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कृषि- जिले में बनेगा सीड प्रोसेसिंग प्लांट
Updated Mon, 07 Aug 2017 01:04 AM IST
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जिले में बनेगा सीड प्रोसेसिंग प्लांट
ललितपुर।
पिछले कई सालों से प्रकृति की मार झेल रहे जिले के किसानों की तकदीर बदलने वाली है। इस दिशा में कृषि विज्ञान केंद्र ने शासन के सहयोग से कदम आगे बढ़ा दिए हैं। विज्ञान केंद्र ने जिले में सीड प्रोसेस प्लांट की स्थापना का निर्णय लिया है। इसे शासन ने हरी झंडी देते हुए 50 लाख रुपये की राशि भी अवमुक्त कर दी है। इसकी स्थापना का रास्ता साफ हो गया है।
बुंदेलखंड के किसानों की हालत किसी से छिपी नहीं है। इसकी वजह कभी ओलावृष्टि/अतिवृष्टि तो कभी सूखे की समस्या से जूझना पड़ रहा है। यदि मौसम मेहरबान रहा तो कभी घटिया बीज किसानों के कर्ज को बढ़ा देती है। बीते सालों में घटिया उड़द ने सैकड़ों किसानों की फसलें बरबाद कर दी थी। इसमें किसानों को आर्थिक के साथ समय का भी नुकसान उठाना पड़ा था। जिसे ध्यान में रखकर कृषि विज्ञान केंद्र ने जिले में सीड प्रोसेस प्लांट लगाने का प्रस्ताव शासन को भेजा। शासन ने इसे मंजूरी प्रदान कर दी है। इसके पश्चात निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था का भी चयन कर लिया गया है। सीएनडीएस संस्था द्वारा ग्राम ककरुआ स्थित जिला कृषि विज्ञान केंद्र में बारिश उपरांत निर्माण कार्य प्रारंभ करने की संभावना है। प्लांट की स्थापना होने से कृषकों को उन्नत किस्म के बीज आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे।
कानपुर की जगह बांदा से संबद्ध
कृषि विज्ञान केंद्र पहले कानपुर कृषि विश्वविद्यालय से जुड़ा हुआ था जो अब बांदा कृषि विश्वविद्यालय से संबद्ध हो गया है। यहां भी नए सिरे से ढांचा तैयार हो रहा है। जिससे किसानों को उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध होने में दिक्कत आ रही है। इस प्लांट की स्थापना से समस्या का समाधान हो जाएगा।
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सीड का होगा रजिस्ट्रेशन
किसानों का जो बीज खरीदा जाएगा, उसका रजिस्ट्रेशन भी कराया जाएगा। इसके लिए बकायदा कमेटी गठित की जाएगी जो बीज की गुणवत्ता का आंकलन करेगी।
एक हजार क्विंटल का होगा सीड प्रोसेस प्लांट
किसानों को उन्नत किस्म बीज बोने के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे। यही नहीं, उनसे बाजार रेट से 10 से 20 प्रतिशत अधिक रेट में बीज खरीदेें जाएंगे
डॉ. एकेएस चौहान, सह निदेशक, कृषि विज्ञान केंद्र
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ललितपुर।
पिछले कई सालों से प्रकृति की मार झेल रहे जिले के किसानों की तकदीर बदलने वाली है। इस दिशा में कृषि विज्ञान केंद्र ने शासन के सहयोग से कदम आगे बढ़ा दिए हैं। विज्ञान केंद्र ने जिले में सीड प्रोसेस प्लांट की स्थापना का निर्णय लिया है। इसे शासन ने हरी झंडी देते हुए 50 लाख रुपये की राशि भी अवमुक्त कर दी है। इसकी स्थापना का रास्ता साफ हो गया है।
बुंदेलखंड के किसानों की हालत किसी से छिपी नहीं है। इसकी वजह कभी ओलावृष्टि/अतिवृष्टि तो कभी सूखे की समस्या से जूझना पड़ रहा है। यदि मौसम मेहरबान रहा तो कभी घटिया बीज किसानों के कर्ज को बढ़ा देती है। बीते सालों में घटिया उड़द ने सैकड़ों किसानों की फसलें बरबाद कर दी थी। इसमें किसानों को आर्थिक के साथ समय का भी नुकसान उठाना पड़ा था। जिसे ध्यान में रखकर कृषि विज्ञान केंद्र ने जिले में सीड प्रोसेस प्लांट लगाने का प्रस्ताव शासन को भेजा। शासन ने इसे मंजूरी प्रदान कर दी है। इसके पश्चात निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था का भी चयन कर लिया गया है। सीएनडीएस संस्था द्वारा ग्राम ककरुआ स्थित जिला कृषि विज्ञान केंद्र में बारिश उपरांत निर्माण कार्य प्रारंभ करने की संभावना है। प्लांट की स्थापना होने से कृषकों को उन्नत किस्म के बीज आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे।
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कानपुर की जगह बांदा से संबद्ध
कृषि विज्ञान केंद्र पहले कानपुर कृषि विश्वविद्यालय से जुड़ा हुआ था जो अब बांदा कृषि विश्वविद्यालय से संबद्ध हो गया है। यहां भी नए सिरे से ढांचा तैयार हो रहा है। जिससे किसानों को उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध होने में दिक्कत आ रही है। इस प्लांट की स्थापना से समस्या का समाधान हो जाएगा।
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सीड का होगा रजिस्ट्रेशन
किसानों का जो बीज खरीदा जाएगा, उसका रजिस्ट्रेशन भी कराया जाएगा। इसके लिए बकायदा कमेटी गठित की जाएगी जो बीज की गुणवत्ता का आंकलन करेगी।
एक हजार क्विंटल का होगा सीड प्रोसेस प्लांट
किसानों को उन्नत किस्म बीज बोने के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे। यही नहीं, उनसे बाजार रेट से 10 से 20 प्रतिशत अधिक रेट में बीज खरीदेें जाएंगे
डॉ. एकेएस चौहान, सह निदेशक, कृषि विज्ञान केंद्र