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ब्लाक प्रमुख मड़ावरा के अविश्वास प्रस्ताव को लेकर मचा घमासान
Updated Mon, 25 Sep 2017 12:55 AM IST
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बीडीसी सदस्य के अपहरण के मामले में आया नया मोड़
ललितपुर। ब्लाक प्रमुख मड़ावरा के अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान की तिथि जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे तेजी से घटनाक्रम बदल रहे हैं। जिस शिकायतकर्ता ने अपने पिता के अपहरण होने की तहरीर पुलिस को दी थी,उसने अपनी शिकायत वापस ले ली है। इस संबंध में उसने जिलाधिकारी को एक शपथ पत्र भी दिया है। वहीं, ब्लाक प्रमुख का ड़ावरा चंद्रदीप रावत का कहना कहना है कि विपक्षी दल ने उस पर दबाव बनाकर यह लिखवाया है वहीं विपक्षी अभी भी तीन दर्जन से अधिक क्षेत्र पंचायत सदस्यों को अपने कब्जे में रखे हैं।
जिले में ब्लाक बार व बिरधा के प्रमुख राजनीतिक उठापटक से उबर आए हैं। लेकिन, ब्लाक मड़ावरा को लेकर अभी भी घमासान जारी है। इसमें सत्तारूढ़ दल के नेताओं की दिलचस्पी से हर रोज घटनाक्रम बदल रहे हैं। बीते दिनों महेंद्र पुत्र भगुंते अहिरवार ने थाना गिरार में शिकायती पत्र देकर अपने पिता के अपहरण का आरोप लगाया था। इस दौरान प्रदेश के राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ उर्फ मन्नू कोरी और चौकी प्रभारी की बातचीत का ऑडियो भी वायरल हो गया था। जिसमें वह क्षेत्र पंचायत सदस्य के सुरक्षित होने की बात कह रहे थे। हालांकि, ऑडियो वायरल होने के बाद इस मामले से पल्ला झाड़ते नजर आए। ऐसा ही एक ऑडियो भाजपा जिलाध्यक्ष रमेश कुमार सिंह और चौकी प्रभारी को वायरल हुआ था। इसके बाद चौकी इंचार्ज को लाइन हाजिर कर दिया था। इसके अगले ही दिन शिकायतकर्ता महेंद्र ने सामने आते हुए अपहरण के आरोपों पर सफाई दी और कहा कि उसके पिता स्वेच्छा से चले गए थे। उनके ऊपर किसी तरह का कोई दबाव नहीं है। उस पर झूठा प्रार्थना पत्र देने का दबाव बनाया गया था जबकि इससे पहले चौकी इंचार्ज संजय यती ने गांव में जाकर जब पूछताछ की तो दस लोगों द्वारा अपहरण की बात सही बताई गई थी।
.....
तो मंत्री को क्यों कहना पड़ा सुरक्षित है बीडीसी
यदि शिकायतकर्ता के शपथपत्र को सही माना जाए तो सवाल उठता है कि वायरल हुआ ऑडियो में राज्यमंत्री को बीडीसी के सुरक्षित होने की जानकारी क्यों देनी पड़ी। इसके अतिरिक्त यदि अपहरण की शिकायत झूठी थी तो गांव के सभी लोगों ने एकजुट होकर अपहरण करने का आरोप क्यों लगाया गया। शिकायत झूठी होने पर भाजपा नेताओं में इतनी तिलमिलाहट क्यों रही।
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कुछ अनसुलझे सवाल
- शिकायतकर्ता पर पहले दबाव था या अब दबाव बनाया जा रहा है।
- शिकायत झूठी होने पर भाजपा नेता इतनी तिलमिलाहट में क्यों रहे।
- यदि अपहरण नहीं हुआ तो बीडीसी सदस्य अपने पिता के अंतिम संस्कार में दस मिनट के लिए ही क्यों शामिल हुआ।
- अंतिम संस्कार के बाद बीडीसी सदस्य का गायब होना और दुखभरी घड़ी में परिजनों के साथ क्यों नहीं रहे।
- झूठी शिकायत होने पर भाजपा नेताओं और राज्यमंत्री ने उपनिरीक्षक को फोन क्यों किया।
- झूठी शिकायत करने और प्रशासन को गुमराह करने के आरोप में क्या पुलिस महेंद्र पर कोई कार्रवाई करेगी।
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......
