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सावधान, एमआरपी के अलावा अलग से जीएसटी न दें उपभोक्ता
Updated Sat, 18 Nov 2017 02:54 AM IST
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सावधान: एमआरपी के अलावा अलग से जीएसटी न दें
ललितपुर।
बाजार में सामानों की खरीदारी करने पर यदि कोई व्यापारी आप से उस सामान पर चस्पा एमआरपी के अलावा अलग से जीएसटी का बिल देता है, तो उपभोक्ता उस सामान को खरीदने पर एमआरपी का ही भुगतान करें, अलग से जीएसटी न दें। इसका कारण यह है कि उस सामान पर चस्पा एमआरपी में जीएसटी को समाहित किया गया होता है। जबकि बाजार में बहुत से व्यापारी एमआरपी के अलावा भी उपभोक्ताओं से जीएसटी वसूल रहे होते हैं। इसके लिए वाणिज्यकर विभाग ने एडवाइजरी जारी की है। साथ ही उपभोक्ता वाणिज्यकर विभाग द्वारा जारी व्हाट्सएप नंबर पर शिकायत भी कर सकेंगे।
गत जुलाई माह में केंद्र व राज्य स्तर पर खरीद या बिक्री और सेवाओं पर लगने वाले कई अप्रत्यक्ष करों को समाहित करते हुए जीएसटी प्रणाली लागू की गई है। इसमें माल और सेवाओं की आपूर्ति पर कर की समान व्यवस्था की गई। उक्त व्यवस्था के तहत विभिन्न सामानों पर खरीद एवं बिक्री पर शासन द्वारा निर्धारित जीएसटी लगाया गया है। जिन सामानों पर एमआरपी होती है, उन सामानों पर कंपनियों द्वारा जीएसटी को देने के बाद ही एमआरपी निर्धारित की जाती है। यानी उस सामान की एमआरपी में जीएसटी पहले से ही लगी होती है। ऐसे में कोई भी व्यापारी किसी सामान की एमआरपी के अलावा अलग से जीएसटी की वसूली नहीं कर सकता है। ऐसे में अब व्यापारियों द्वारा उपभोक्ताओं को किसी सामान की खरीदारी करने पर जो बिल मुहैया कराया जाता है, उस बिल में व्यापारी एमआरपी के अलावा अलग से जीएसटी लिखकर अतिरिक्त रुपये की वसूली नहीं कर सकता है और यदि कोई व्यापारी एमआरपी के अलावा अलग से जीएसटी लिखकर बिल की वसूली करता है, तो उपभोक्ता उस जीएसटी को देने से मना भी कर सकता है। इसके बाद भी यदि व्यापारी एमआरपी रेट के अलावा अलग से जीएसटी की जबरन वसूली करता है, तो उपभोक्ता ऐसे व्यापारी की शिकायत वाणिज्यकर विभाग द्वारा जारी व्हाट्सएप नंबर 7235001111 पर उस बिल को भेज कर सकता है। वाणिज्यकर विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर प्रवीण कुमार श्रोतिय द्वारा बताया गया कि यदि इस प्रकार की कोई शिकायत व्हाट्सएप नंबर पर प्राप्त होगी तो जीएसटी के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। एमआरपी में जीएसटी को समाहित किया गया है, तो व्यापारी उन सामानों पर एमआरपी के अतिरिक्त अलग से जीएसटी के नाम पर वसूली नहीं कर सकता है। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील भी की है कि कोई भी सामान खरीदने पर व्यापारी से बिल जरूर लें।
समाधान योजना में व्यापारी नहीं वसूलेंगेे जीएसटी
समाधान योजना के अंतर्गत व्यापारी उपभोक्ताओं से जीएसटी की वसूली नहीं कर सकेगा। व्यापारी अपने कुल बिक्री का एक प्रतिशत की दर से खुद ही जीएसटी का भुगतान करेगा। समाधान योजना के तहत आने वाले व्यापारी को आईटीसी की सुविधा प्राप्त नहीं होती है। इसका कारण यह है कि समाधान योजना के अंतर्गत आने वाले व्यापारी से किसी माल की खरीद पर पहले ही जीएसटी को जमा करा लिया जातखा है और जब व्यापारी अपनी कुल बिक्री को बताकर एक प्रतिशत जीएसटी का भुगतान करता है, तो वहां कंपनी से खरीद के समय लगने वाला जीएसटी की राशि को घटा दिया जाता है और फिर उसके बाद ही कुल बिक्री पर एक प्रतिशत का जीएसटी देना होता है। वाणिज्यकर विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर प्रवीण श्रोतीय ने बताया कि केवल एक कर की दर की वस्तुओं की आपूर्ति होने पर, कर की विभिन्न दरों की आपूर्ति होने पर और केवल कर मुक्त वस्तुओं/समाधान के डीलर की आपूर्ति के लिए सुझाव का एक फार्मेट भी जारी किया गया है, जिस पर व्यापारी को सामान की खरीद बिक्री के साथ ही जीएसटी का विवरण भी भरना होगा।
