{"_id":"5e62a8618ebc3ec5535e8da2","slug":"165-buses-registered-on-paper-half-running-on-road-lalitpur-news-jhs1619108111","type":"story","status":"publish","title_hn":"कागजों में दर्ज 165 बसें, सड़क पर चल रहीं आधी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कागजों में दर्ज 165 बसें, सड़क पर चल रहीं आधी
विज्ञापन
बस स्टैंड
- फोटो : LALITPUR
ललितपुर। परिवहन विभाग द्वारा यातायात की सुविधा के लिए बस संचालकों को परमिट तो जारी कर दिए। लेकिन यह बसें केवल विभाग के कागजों में ही दौड़ रही हैं। सड़कों से आधी बसे नदारद हो गईं है। इसके अलावा निर्धारित रूटों पर बसे नहीं चलने से लोगों को यात्रा करने में परेशानी हो रही है। मजबूरन उन्हें डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
परिवहन विभाग द्वारा यातयात को सुगम बनाने के लिए तय रूटों पर बसों के संचालन के लिए परमिट जारी किए जाते हैं। जिसमें बसों के संचालन का रूट तय किया जाता है। रूट के साथ ही बसों को विभागीय नियमों का पालन करना होता है। इनमें बसों को तय रूट तक नियमित चलना और सवारियों की संख्या में भी तय की जाती है। इसके साथ ही बसों का संचालन में कागजों के साथ ही बसों की फिटनिस व अन्य सुविधाओं से लैस रखना होता है। वर्तमान में परिवहन विभाग द्वारा 74 अंतर क्षेत्रीय परमिट जारी किए। जो मुख्यालय से आस पास के जिलों में चलती है। इसके अलावा मुख्यालय से ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी 91 परमिट जारी किए हैं। इस तरह जनपद की यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ रखने के लिए 165 परमिट भले ही दिए गए हों, लेकिन अधिकांश बसें केवल विभागीय अभिलेखों में ही दर्ज रह गईं है। सड़कों से नदारद बनी हुए हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए कई वाहनों के सहारे तक पहुंचना पड़ रहा है। इतना ही नहीं अधिकांश बसें अपने तय रुट से आधी दूरी तक ही पहुंच रहीं है। कुछ मार्ग तो ऐसे हैं जहां पर दिन में केवल एक ही बस का संचालन हो रहा है। यहां पर लोग बसों की छत पर बैठकर तो बसों में ठस कर यात्रा करने को मजबूर बने हुुए है। जिससे दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार अनदेखा कर रहे हैं।
बसों के लिए परमिट भले ही तय रूट के हुए हों, लेकिन बस संचालक अपने मनमाने रूट पर ही बस को चला रहे हैं। इससे यात्रा करने में असुविधा हो रही है।
- राजेश
बसों की गति बहुत कम है। स्थिति यह है कि 55 किलोमीटर की दूरी को तीन घंटे का समय लग रहा है। इससे यात्री अपने समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं।
- दिलीप सिंह
अधिकांश बसें खटारा हो गईं है। जो समय अनुसार अपनी रुट की दूरी तय नहीं कर पा रहीं है। इससे यात्रा करने में समय बर्बाद हो रहा है।
- डॉ. विवेक पस्तोर
बसों के रूट तय किए गए हैं, इसके बाद भी नियमित संचालन नहीं होने की जानकारी मिली है। जिसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
- बीके आस्थाना, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी
विज्ञापन
परिवहन विभाग द्वारा यातयात को सुगम बनाने के लिए तय रूटों पर बसों के संचालन के लिए परमिट जारी किए जाते हैं। जिसमें बसों के संचालन का रूट तय किया जाता है। रूट के साथ ही बसों को विभागीय नियमों का पालन करना होता है। इनमें बसों को तय रूट तक नियमित चलना और सवारियों की संख्या में भी तय की जाती है। इसके साथ ही बसों का संचालन में कागजों के साथ ही बसों की फिटनिस व अन्य सुविधाओं से लैस रखना होता है। वर्तमान में परिवहन विभाग द्वारा 74 अंतर क्षेत्रीय परमिट जारी किए। जो मुख्यालय से आस पास के जिलों में चलती है। इसके अलावा मुख्यालय से ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी 91 परमिट जारी किए हैं। इस तरह जनपद की यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ रखने के लिए 165 परमिट भले ही दिए गए हों, लेकिन अधिकांश बसें केवल विभागीय अभिलेखों में ही दर्ज रह गईं है। सड़कों से नदारद बनी हुए हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए कई वाहनों के सहारे तक पहुंचना पड़ रहा है। इतना ही नहीं अधिकांश बसें अपने तय रुट से आधी दूरी तक ही पहुंच रहीं है। कुछ मार्ग तो ऐसे हैं जहां पर दिन में केवल एक ही बस का संचालन हो रहा है। यहां पर लोग बसों की छत पर बैठकर तो बसों में ठस कर यात्रा करने को मजबूर बने हुुए है। जिससे दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार अनदेखा कर रहे हैं।
विज्ञापन
बसों के लिए परमिट भले ही तय रूट के हुए हों, लेकिन बस संचालक अपने मनमाने रूट पर ही बस को चला रहे हैं। इससे यात्रा करने में असुविधा हो रही है।
- राजेश
बसों की गति बहुत कम है। स्थिति यह है कि 55 किलोमीटर की दूरी को तीन घंटे का समय लग रहा है। इससे यात्री अपने समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं।
- दिलीप सिंह
अधिकांश बसें खटारा हो गईं है। जो समय अनुसार अपनी रुट की दूरी तय नहीं कर पा रहीं है। इससे यात्रा करने में समय बर्बाद हो रहा है।
- डॉ. विवेक पस्तोर
बसों के रूट तय किए गए हैं, इसके बाद भी नियमित संचालन नहीं होने की जानकारी मिली है। जिसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
- बीके आस्थाना, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी