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जेपीसी से जुड़े दो हजार किसान नहीं कर सके बुबाई
Updated Thu, 21 Dec 2017 01:57 AM IST
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जेपीसी से जुड़े दो हजार किसान नहीं कर सके बुवाई
ललितपुर। जाखलौन पंप केनाल से जुड़े दैलवारा और अमरपुर माइनर के करीब आधा दर्जन गांव के दो हजार किसान रबी की फसल की बुवाई नहीं कर सके हैं। इसका कारण डेढ़ माह बाद भी जेपीसी नहर का पानी खेतों तक नहीं पहुंचने के कारण किसानों की बुुवाई नहीं हो पा रही है। परेशान किसानों ने बुधवार को डीएम को ज्ञापन देकर खेतों की सिंचाई करने के लिए जाखलौन पंप केनाल का पानी मांगा है।
बंदरगुढ़ा स्थित जाखलौन पंप केनाल की नहर के पानी से हर वर्ष हजारों हेक्टेयर जमीन पर की सिंचाई किसानों द्वारा की जाती है। यह जेपीसी की नहर का इस बार संचालन गत 29 अक्तूबर को शुरू हुआ था। तब से लेकर अब तक उक्त नहर का पानी सभी माइनरों की टेल तक नहीं पहुंच सका है। जिसमें दैलवारा माइनर और अमरपुर माइनर शामिल हैं। दैलवारा माइनर के अंतर्गत ग्राम दैलवारा और बख्तर आते हैं। इसमें अकेले ग्राम दैलवारा में ही करीब एक हजार किसान खेती करते हैं, जबकि बख्तर, करगन, नया खेड़ा, सिद्धपुरा और अमरपुर में भी इससे अधिक किसान कई सैकड़ा एकड़ खेतों में खेती करते हैं। नहर संचालन के समय से अब तक जेपीसी के ऊपरी माइनर क्षेत्रों में तो सिंचाई के लिए पानी समय से पहुंचता रहा है, जिसके चलते यहां के किसानों द्वारा बुवाई के बाद खेतों में तीसरी सिंचाई का काम भी शुरू कर दिया है, लेकिन उक्त दैलवारा और अमरपुर माइनर के उक्त आधा सैकड़ा किसानों को पहली सिंचाई के साथ खेतों में रबी की फसल की पहली बुवाई का इंतजार है। उक्त गांव के किसानों ने परेशान होकर बुधवार को डीएम को ज्ञापन देकर समस्या से अवगत कराया है। किसानों ने ज्ञापन में बताया कि टेल तक पानी नहीं पहुंचने से किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। वहीं, किसानों ने नहर व माइनरों में आढ़ा लगाकर पानी रोकने की बात भी बताई है, जो टेल तक पानी नहीं पहुंचने का बड़ा कारण है। सिंचाई का पानी रोकने से कई गांव में बुवाई के बाद फसल सूखनेे का भी खतरा बना हुआ है। जेपीसी केनाल में आढ़ा लगाकर रोकने वाले स्थानों पर निगरानी भी नहीं हो रही है, जिससे मनमाने तरीके से ऊपरी क्षेत्र के लोग पानी रोक लेते हैं और उन्हें सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। ज्ञापन देने के समय भारतीय किसान संघ के प्रांतेय उपाध्यक्ष केहर सिंह बुंदेला, जिला प्रवक्ता नवीन जैन, रामपाल सिंह, सुरेश, गोवर्धन पाल, बाबूलाल, रामसहाय प्रजापति उपस्थित रहे।
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ललितपुर। जाखलौन पंप केनाल से जुड़े दैलवारा और अमरपुर माइनर के करीब आधा दर्जन गांव के दो हजार किसान रबी की फसल की बुवाई नहीं कर सके हैं। इसका कारण डेढ़ माह बाद भी जेपीसी नहर का पानी खेतों तक नहीं पहुंचने के कारण किसानों की बुुवाई नहीं हो पा रही है। परेशान किसानों ने बुधवार को डीएम को ज्ञापन देकर खेतों की सिंचाई करने के लिए जाखलौन पंप केनाल का पानी मांगा है।
बंदरगुढ़ा स्थित जाखलौन पंप केनाल की नहर के पानी से हर वर्ष हजारों हेक्टेयर जमीन पर की सिंचाई किसानों द्वारा की जाती है। यह जेपीसी की नहर का इस बार संचालन गत 29 अक्तूबर को शुरू हुआ था। तब से लेकर अब तक उक्त नहर का पानी सभी माइनरों की टेल तक नहीं पहुंच सका है। जिसमें दैलवारा माइनर और अमरपुर माइनर शामिल हैं। दैलवारा माइनर के अंतर्गत ग्राम दैलवारा और बख्तर आते हैं। इसमें अकेले ग्राम दैलवारा में ही करीब एक हजार किसान खेती करते हैं, जबकि बख्तर, करगन, नया खेड़ा, सिद्धपुरा और अमरपुर में भी इससे अधिक किसान कई सैकड़ा एकड़ खेतों में खेती करते हैं। नहर संचालन के समय से अब तक जेपीसी के ऊपरी माइनर क्षेत्रों में तो सिंचाई के लिए पानी समय से पहुंचता रहा है, जिसके चलते यहां के किसानों द्वारा बुवाई के बाद खेतों में तीसरी सिंचाई का काम भी शुरू कर दिया है, लेकिन उक्त दैलवारा और अमरपुर माइनर के उक्त आधा सैकड़ा किसानों को पहली सिंचाई के साथ खेतों में रबी की फसल की पहली बुवाई का इंतजार है। उक्त गांव के किसानों ने परेशान होकर बुधवार को डीएम को ज्ञापन देकर समस्या से अवगत कराया है। किसानों ने ज्ञापन में बताया कि टेल तक पानी नहीं पहुंचने से किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। वहीं, किसानों ने नहर व माइनरों में आढ़ा लगाकर पानी रोकने की बात भी बताई है, जो टेल तक पानी नहीं पहुंचने का बड़ा कारण है। सिंचाई का पानी रोकने से कई गांव में बुवाई के बाद फसल सूखनेे का भी खतरा बना हुआ है। जेपीसी केनाल में आढ़ा लगाकर रोकने वाले स्थानों पर निगरानी भी नहीं हो रही है, जिससे मनमाने तरीके से ऊपरी क्षेत्र के लोग पानी रोक लेते हैं और उन्हें सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। ज्ञापन देने के समय भारतीय किसान संघ के प्रांतेय उपाध्यक्ष केहर सिंह बुंदेला, जिला प्रवक्ता नवीन जैन, रामपाल सिंह, सुरेश, गोवर्धन पाल, बाबूलाल, रामसहाय प्रजापति उपस्थित रहे।
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