जांच समाप्त करने का दिया प्रार्थना पत्र
शिकायतकर्ता महेंद्र अहिरवार ने प्रार्थना पत्र दिया है, जिसमें उसने अपने पिता के अपहरण करने का आरोप लगाया था। इस संबंध में तत्काल जांच करने के आदेश दिए थे। हो सकता है कि उसे बरगलाकर शिकायत वापस लेने का पत्र दिलवाया गया हो, इस कारण उसने शपथपत्र देकर शिकायत की जांच न करने का अनुरोध किया है। उसके दोनों प्रार्थनापत्रों पर विचार किया जाएगा।
मानवेंद्र सिंह, जिलाधिकारी
--------------
पूर्व में दिए गए प्रार्थनापत्र की जांच की जा रही है। शनिवार को दिए गए शपथपत्र को इसी जांच में समायोजित कर जांच की जाएगी। जांच के सभी बिंदुओं पर अग्रिम कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
विनोद कुमार, सीओ महरौनी और जांच अधिकारी
------------------
सभी पहलुओं पर सीओ महरौनी द्वारा जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अवधेश कुमार विजेता, अपर पुलिस अधीक्षक
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भाजपा इस चुनाव में कोई सहभागिता नहीं कर रही है। मामला सिर्फ जानने के लिए उपनिरीक्षक को मैने फोन किया था।
रमेश चंद्र लोधी, जिलाध्यक्ष भाजपा
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ललितपुर। ब्लाक प्रमुख मड़ावरा के अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान की तिथि जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे तेजी से घटनाक्रम बदल रहे हैं। जिस शिकायतकर्ता ने अपने पिता के अपहरण होने की तहरीर पुलिस को दी थी,उसने अपनी शिकायत वापस ले ली है। इस संबंध में उसने जिलाधिकारी को एक शपथ पत्र भी दिया है। वहीं, ब्लाक प्रमुख का ड़ावरा चंद्रदीप रावत का कहना कहना है कि विपक्षी दल ने उस पर दबाव बनाकर यह लिखवाया है वहीं विपक्षी अभी भी तीन दर्जन से अधिक क्षेत्र पंचायत सदस्यों को अपने कब्जे में रखे हैं।
जिले में ब्लाक बार व बिरधा के प्रमुख राजनीतिक उठापटक से उबर आए हैं। लेकिन, ब्लाक मड़ावरा को लेकर अभी भी घमासान जारी है। इसमें सत्तारूढ़ दल के नेताओं की दिलचस्पी से हर रोज घटनाक्रम बदल रहे हैं। बीते दिनों महेंद्र पुत्र भगुंते अहिरवार ने थाना गिरार में शिकायती पत्र देकर अपने पिता के अपहरण का आरोप लगाया था। इस दौरान प्रदेश के राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ उर्फ मन्नू कोरी और चौकी प्रभारी की बातचीत का ऑडियो भी वायरल हो गया था। जिसमें वह क्षेत्र पंचायत सदस्य के सुरक्षित होने की बात कह रहे थे। हालांकि, ऑडियो वायरल होने के बाद इस मामले से पल्ला झाड़ते नजर आए। ऐसा ही एक ऑडियो भाजपा जिलाध्यक्ष रमेश कुमार सिंह और चौकी प्रभारी को वायरल हुआ था। इसके बाद चौकी इंचार्ज को लाइन हाजिर कर दिया था। इसके अगले ही दिन शिकायतकर्ता महेंद्र ने सामने आते हुए अपहरण के आरोपों पर सफाई दी और कहा कि उसके पिता स्वेच्छा से चले गए थे। उनके ऊपर किसी तरह का कोई दबाव नहीं है। उस पर झूठा प्रार्थना पत्र देने का दबाव बनाया गया था जबकि इससे पहले चौकी इंचार्ज संजय यती ने गांव में जाकर जब पूछताछ की तो दस लोगों द्वारा अपहरण की बात सही बताई गई थी।
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तो मंत्री को क्यों कहना पड़ा सुरक्षित है बीडीसी
यदि शिकायतकर्ता के शपथपत्र को सही माना जाए तो सवाल उठता है कि वायरल हुआ ऑडियो में राज्यमंत्री को बीडीसी के सुरक्षित होने की जानकारी क्यों देनी पड़ी। इसके अतिरिक्त यदि अपहरण की शिकायत झूठी थी तो गांव के सभी लोगों ने एकजुट होकर अपहरण करने का आरोप क्यों लगाया गया। शिकायत झूठी होने पर भाजपा नेताओं में इतनी तिलमिलाहट क्यों रही।
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कुछ अनसुलझे सवाल
- शिकायतकर्ता पर पहले दबाव था या अब दबाव बनाया जा रहा है।
- शिकायत झूठी होने पर भाजपा नेता इतनी तिलमिलाहट में क्यों रहे।
- यदि अपहरण नहीं हुआ तो बीडीसी सदस्य अपने पिता के अंतिम संस्कार में दस मिनट के लिए ही क्यों शामिल हुआ।
- अंतिम संस्कार के बाद बीडीसी सदस्य का गायब होना और दुखभरी घड़ी में परिजनों के साथ क्यों नहीं रहे।
- झूठी शिकायत होने पर भाजपा नेताओं और राज्यमंत्री ने उपनिरीक्षक को फोन क्यों किया।
- झूठी शिकायत करने और प्रशासन को गुमराह करने के आरोप में क्या पुलिस महेंद्र पर कोई कार्रवाई करेगी।
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जांच समाप्त करने का दिया प्रार्थना पत्र
शिकायतकर्ता महेंद्र अहिरवार ने प्रार्थना पत्र दिया है, जिसमें उसने अपने पिता के अपहरण करने का आरोप लगाया था। इस संबंध में तत्काल जांच करने के आदेश दिए थे। हो सकता है कि उसे बरगलाकर शिकायत वापस लेने का पत्र दिलवाया गया हो, इस कारण उसने शपथपत्र देकर शिकायत की जांच न करने का अनुरोध किया है। उसके दोनों प्रार्थनापत्रों पर विचार किया जाएगा।
मानवेंद्र सिंह, जिलाधिकारी
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पूर्व में दिए गए प्रार्थनापत्र की जांच की जा रही है। शनिवार को दिए गए शपथपत्र को इसी जांच में समायोजित कर जांच की जाएगी। जांच के सभी बिंदुओं पर अग्रिम कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
विनोद कुमार, सीओ महरौनी और जांच अधिकारी
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सभी पहलुओं पर सीओ महरौनी द्वारा जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अवधेश कुमार विजेता, अपर पुलिस अधीक्षक
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भाजपा इस चुनाव में कोई सहभागिता नहीं कर रही है। मामला सिर्फ जानने के लिए उपनिरीक्षक को मैने फोन किया था।
रमेश चंद्र लोधी, जिलाध्यक्ष भाजपा