{"_id":"5aaeb4d44f1c1bba758b6333","slug":"161521398996-lalitpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जंगलों में लगे लाखों पौधों की सिंचाई भगवान भरोसे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जंगलों में लगे लाखों पौधों की सिंचाई भगवान भरोसे
Updated Mon, 19 Mar 2018 12:19 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जंगलों में लगे लाखों पौधों की सिंचाई भगवान भरोसे
ललितपुर। बुंदेलखंड के ललितपुर जिले में जंगल को हरा-भरा बनाने के लिए रोपे गए लाखों पौधों की सिंचाई के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। विभाग ने केवल सड़क किनारे लगे पौधों की सिंचाई का इंतजाम कर इतिश्री कर ली है। वहीं, जंगलों में लगे लाखों पौधों को यूं ही भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। इन हालात में रोपित कोमल पौधे पूरे सीजन भर जद्दोजहद करते नजर आएंगे।
बुंदेलखंड का ललितपुर जिला वन संपदा के मामले में काफी समृद्ध है। यहां 74 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में जंगल फैला है। इसे ध्यान में रखकर शासन की ओर से इसके खाली क्षेत्र में हर साल विभिन्न योजना पौधरोपण कराए जा रहे हैं। जहां कैंप योजना में सड़क किनारे के एरिया में हरियाली के लिए पौधरोपण कराया जा रहा है। वहीं, हरित पट्टी भी विकसित की जा रही है। इस साल विभिन्न स्थानों पर कुल 35 हेक्टेयर क्षेत्र में हरित पट्टी में पौधे रोपे गए। वहीं, आठ सौ आठ हेक्टेयर क्षेत्र में सामान्य पौधरोपण में करीब आठ लाख पौधे लगाए गए। अब जब गर्मी का मौसम प्रारंभ हो गया है तो पौधों की सिंचाई की समस्या खड़ी होने लगी है। विभागीय अफसरों ने सड़क किनारे लगे पौधों को बचाने के लिए टैंकर से सिंचाई शुरू कर दी है। वहीं, हरित पट्टी में भी पौधों की सिंचाई का इंतजाम है, लेकिन सामान्य पौधरोपण की सिंचाई पर किसी का ध्यान नहीं है। यदि यही हाल बना रहा तो रोपित हुए लाखों पौधों को बचाना मुश्किल हो जाएगा। जानकारों का कहना है कि छोटे पौधों की यदि समय से सिंचाई नहीं की जाए तो न केवल उनका विकास रुक जाता है बल्कि पौधे मरने की संभावना बनी रहती है।
सिंचाई का नहीं कोई प्राविधान
सामान्य पौधरोपण में सिंचाई के लिए कोई प्राविधान नहीं है जबकि अन्य योजनाओं में रोपित पौधों की सिंचाई कराई जाती है। इस समय सड़क किनारे के पौधों की सिंचाई के लिए पांच टैंकर लगाए गए हैं। जरूरत पड़ेगी तो कुछ टैंकर किराए भी लिए जाएंगे।
विज्ञापन
आरके त्रिपाठी, एसडीओ वन ललितपुर
विज्ञापन
ललितपुर। बुंदेलखंड के ललितपुर जिले में जंगल को हरा-भरा बनाने के लिए रोपे गए लाखों पौधों की सिंचाई के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। विभाग ने केवल सड़क किनारे लगे पौधों की सिंचाई का इंतजाम कर इतिश्री कर ली है। वहीं, जंगलों में लगे लाखों पौधों को यूं ही भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। इन हालात में रोपित कोमल पौधे पूरे सीजन भर जद्दोजहद करते नजर आएंगे।
बुंदेलखंड का ललितपुर जिला वन संपदा के मामले में काफी समृद्ध है। यहां 74 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में जंगल फैला है। इसे ध्यान में रखकर शासन की ओर से इसके खाली क्षेत्र में हर साल विभिन्न योजना पौधरोपण कराए जा रहे हैं। जहां कैंप योजना में सड़क किनारे के एरिया में हरियाली के लिए पौधरोपण कराया जा रहा है। वहीं, हरित पट्टी भी विकसित की जा रही है। इस साल विभिन्न स्थानों पर कुल 35 हेक्टेयर क्षेत्र में हरित पट्टी में पौधे रोपे गए। वहीं, आठ सौ आठ हेक्टेयर क्षेत्र में सामान्य पौधरोपण में करीब आठ लाख पौधे लगाए गए। अब जब गर्मी का मौसम प्रारंभ हो गया है तो पौधों की सिंचाई की समस्या खड़ी होने लगी है। विभागीय अफसरों ने सड़क किनारे लगे पौधों को बचाने के लिए टैंकर से सिंचाई शुरू कर दी है। वहीं, हरित पट्टी में भी पौधों की सिंचाई का इंतजाम है, लेकिन सामान्य पौधरोपण की सिंचाई पर किसी का ध्यान नहीं है। यदि यही हाल बना रहा तो रोपित हुए लाखों पौधों को बचाना मुश्किल हो जाएगा। जानकारों का कहना है कि छोटे पौधों की यदि समय से सिंचाई नहीं की जाए तो न केवल उनका विकास रुक जाता है बल्कि पौधे मरने की संभावना बनी रहती है।
विज्ञापन
सिंचाई का नहीं कोई प्राविधान
सामान्य पौधरोपण में सिंचाई के लिए कोई प्राविधान नहीं है जबकि अन्य योजनाओं में रोपित पौधों की सिंचाई कराई जाती है। इस समय सड़क किनारे के पौधों की सिंचाई के लिए पांच टैंकर लगाए गए हैं। जरूरत पड़ेगी तो कुछ टैंकर किराए भी लिए जाएंगे।
विज्ञापन
आरके त्रिपाठी, एसडीओ वन ललितपुर