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्राइवेट स्कूलों की मनमानी रोकने में लाचार हैं अफसर या दे रहे संरक्षण
Updated Sat, 21 Jul 2018 01:56 AM IST
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प्राइवेट स्कूलों की मनमानी रोकने में अफसर लाचार
ललितपुर। शहर में संचालित प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर जिला प्रशासन व जिला बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी रोक नहीं लगा पा रहे हैं। शासनादेश को ताक पर रखते हुए मनमाने तरीके से फीस में बढ़ोतरी की जा रही है, साथ ही पाठ्यक्रम बदलकर अभिभावकों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। पिछले महीने नगर खंड शिक्षा अधिकारी ने रानी लक्ष्मीबाई पब्लिक स्कूल और एसडीएस स्कूल को इन्हीं आरोपों के चलते नोटिस जारी किया था, पर, कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
बीते दिनों वार्ड नंबर 26 के पार्षद अनुराग जैन शैलू ने आईजीआरएस पर इन प्राइवेट स्कूलों की मनमानी की शिकायत की थी। इसके बाद बेसिक शिक्षा विभाग की जांच में यह सामने आया था कि इन दोनों ही विद्यालयों ने पिछले तीन वर्षों में हर वर्ष फीस बढ़ाई है। इसके अलावा दोनों ही विद्यालयों में हर वर्ष बिना प्रशासनिक अनुमति के पाठ्यक्रम में बदलाव कर एक निश्चित दुकान से खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है। इसी के चलते नगर खंड शिक्षा अधिकारी बृजेश सिंह ने बीते माह 25 जून को दोनों की विद्यालयों एसडीएस व आरएलपीएस के प्रबंधक/प्रधानाचार्य को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था। नोटिस जारी किए पूरा एक माह बीतने वाला है, लेकिन अभी तक इन विद्यालयों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। बृहस्पतिवार को कुछ अभिभावकों ने जिलाधिकारी और जिला विद्यालय निरीक्षक को ज्ञापन सौंपकर एसडीएस स्कूल पर प्रवेश होने के बाद भी बीच सत्र में फीस बढ़ोतरी करने के आरोप लगाए थे। उन्होंने जिलाधिकारी से स्कूल में हो रही मनमानी पर रोक लगाने और फीस वापस कराने की मांग की है। शिकायती पत्र पर अनुराग सिंह, नरेंद्र सिंह राजपूत, अंशुल पाठक, अंकित चौबे व हरगोविंद आदि के हस्ताक्षर हैं।
झूठा शपथ पत्र देने पर होनी चाहिए एफआईआर
प्राइवेट स्कूलों की मनमानी को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने पिछले साल सभी प्राइवेट स्कूलों के प्रबंधक/प्रधानाचार्य से शपथ पत्र लिए थे। शपथ पत्र में यह कहा गया था कि नियमानुसार तीन वर्ष से पहले फीस में बढ़ोतरी नहीं करेंगे और पाठ्यक्रम भी नहीं बदलेंगे। इसके अलावा पाठ्य पुस्तकों, स्टेशनरी और स्कूल ड्रेस को खरीदने के लिए अभिभावकों को किसी निश्चित दुकान के लिए बाध्य नहीं किया जाए। स्कूलों द्वारा किए गए यह शपथ पत्र झूठे साबित हो रहे हैं। झूठे शपथ देने के आरोप में नियम के मुताबिक एफआईआर दर्ज कराने का प्रावधान है। बीते दिनों अपर जिलाधिकारी व शैक्षिक विवाद निस्तारण समिति अध्यक्ष योगेंद्र बहादुर सिंह ने कहा था कि झूठा शपथ पत्र देने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ, वहीं एसडीएस स्कूल ने तो शपथ पत्र ही नहीं दिया था।
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दोनों स्कूलों से आया जवाब
दोनों की विद्यालयों का नोटिस जारी करके स्पष्टीकरण मांगा था, जिनका जवाब आ गया है। जल्द ही विद्यालयों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी।