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ललितपुर।
बाजार में सामानों की खरीदारी करने पर यदि कोई व्यापारी आप से उस सामान पर चस्पा एमआरपी के अलावा अलग से जीएसटी का बिल देता है, तो उपभोक्ता उस सामान को खरीदने पर एमआरपी का ही भुगतान करें, अलग से जीएसटी न दें। इसका कारण यह है कि उस सामान पर चस्पा एमआरपी में जीएसटी को समाहित किया गया होता है। जबकि बाजार में बहुत से व्यापारी एमआरपी के अलावा भी उपभोक्ताओं से जीएसटी वसूल रहे होते हैं। इसके लिए वाणिज्यकर विभाग ने एडवाइजरी जारी की है। साथ ही उपभोक्ता वाणिज्यकर विभाग द्वारा जारी व्हाट्सएप नंबर पर शिकायत भी कर सकेंगे।
गत जुलाई माह में केंद्र व राज्य स्तर पर खरीद या बिक्री और सेवाओं पर लगने वाले कई अप्रत्यक्ष करों को समाहित करते हुए जीएसटी प्रणाली लागू की गई है। इसमें माल और सेवाओं की आपूर्ति पर कर की समान व्यवस्था की गई। उक्त व्यवस्था के तहत विभिन्न सामानों पर खरीद एवं बिक्री पर शासन द्वारा निर्धारित जीएसटी लगाया गया है। जिन सामानों पर एमआरपी होती है, उन सामानों पर कंपनियों द्वारा जीएसटी को देने के बाद ही एमआरपी निर्धारित की जाती है। यानी उस सामान की एमआरपी में जीएसटी पहले से ही लगी होती है। ऐसे में कोई भी व्यापारी किसी सामान की एमआरपी के अलावा अलग से जीएसटी की वसूली नहीं कर सकता है। ऐसे में अब व्यापारियों द्वारा उपभोक्ताओं को किसी सामान की खरीदारी करने पर जो बिल मुहैया कराया जाता है, उस बिल में व्यापारी एमआरपी के अलावा अलग से जीएसटी लिखकर अतिरिक्त रुपये की वसूली नहीं कर सकता है और यदि कोई व्यापारी एमआरपी के अलावा अलग से जीएसटी लिखकर बिल की वसूली करता है, तो उपभोक्ता उस जीएसटी को देने से मना भी कर सकता है। इसके बाद भी यदि व्यापारी एमआरपी रेट के अलावा अलग से जीएसटी की जबरन वसूली करता है, तो उपभोक्ता ऐसे व्यापारी की शिकायत वाणिज्यकर विभाग द्वारा जारी व्हाट्सएप नंबर 7235001111 पर उस बिल को भेज कर सकता है। वाणिज्यकर विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर प्रवीण कुमार श्रोतिय द्वारा बताया गया कि यदि इस प्रकार की कोई शिकायत व्हाट्सएप नंबर पर प्राप्त होगी तो जीएसटी के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। एमआरपी में जीएसटी को समाहित किया गया है, तो व्यापारी उन सामानों पर एमआरपी के अतिरिक्त अलग से जीएसटी के नाम पर वसूली नहीं कर सकता है। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील भी की है कि कोई भी सामान खरीदने पर व्यापारी से बिल जरूर लें।
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समाधान योजना में व्यापारी नहीं वसूलेंगेे जीएसटी
समाधान योजना के अंतर्गत व्यापारी उपभोक्ताओं से जीएसटी की वसूली नहीं कर सकेगा। व्यापारी अपने कुल बिक्री का एक प्रतिशत की दर से खुद ही जीएसटी का भुगतान करेगा। समाधान योजना के तहत आने वाले व्यापारी को आईटीसी की सुविधा प्राप्त नहीं होती है। इसका कारण यह है कि समाधान योजना के अंतर्गत आने वाले व्यापारी से किसी माल की खरीद पर पहले ही जीएसटी को जमा करा लिया जातखा है और जब व्यापारी अपनी कुल बिक्री को बताकर एक प्रतिशत जीएसटी का भुगतान करता है, तो वहां कंपनी से खरीद के समय लगने वाला जीएसटी की राशि को घटा दिया जाता है और फिर उसके बाद ही कुल बिक्री पर एक प्रतिशत का जीएसटी देना होता है। वाणिज्यकर विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर प्रवीण श्रोतीय ने बताया कि केवल एक कर की दर की वस्तुओं की आपूर्ति होने पर, कर की विभिन्न दरों की आपूर्ति होने पर और केवल कर मुक्त वस्तुओं/समाधान के डीलर की आपूर्ति के लिए सुझाव का एक फार्मेट भी जारी किया गया है, जिस पर व्यापारी को सामान की खरीद बिक्री के साथ ही जीएसटी का विवरण भी भरना होगा।
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