उम्मीद भी खत्म हो गई है।
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- मुलायम सिंह लोधी, किसान, कारीटोरन ।
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काफी दिनों के इंतजार के बाद जब नंबर नहीं आया तो शुक्रवार को उसके बेटे ने अपनी बारी आने की बात तहसीलदार साहब से पूंछना मंहगा पड़ गया। बेटे की पिटाई भी हो गई और कुछ हाथ भी नहीं लगा। अब कौन सा मुंह लेकर घर जाएं। यह कहते हुये किसान की आंखों से आंसू छलक उठे।
- नत्थू कुशवाहा, निवासी गोरा कछया ।
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साहूकारों से लिया उधार चुकाने की उम्मीद में अपना घर का कामकाज एवं खेती किसानी भगवान भरोसे छोड़ के केंद्र पर एक हफ्ते से अपना नंबर आने का इंतजार कर रहे थे लेकिन केन्द्र प्रभारी की मनमानी एंव दलालों की दखलंदाजी के कारण किसानों का बहुत कम अनाज केंद्र पर डल पाया है। केन्द्र पर अनाज न डल पाने का हम लोगों को बहुत दुख है, लेकिन गरीबों और किसानों की कोई सुनने वाला नहीं है।
- हीरा पाल किसान, गोरा कछया।