- बृजेश सिंह
खंड शिक्षा अधिकारी, नगर क्षेत्र।
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ललितपुर। शहर में संचालित प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर जिला प्रशासन व जिला बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी रोक नहीं लगा पा रहे हैं। शासनादेश को ताक पर रखते हुए मनमाने तरीके से फीस में बढ़ोतरी की जा रही है, साथ ही पाठ्यक्रम बदलकर अभिभावकों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। पिछले महीने नगर खंड शिक्षा अधिकारी ने रानी लक्ष्मीबाई पब्लिक स्कूल और एसडीएस स्कूल को इन्हीं आरोपों के चलते नोटिस जारी किया था, पर, कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
बीते दिनों वार्ड नंबर 26 के पार्षद अनुराग जैन शैलू ने आईजीआरएस पर इन प्राइवेट स्कूलों की मनमानी की शिकायत की थी। इसके बाद बेसिक शिक्षा विभाग की जांच में यह सामने आया था कि इन दोनों ही विद्यालयों ने पिछले तीन वर्षों में हर वर्ष फीस बढ़ाई है। इसके अलावा दोनों ही विद्यालयों में हर वर्ष बिना प्रशासनिक अनुमति के पाठ्यक्रम में बदलाव कर एक निश्चित दुकान से खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है। इसी के चलते नगर खंड शिक्षा अधिकारी बृजेश सिंह ने बीते माह 25 जून को दोनों की विद्यालयों एसडीएस व आरएलपीएस के प्रबंधक/प्रधानाचार्य को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था। नोटिस जारी किए पूरा एक माह बीतने वाला है, लेकिन अभी तक इन विद्यालयों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। बृहस्पतिवार को कुछ अभिभावकों ने जिलाधिकारी और जिला विद्यालय निरीक्षक को ज्ञापन सौंपकर एसडीएस स्कूल पर प्रवेश होने के बाद भी बीच सत्र में फीस बढ़ोतरी करने के आरोप लगाए थे। उन्होंने जिलाधिकारी से स्कूल में हो रही मनमानी पर रोक लगाने और फीस वापस कराने की मांग की है। शिकायती पत्र पर अनुराग सिंह, नरेंद्र सिंह राजपूत, अंशुल पाठक, अंकित चौबे व हरगोविंद आदि के हस्ताक्षर हैं।
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झूठा शपथ पत्र देने पर होनी चाहिए एफआईआर
प्राइवेट स्कूलों की मनमानी को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने पिछले साल सभी प्राइवेट स्कूलों के प्रबंधक/प्रधानाचार्य से शपथ पत्र लिए थे। शपथ पत्र में यह कहा गया था कि नियमानुसार तीन वर्ष से पहले फीस में बढ़ोतरी नहीं करेंगे और पाठ्यक्रम भी नहीं बदलेंगे। इसके अलावा पाठ्य पुस्तकों, स्टेशनरी और स्कूल ड्रेस को खरीदने के लिए अभिभावकों को किसी निश्चित दुकान के लिए बाध्य नहीं किया जाए। स्कूलों द्वारा किए गए यह शपथ पत्र झूठे साबित हो रहे हैं। झूठे शपथ देने के आरोप में नियम के मुताबिक एफआईआर दर्ज कराने का प्रावधान है। बीते दिनों अपर जिलाधिकारी व शैक्षिक विवाद निस्तारण समिति अध्यक्ष योगेंद्र बहादुर सिंह ने कहा था कि झूठा शपथ पत्र देने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ, वहीं एसडीएस स्कूल ने तो शपथ पत्र ही नहीं दिया था।
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दोनों स्कूलों से आया जवाब
दोनों की विद्यालयों का नोटिस जारी करके स्पष्टीकरण मांगा था, जिनका जवाब आ गया है। जल्द ही विद्यालयों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी।
- बृजेश सिंह
खंड शिक्षा अधिकारी, नगर क्षेत्र।